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पीएम कौन के सवाल पर अखिलेश जो बोले, उससे मुलायम सिंह खुश होंगे!

सपा बसपा ने दिया कांग्रेस को झटका, कहा - भाजपा, कांग्रेस में कोई अंतर नहीं.

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सीन-1 : नवंबर 2016. कुछ ही महीनों बाद यूपी में चुनाव होने वाले थे. तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक दिन के लिए संसद आये. मीडिया से बात करते हुए अखिलेश ने एक नया नाम दिया. ‘बीबीसी2’. अखिलेश ने कहा आजकल पत्थर लगाने वाली टीवी में खूब आती हैं, उनका नया नाम बीबीसी 2 होना चाहिए. फिर इसका फुल फॉर्म भी अखिलेश ने बताया- बुआ ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन. निशाना मायावती पर था. जिसके बाद अखिलेश और उनके साथ खड़े सपा सांसदों ने जमकर ठहाका लगाया.

सीन-2 :  मायावती ने अखिलेश पर पलटवार किया. अखिलेश यादव को सपा मुखिया यानी मुलायम सिंह यादव का बबुआ करार दे दिया. बबुआ यानी भोला भोला लड़का. मायावती ने मीडिया से कहा ये सपा मुखिया का बबुआ, किसी को बुआ, किसी को माता, किसी को चाचा कहता है और पैर छूता रहता है. उनसे कोई रिश्ता और लेना देना नहीं है. गेस्ट हाउस कांड के बाद अब पीछे मुड़कर देखने का वक्त नहीं है.

एक लंबे अरसे के बाद सपा बसपा फिर एक साथ हैं.
एक लंबे अरसे के बाद सपा बसपा फिर एक साथ हैं.

सीन-3 : तारीख 12 जनवरी, 2019. मायावती और अखिलेश यादव दोनों एक साथ शायद पहली बार मीडिया के सामने थे. महागठबंधन की घोषणा करने आए थे. बुआ भतीजे का बचाव कर रही थीं. भतीजा बुआ की इज्जत को खुद की इज्जत बता रहा था. इसी कलेवर को शास्त्रों में राजनीति कहा गया है. जहां कुछ भी स्थाई नहीं होता. सीन-1 और सीन-2 टूटकर सीन-3 बन जाता है. दुश्मन साथ आ जाते हैं. तो सपा और बसपा दोनों साथ आए. गेस्ट हाउस कांड पीछे छूट गया. लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस में मायावती ने ऐलान किया कि दोनों पार्टियों ने 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय किया है. दो सीट कांग्रेस के लिए तो दे अन्य के लिए छोड़ी हैं. हालांकि ये अन्य कौन है, कुछ क्लीयर नहीं है. माया बोलीं कि यह गठबंधन भाजपा को फिर से सत्ता में आने से रोकेगा. इस पल को देखकर तमाम लोगों को 1993 का वो पल भी याद आ गया होगा जब माया के गुरु कांशीराम और अखिलेश के पिता मुलायम मिल गए थे और नारा निकला था – मिले मुलायम-कांशीराम, हवा में उड़ गए जयश्रीराम.

अखिलेश और मायावती के सामने मुलायम और कांशीराम के करिश्मे को दोहराने की चुनौती है.
अखिलेश और मायावती के सामने मुलायम और कांशीराम के करिश्मे को दोहराने की चुनौती है.

खैर कौन उड़ेगा, कौन टिकेगा ये भविष्य में छुपा है. फिलहाल इस मौके पर मायावती ने क्या कहा, वो देखिए –

