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पहले नरेंद्र मोदी समर्थकों को मिर्ची लगाई, अब मरहम क्यों लगा रही है अमेरिकी मैगजीन टाइम?

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टाइम-टाइम की बात है. मोदी का टाइम बदला तो अमेरिका की मैगजीन ‘टाइम’ के सुर भी बदल गए. चुनाव प्राचर के दौरान टाइम मैगजीन ने पीएम नरेंद्र मोदी को ‘इंडियाज डिवाइडर इन चीफ’ माने ‘भारत का प्रमुख विभाजनकारी’ लिखा था. मगर अब मैगजीन ने अपने ताजा अंक में मोदी को ‘भारत की एकता’ का नायक करार दिया है. पत्रिका ने लिखा है कि ‘मोदी हैज यूनाइटेड इंडिया लाइक नो प्राइम मिनिस्टर इन डेकेड्स’ मतलब ये कि ‘मोदी ने भारत को इस तरह एकजुट किया है, जितना दशकों में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया.’

क्या लिखा है अमेरिकी पत्रिका ने?
अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा है कि उन्होंने भारत को एक सूत्र में पिरोया है. पिछले कई दशकों में कोई दूसरा प्रधानमंत्री ये काम नहीं कर सका. मोदी ने पिछली बार की तुलना में ज्यादा लोगों का समर्थन जुटाकर फिर से सत्ता हासिल की. मैगजीन के मुताबिक उन्होंने भारत की सबसे बड़ी फॉल्ट लाइन ‘द क्लास डिवाइड’ यानी जाति आधारित बंटवारे को करीब-करीब खत्म कर दिया है.

किसने लिखा है ये लेख?
टाइम की वेबसाइट पर मंगलवार 28 मई के दिन ये लेख छपा है. इसे मनोज लाडवा नाम के एक शख्स ने लिखा है. मनोज ब्रिटेन की कंपनी इंडिया इंक के सीईओ हैं. ये कंपनी इंडिया ग्लोबल बिजनेस का प्रकाशन करती है. ताजा लेख मैगजीन की कवर स्टोरी नहीं है.

मैगजीन ने और क्या-क्या लिखा?
मनोज के आर्टिकल के मुताबिक मोदी की जीत की कुछ खास वजहें हैं-

1-मोदी के दोबारा उभरने का श्रेय उनके पिछड़ी जाति में पैदा होने को जाता है.
2-मोदी का जन्म भारत के सबसे वंचित सामाजिक समूहों में से एक में हुआ.
3-उन्होंने देश के कामगारों और गरीबों से खुद को सीधे जोड़कर अपनी एक नई पहचान बनाई.
4-आजादी के बाद 72 सालों में सबसे ज्यादा समय भारत की सत्ता पर रहने वाला नेहरू-गांधी परिवार ये काम कभी नहीं कर पाया.
5-मोदी की नीतियों के खिलाफ कड़ी और अलग-अलग तरह की आलोचनाओं के बावजूद, पिछले पांच दशकों में कोई भी प्रधानमंत्री भारत के वोटर्स को इतना एकजुट नहीं कर पाया, जितना उन्होंने किया है.
6-सामाजिक रूप से विकासशील नीतियों के जरिए पीएम मोदी ने कई भारतीयों, हिंदू और धार्मिक अल्पसंख्यक, दोनों को किसी भी पिछली सरकार की तुलना में गरीबी से तेज रफ्तार से बाहर निकाला है.

चुनाव के दौरान क्या कहा था?
मैगजीन ने लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी की फोटो के साथ एक हेडलाइन लगाई थी. इसमें पीएम मोदी को इंडियाज डिवाइडर इन चीफ यानी भारत का विभाजनकारी मुखिया बताया गया था. आर्टिकल में पीएम मोदी पर देश के संस्थापकों और बड़े पदों पर रहने वाले लोगों पर भी हमला बोलने का आरोप लगाया गया था. इसमें लिखा गया था कि ‘मोदी की जीत के बाद एक शक पैदा हुआ. जब उन्होंने कई सम्मानित लोगों पर हमला बोलना शुरू किया. उन्होंने नेहरूवाद और समाजवादी विचारधारा पर हमला बोला. इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस मुक्त भारत की भी बात की.’ ये आर्टिकल 10 मई के अंक के लिए आतिश तासीर ने लिखा था. मैगजीन ने पूछा था कि ‘क्या विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र फिर से मोदी को पांच साल का मौका देने को तैयार है?’

पर अब लगता है सब कुछ बदल चुका है. वो चुनाव का दौर था. तब मैगजीन ने मोदी पर कड़ी टिप्पणी की थी. मगर अब उसने पलटी मार ली है. पुराने अंक में आतिश तासीर ने लिंचिंग के मामलों और यूपी में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाए जाने समेत कई बातों को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की थी. बीच चुनाव में आए उस अंक ने भारत में काफी सुर्खियां बटोरी थीं. मोदी समर्थकों ने टाइम की कवर स्टोरी की कड़ी आलोचना की थी. और मोदी विरोधियों ने उसे हाथों हाथ लिया था.


वीडियोः टाइम मैगज़ीन ने पीएम मोदी को इंडिया का डिवाईडर इन चीफ क्यों कहा?

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