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तू-तड़ाक कह-कहलवा कर ओबामा ने मोदी का फायदा उठा लिया!

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अभी हाल ही में दो ख़ास लोगों ने आम पर चर्चा की. अक्षय कुमार ने पीएम मोदी का इंटरव्यू लिया. इसमें मोदी ने कई ‘नॉन-पॉलिटिकल’ सवालों के जवाब दिए. जैसे वो आम कैसे खाते हैं, कम क्यों सोते हैं, बैंक अकाउंट में कितना पैसा है, गुस्सा आने पर क्या करते हैं वग़ैरह वग़ैरह. इसी इंटरव्यू में मोदी ने ये राज भी खोला कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा उनसे दोस्ती में ‘तू-तड़ाक’ करके बात करते हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर खलिहर बैठी जनता पूछने लगी कि ‘अंग्रेज़ी में तू कैसे बोलते हैं भाई?’

लगता है ज़रूर पीएम मोदी ने ओबामा को कहा होगा 'और बता यार कैसा है तू, भाभी बच्चे सब ठीक हैं न?'
लगता है ज़रूर पीएम मोदी ने ओबामा को कहा होगा ‘और बता यार कैसा है तू, भाभी बच्चे सब ठीक हैं न?’

तो कुल मिलाकर उनकी बात का लब्बोलुआब ये रहा कि ‘ओबामा मोदी के अच्छे दोस्त हैं’

# अब एक बंदा अलग धनिया बोने आ गया:

पीएम ने तो कह दिया कि ओबामा से गहरी छनती है. लेकिन ओबामा के साथ तब काम करने वाले बेंजामिन रोड्स ने कुछ अलग ही केमिस्ट्री बता दी. ओबामा के पूर्व निजी एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सहयोगी रहे हैं बेंजामिन रोड्स. दि एशिया ग्रुप के ‘दि टीलीव्स’ पॉडकास्ट में पूर्वी एशियाई मामलों के पूर्व सहायक विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल और भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा के साथ बातचीत कर रहे थे बेंजामिन रोड्स.

अपने इस पॉडकास्ट इंटरव्यू में रोड्स ने बताया है कि ओबामा ने पेरिस जलवायु समझौते के लिए भारत को मनाने के लिए खूब जतन किया.

# 26 जनवरी, मोदी और ओबामा:

आपको याद होगा कि ओबामा 26 जनवरी, 2015 को गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत आए थे. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार रोड्स ने बताया कि ओबामा अपनी गणित के हिसाब से भारत आए थे. क्योंकि उन्हें पीएम मोदी से पर्सनल केमिस्ट्री बढ़ानी थी. और इसके पीछे वजह थी पेरिस जलवायु समझौता. जिस पर भारत मान नहीं रहा था.

रोड्स की मानें तो भारत आने के लिए ओबामा ने अपना पहले से तय ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन भी टाल दिया.

# अब ये क्या बला है?

‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के संयुक्त सत्र को संबोधित करने का सालाना कार्यक्रम है. यह हर साल की शुरुआत में ही होता है. लेकिन 2015 का ये संबोधन ओबामा ने अपने अधिकारियों से सलाह मशविरा करके आगे बढ़ा दिया क्योंकि उन्हें बताया गया कि भारत जाने से अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते के लिए भारत को मना सकता है.

तो कुल मिलाकर बेंजामिन रोड्स ने अपने इस इंटरव्यू में बताया कि ओबामा अपना काम निकालने के लिए तरह-तरह की गणित भिड़ाते हैं. भारत आना भी उन्हीं तरीकों में से एक था. और भारत आने की कोई ख़ास वजह थी नहीं.

लेकिन एक बात और ध्यान रखनी पड़ेगी कि अगर अमेरिका जैसे देश का राष्ट्रपति ये सब खेल खेलता है तो मकसद क्या है ? यहां मकसद था पर्यावरण बचाने का. और ये अच्छी बात है कि एक अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया का जल-जंगल-आसमान बचाने के लिए अपनी तरफ़ से रणनीति पर काम कर रहा था. और अब दुनिया ट्रंप को भी देख रही है जो महज़ एक दीवार उठाने के लिए लोगों की नौकरियों से खेल रहे हैं.


वीडियो देखें:  सांसद वरुण गांधी ने जिस गांव को गोद लिया वहां सड़क तक नहीं है-

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