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सुनील गावस्कर ने बताई अपने बेटे का नाम वेस्ट इंडीज़ के दिग्गज पर रखने की वजह

West Indies Legend Rohan Kanhai से बहुत प्रभावित हैं Sunil Gavaskar (ट्विटर से साभार)

सुनील गावस्कर. असली लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर गावस्कर दुनिया के बेस्ट बल्लेबाजों में से एक माने जाते हैं. गावस्कर टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज थे. दुनिया के कई बल्लेबाजों को प्रेरित करने वाले गावस्कर खुद वेस्ट इंडीज़ के ग्रेट रोहन कन्हाई से बेहद प्रभावित थे. गावस्कर ने अब उस घटना का जिक्र किया है, जिसके बाद वह रोहन से इतने प्रभावित हुए कि अपने बेटे का नाम ही उनके नाम पर रख लिया.

गावस्कर ने बताया कि 1971 की अपनी डेब्यू सीरीज में वह बैटिंग कर रहे थे.  जब वह सेंचुरी के करीब थे तभी उन्होंने एक रिस्की शॉट खेला. ये देख कन्हाई चलकर उनके पास आए और कुछ ऐसा बोल गए जिस पर गावस्कर को आज भी भरोसा नहीं होता. गावस्कर ने गौरव कपूर के साथ हुई बातचीत के दौरान कहा,

‘अपनी डेब्यू सीरीज के दौरान अगर मैं कोई खराब शॉट खेलता, तो वह मुझे क्रॉस करते हुए विकेटकीपर से बचकर मेरे कान में कहते- ध्यान से! तुम सेंचुरी नहीं मारना चाहते क्या? समस्या क्या है तुम्हारी? वह विरोधी टीम में थे, मुझे स्लेज नहीं कर थे बल्कि चाहते थे कि मैं सेंचुरी मारूं. अविश्वसनीय!’

गावस्कर ने इस सीरीज में तीन सेंचुरी और एक डबल सेंचुरी मारी थी. यह दौरा उनके लिए बेहद सफल रहा था. गावस्कर ने इस टेस्ट सीरीज में 774 रन बनाए थे. हालांकि उनके लिए इस सीरीज का हासिल सिर्फ वर्ल्ड रिकॉर्ड डेब्यू ही नहीं था, उन्होंने इस टूर पर कन्हाई की दोस्ती भी हासिल की. बाद में दोनों बेहद करीबी दोस्त बने. यहां तक कि गावस्कर ने अपने बेटे का नाम भी रोहन रखा. गावस्कर ने इस बारे में कहा,

‘बल्लेबाजी के अलावा मैं रोहन कन्हाई की इतनी इज्जत इसलिए भी करता हूं क्योंकि वह हमेशा सीक्रेट रूप से मेरा हौसला बढ़ाते थे. अफ्रीका और भारत से त्रिनिदाद और गुयाना गए लोगों में हमेशा ही ये बात रही है. फील्ड के बाद वह उन अच्छे लोगों में से एक थे जिनसे मैं परिचित हूं. उनके नाम पर अपने बेटे का नाम रखने में मुझे दिमाग नहीं लगाना पड़ा.’

बता दें कि सुनील गावस्कर के बेटे रोहन गावस्कर भी क्रिकेटर रह चुके हैं. उन्होंने भारत के लिए कुल 11 वनडे खेले थे. रोहन ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में लगभग सात हजार रन बनाए हैं.

किस्सा अंबर रॉय का, जिन्होंने 15 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था

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