एक हंसता-खेलता परिवार, जो अपनी नई-नवेली बहू के स्वागत में निहाल हुआ जा रहा था.एक पति, जो कोरोना लॉकडाउन के बाद पहली बार अपने परिवार से मिलने वाला था. कितनेक़िस्से, कितना इंतज़ार. सब खत्म हो गया. बाकी रह गई है कसक. और, उठती हूक के तलेदबी प्रार्थनाएं. कि सब आशंकाएं शून्य साबित हों.