रविवार 4 और 5 दिसंबर को JNU में हुई हिंसा के बाद JNU प्रशासन का एक कदम अब सवालोंके घेरे में है. घटना के बाद प्रशासन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को घटना कीरिपोर्ट सौंपी थी. इस दो पेज की रिपोर्ट में JNU प्रशासन ने मांग की थी कि कैम्पसमें हालात स्थिर नहीं हैं, लिहाजा कुछ दिनों के लिए कैम्पस को बंद कर दिया जाए.मंत्रालय ने इस मांग को नकार दिया. मंत्रालय के सचिव अमित खरे की अध्यक्षता में हुईमीटिंग में प्रशासन की प्रस्ताव को नकार दिया गया. उलटा नसीहत दी गयी कि कैम्पस मेंशान्ति व्यवस्था बहाल करें. इस सन्दर्भ में स्टोरी प्रकाशित की है Economic Timesने. जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में हिंसा हुई. इस हिंसा को आतंकी हमला कहा जारहा है. कुछ लोग चेहरे पर नक़ाब बांधकर कैम्पस में दाखिल हुए. स्टूडेंट्स को पीटा.लाठियों से. इतनी पिटाई की लोग घायल हुए. प्रोफ़ेसर भी पीटे गए. दिल्ली पुलिस औरजेएनयू प्रशासन पर बड़ा आरोप लगा. दिल्ली पुलिस चुपचाप लोगों को पिटते देखती रही.जेएनयू प्रशासन ने सुरक्षा को चाकचौबंद करने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया. अपनी दोपेज की रिपोर्ट में JNU प्रशासन ने फीस वृद्धि का विरोध कर रहे छात्रों की तरफइशारा किया है. आरोप लगाए हैं कि इन छात्रों की वजह से कैम्पस में हिंसा हुई. कुछेकमहीनों पहले जेएनयू में फीस वृद्धि हुई थी. इसका छात्रों ने बहुत विरोध किया था.प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन्हीं छात्रों ने एडमिन ब्लॉक में तोड़फोड़की थी. कुलपति के ऑफिस में भी जमकर बवाल काटा था. लेकिन जेएनयू प्रशासन ने अपनीजांच रिपोर्ट में हमला करने वाले छात्रों का ज़िक्र नहीं किया है. कहीं भी इस बात काज़िक्र नहीं है कि बाहरी नक़ाबपोश और हथियारबंद गुंडे कैसे जेएनयू कैम्पस में घुस आए.इसके उलट रिपोर्ट में तो ये कहा गया है कि विश्वविद्यालय ने पुलिस बुलाई क्योंकिसेमेस्टर के रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे छात्र रजिस्ट्रेशन करवाने आए छात्रों केप्रति उग्र हो गए थे. रिपोर्ट में लिखा है, "प्रशासन ने पुलिस से जल्द से काल्ड आनेके लिए संपर्क किया. लेकिन जब तक पुलिस आई, तब तक रजिस्ट्रेशन करवाने आये छात्रोंका समूह इसका विरोध कर रहे छात्रों से पिट चुका था." इसके साथ ही रिपोर्ट में लिखागया है कि नक़ाबपोश उपद्रवी जेएनयू के पेरियार हॉस्टल में घुस आए. लेकिन रिपोर्ट मेंसाबरमती हॉस्टल का ज़िक्र नहीं किया गया, जहां से सबसे अधिक हिंसा की खबरें आ रहीहैं. जेएनयू प्रशासन ने पहले भी फीस वृद्धि का विरोध कर रहे छात्रों को आड़े हाथोंलिया था. कहा था कि 4 जनवरी को छात्र Communications and Information Services(CIS) में घुस गए. सर्वरों को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाबाधित हुई. कुछ देर बाद सर्वर को ठीक करके रजिस्ट्रेशन फिर से शुरू किया गया. 5जनवरी को भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने की कोशिश की गयी, जिसके बादतनाव हुआ. फिर हुई हिंसा, ऐसा कहना है जेएनयू का. वही इस घटना में घायल हुए छात्रबताते हैं कि प्रशासन और पुलिस ने शह देकर भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीयविद्यार्थी परिषद् (एबीवीपी) के गुंडों को कैम्पस में घुसने दिया. आरोप है कि जबकैम्पस में घुसे गुंडों में छात्रों पर हमला किया तो पुलिस तमाशबीन बनाकर देखतीरही. और सभी हमलावरों के चले जाने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की. लेकिन अबजेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार ने PTI से कहा है कि विश्वविद्यालय को बंद करने कीकोई मांग नहीं उठाई गयी है. लेकिन यहां पर ये बात भी बतानी ज़रूरी है कि EconomicTimes ने अपनी खबर में ये भी बताया है कि जिस मीटिंग के बाद कैम्पस को बंद करने कीमांग उठायी गयी, उस मीटिंग में कुलपति जगदीश कुमार मौजूद ही नहीं थे.No suggestion made to HRD to temporarily shut JNU campus: University VC MJagadesh Kumar to PTI— Press Trust of India (@PTI_News) January 8, 2020--------------------------------------------------------------------------------लल्लनटॉप वीडियो : JNU हिंसा पर इन पिंकी चौधरी की बात सुन एबीवीपी, लेफ्ट औरदिल्ली पुलिस सब दंग रह जाएंगे