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5 महीने पहले ही कांग्रेस में आने वाली उर्मिला ने किस विश्वासघात की वजह से पार्टी छोड़ दी?

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”न तो मैंने चुनावों के चलते पार्टी जॉइन की है. न मैं चुनाव के बाद पार्टी से दूर जाने वाली हूं. मैं यहां रहने आई हूं. मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि मैं कांग्रेस की विचारधारा में यकीन करती हूं.”

ये शब्द हैं उर्मिला मातोंडकर के. जब उन्होंने 27 मार्च 2019 के दिन कांग्रेस ज्वाइन की थी तब उन्होंने ये बातें की थी. अब इन बातों के लगभग 5 महीने बीतने के बाद 10 सितंबर 2019 के दिन उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देते हुए क्या कहा, इस पर भी गौर करना ज़रूरी है.

उर्मिला ने कहा-

‘मैंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनाएं मुंबई कांग्रेस में एक बड़े लक्ष्य पर काम करने की बजाय, घर के अंदर की राजनीति से लड़ने के लिए पार्टी में निहित स्वार्थों की इजाजत देने से इनकार करती हैं. पहली बार मेरे मन में इस्तीफे का विचार तब आया था, जब मेरी लगातार कोशिशों के बाद भी तत्कालीन मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को लिखे 16 मई के मेरे लेटर के संबंध में पार्टी ने कोई एक्शन नहीं लिया. इस लेटर में किए गए गोपनीय संवाद को बड़ी आसानी से मीडिया में लीक कर दिया गया. यह मेरे साथ विश्वासघात था. मैंने लगातार इसका विरोध किया. लेकिन पार्टी में किसी ने इसे लेकर माफी नहीं मांगी. यहां तक कि चिंता भी नहीं जाहिर की. इतना ही नहीं लेटर में जिन लोगों के नाम थे, उनमें से कुछ को मुंबई नॉर्थ में कांग्रेस के घटिया प्रदर्शन के बावजूद नए पद दे दिए गए.

उर्मिला मातोंडकर ने कहा, यह साफ है कि मुंबई कांग्रेस के प्रमुख पदाधिकारी पार्टी की बेहतरी के लिए संगठन में बदलाव लाने में असमर्थ हैं.

Urmila

लेटर वाला मामला है क्या?
23 मई 2019 को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने थे,  7 दिन पहले यानी 16 मई को उर्मिला ने एक लेटर लिखा. उस समय के मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को. यह लेटर गोपनीय था. लेटर में हार के कारणों का जिक्र था. उर्मिला ने अपनी हार के लिए स्थानीय नेताओं पर उंगली उठाई थी. कमजोर रणनीति का जिक्र किया था. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी और फंड की कमी को हार की वजह बताया था. उर्मिला ने लिखा कि लोकल स्तर पर पार्टी का कोई नेतृत्व नहीं था. चुनाव जीतने के लिए मैंने कड़ी मेहनत की, लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं से जिस सहयोग की उम्मीद मैं कर रही थी वो नहीं मिला. अपने पत्र में उर्मिला ने मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम के करीबी सहयोगियों संदेश कोंदविल्कर और भूषण पाटिल की आलोचना भी की थी. 9 पन्ने का यह लेटर मीडिया में लीक हो गया. इससे उर्मिला काफी नाराज हुईं.

हालांकि इस्तीफे के बाद उर्मिला ने कहा कि वह विचारों और विचारधाराओं’ के पक्ष में खड़ी हैं. वह लोगों के लिए ‘ईमानदारी और गरिमा’ के साथ काम करती रहेंगी.

जिस दिन उर्मिला ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया उसी दिन पार्टी के एक और सीनियर नेता ने इस्तीफा दिया. कृपाशंकर सिंह.  मुंबई में उत्तर भारतीय चेहरा. सरकार में गृहराज्य मंत्री रहे. इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 पर संसद के दोनों सदनों में चली बहस के बाद से ही वह अपनी पार्टी के रुख से आहत थे.

एक न्यूज चैनल से बातचीत में कृपाशंकर सिंह ने कहा,

5 अगस्त को जब लोकसभा में जम्मू-कश्मीर से 370 को हटाने की बात आई. मुझे लगा कि सरकार ने एक अच्छा फैसला लिया है. उसके साथ स्टैंड करना चाहिए. हमारी कांग्रेस पार्टी ने विरोध किया. मैं खुद को नहीं समझा पा रहा था कि मैं गलत हूं या वहां से कहीं से लग रहा है…मैंने शीर्ष नेतृत्व के बहुत सारे लोगों से चर्चा कि इस पर कुछ करो. एक तरफ पूरा देश है. दूसरी तरफ आप इस तरह की बात कर रहे हैं. कांग्रेस के इस रुख ने मुझे बहुत आहत किया.

ये तो कृपाशंकर सिंह की बात थी जो उन्होंने मीडिया को बताई, लेकिन अंदरखाने की जानकारी रखने वाले दो वजहें गिनाते हैं. पुत्रमोह और मुख्यमंत्री से प्रेम. कृपाशंकर अपने बेटे नरेंद्र को पॉलिटिक्स में सेट करना चाहते हैं. अब चूंकि कांग्रेस खुद सेट हो चुकी है तो वहां उनका क्या ही होगा. इसलिए नजर बीजेपी में जाने पर है. अब कृपाशंकर को राज्यसभा का टिकट मिले न मिले, बेटे को टिकट मिल जाए. लहर में बेटा भी जीत जाए तो सीवी दुरुस्त हो.

कृपाशंकर सिंह मुंबई में कांग्रेस पार्टी का उत्तर भारतीय चेहरा थे. अब इस्तीफा दे दिया है.
कृपाशंकर सिंह मुंबई में कांग्रेस पार्टी का उत्तर भारतीय चेहरा थे. अब इस्तीफा दे चुके हैं.

दूसरी चीज. कृपाशंकर की मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से खूब जमती है. एक बरस से ये पींग प्यार चल रहा है. इसलिए कांग्रेस की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वालों को उनका जाना चौंकाई नहीं लगा. बाकी नेता जाते हैं तो वजह राजनीतिक बताते हैं.

कांग्रेस के इन नेताओं ने ऐसे समय में इस्तीफा दिया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. इसका एलान कभी भी हो सकता है. लेकिन कांग्रेस अंदरुनी कलह से जूझ रही है.


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