  • भाजपा सबसे बड़ी जातिवादी पार्टी है. पूरा देश भाजपा की तानाशाही से परेशान है.
  • हमारा गठबंधन राजनीतिक क्रांति लाएगा. देशहित और जनहित को ध्यान में रखकर हमने साथ आने का निर्णय किया है.
  • हम दलितों किसानों युवाओं बेरोजगारों महिलाओं पिछड़ों और अल्पसंख्यक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए हमसे लोगों को काफी उम्मीद है.
मायावती ने शिवपाल को भाजपा की बी टीम बताते हुए मतदाताओं को उनसे सावधान रहने के लिए कहा.
मायावती ने शिवपाल को भाजपा की बी टीम बताते हुए मतदाताओं को उनसे सावधान रहने के लिए कहा.
  • 1993 में भी कांशीराम जी और मुलायम सिंह यादव जी के नेतृत्व में बीजेपी की जहरीली, सांप्रदायिक और जातिवादी राजनीति से प्रदेश को दूर रखने के लिए गठबंधन हुआ था. देश में फिर से ऐसे ही हालात हैं. यही कारण है कि हमने साथ आने का निर्णय किया है.
  • कांग्रेस को गठबंधन में शामिल न करने के कई कारण हैं. 1975 में कांग्रेस ने इमरजेंसी घोषित की थी. जबकि आज के समय में अघोषित इमरजेंसी है. गठबंधन में कांग्रेस के साथ का कोई खास फायदा नहीं है.
  • कांग्रेस और बीजेपी की सोच एक जैसी है. रक्षा डीलों में दोनों ने गड़बड़ी की है. पहले कांग्रेस ने बोफोर्स किया और अब भाजपा राफेल कर रही है.
  • अमेठी और रायबरेली की सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी है.
  • हमारे गठबंधन से डरकर बीजेपी अखिलेश का नाम खनन घोटाले में घसीट रही है और सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है. हमारा गठबंधन इससे और मजबूत होगा.
  • पर्दे के पीछे से बीजेपी शिवपाल की पार्टी चला रही है. यूपी के लोग अपना वोट बर्बाद नहीं करेंगे. शिवपाल पर पानी की तरह बहाया पैसा बर्बाद हो जाएगा.
चरखा दांव के लिए मशहूर मुलायम अपने बेटे के सामने पस्त होते नजर आ रहे हैं.
चरखा दांव के लिए मशहूर मुलायम अपने बेटे के सामने पस्त होते नजर आ रहे हैं.

अखिलेश यादव ने उस दिन के बारे में भी बताया जब उनके मन में इस गठबंधन की नींव पड़ी. लेकिन कभी कार्यकर्ताओं से पिता मुलायम को प्रधानमंत्री बनाने का आह्वान करने वाले अखिलेश ने ये बताने से इंकार कर दिया कि पीएम पद के लिए वे किसका सपोर्ट करेंगे. अखिलेश प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे माया, मुलायम, राहुल या किसी अन्य का नाम लेने से बचते रहे.

अखिलेश ने और क्या कहा-

  • यह केवल चुनावी गठबंधन नहीं है. बल्कि बीजेपी द्वारा किए गए अन्याय और अत्याचारों के अंत के लिए किया गया गठबंधन है.
  • मेरे मन में गठबंधन की नींव उसी दिन पड़ गई थी. जिस दिन सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेताओं ने आदरणीय मायावती जी पर अशोभनीय टिप्पणी की थी. मैंने उसी दिन बसपा से गठबंधन के लिए उसी दिन मुहर लगा दी थी.
  • बसपा से गठबंधन के लिए दो कदम पीछे भी हटना पड़ेगा तो हटेंगे. मगर भाजपा का अहंकार तोड़ेंगे.
अखिलेश ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि बसपा सुप्रीमो का सम्मान ही उनका सम्मान है.
अखिलेश ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा कि बसपा सुप्रीमो का सम्मान ही उनका सम्मान है.
  • आज से सपा का हर कार्यकर्ता ये बात गांठ बांध ले कि मायावती जी का सम्मान मेरा सम्मान है. उनका अपमान मेरा अपमान है. इस रिश्ते को मजबूती से आगे बढ़ाना है.
  • आपको पता है कि मैं प्रधानमंत्री पद के लिए किसे सपोर्ट करूंगा. यूपी ने कई प्रधानमंत्री दिए हैं. मुझे खुशी है कि आगे भी प्रधानमंत्री यूपी से हो.

अब अखिलेश जिस तरह प्रधानमंत्री के पद पर कन्नी काट गए. उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या अभी दोनों दलों के बीच साफ नहीं है कि 2019 के बाद क्या? क्या अखिलेश के मन में अब भी अपने पिता मुलायम के लिए कोई सरप्राइज है. इसे इस एक बात से और बल मिलता है कि भले माया ने कांग्रेस पर निशाना साधा. पर अखिलेश ने कुछ खास नहीं बोला. तो इन संकेतों का क्या अर्थ निकाला जाए. ये सबसे बड़ी पहेली है. जोकि 2019 के बाद ही खुलेगी.


वीडियो देखें: सपा-बसपा ने लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन का ऐलान किया

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Uttar Pradesh: SP Chief Akhilesh Yadav and BSP Chief Mayawati bitter rival turned partners in polls announced their mega alliance

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