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बाबा रामपाल को हत्या के इन दो मामलों में कोर्ट ने दोषी बताया

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बरवाला के सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल को हिसार की एक अदालत ने हत्या के दो मामलों में दोषी पाया है. सेंट्रल जेल 1 में बनी स्पेशल कोर्ट के एडीजे डीआर चालिया ने संत रामपाल को दो महिला और एक बच्चे की हत्या के मामले में दोषी करार दिया है. अब सजा पर फैसला 17 अक्टूबर को होगा..

क्या था मामला?

18-19 नवंबर 2014 को रामपाल के समर्थकों और पुलिस के बीच हुई हिंसा में छह महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई थी.

18 नवंबर 2014 को सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल को बरवाला के आश्रम से बाहर निकालने के लिए पुलिस ने एक अभियान शुरू किया था. इस दौरान बरवाला आश्रम के लोगों और पुलिस के बीच हिंसा हो गई थी. करीब दो दिनों तक पुलिस रामपाल को आश्रम से बाहर निकालने के लिए मशक्कत करती रही. 19 नवंबर की रात को बाबा और उसके 500 समर्थकों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. पुलिस और समर्थकों के बीच हुई हिंसा में पांच महिलाओं के साथ ही एक बच्चे की भी मौत हो गई थी. इसके बाद पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थी. पहली एफआईआर का नंबर था 429, जिसमें रामपाल के साथ ही 15 और लोगों पर हत्या का केस दर्ज किया गया था. दूसरी एफआईआर का नंबर था 430, जिसमें रामपाल और 14 दूसरे लोगों पर केस दर्ज किया था. 11 अक्टूबर को इन्हीं दो मामलों में फैसला आना है.

रामपाल को आश्रम से बाहर निकालने क्यों पहुंची थी पुलिस?

ये अलग-अलग तस्वीरें बताती हैं कि दो दिनों में रामपाल समर्थकों ने कितनी हिंसा की थी.
ये अलग-अलग तस्वीरें बताती हैं कि दो दिनों में रामपाल समर्थकों ने कितनी हिंसा की थी.

बात 2006 की है. खुद को कबीरपंथी कहलाने वाले बाबा रामपाल ने आर्य समाज की किताब सत्यार्थ प्रकाश पर कुछ रिमार्क्स पास किए. इससे गुस्साए आर्य समाज के अनुयायियों ने 12 जुलाई 2006 को बाबा के आश्रम पर हमला बोल दिया. बाबा के समर्थकों ने भी हिंसा का जवाब हिंसा से दिया. इस फसाद में 59 लोग घायल हो गए और एक की गोली लगने से मौत हो गई. रामपाल पर उस व्यक्ति की हत्या का केस दर्ज कर लिया गया. इसके अलावा अटेम्प्ट टू मर्डर का चार्ज भी लगा. उस वक़्त बाबा की गिरफ्तारी भी हुई थी. 22 महीने जेल में भी बिताए. 2008 में बाबा को बेल मिल गई. उसके बाद रामपाल किसी पेशी पर कोर्ट नहीं गए.कोर्ट ने उन्हें एक बार नहीं, बल्कि 42 बार पेशी के लिए बुलाया, लेकिन नहीं गए. नतीजा ये हुआ कि 5 नवंबर को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ़ नॉन बेलेबल वॉरंट जारी कर दिया. जवाब में बाबा के समर्थकों ने चक्का जाम कर दिया. अंबाला, चंडीगढ़, पंचकुला में रोड और रेल ट्रैफिक में बाधा पहुंचाई गई. 9 नवंबर को जब पुलिस बाबा को हिरासत में लेने सतलोक आश्रम पहुंची, तो वहां अलग ही नज़ारा देखने को मिला. और फिर दो दिनों तक हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हो गई. इसके बाद एक बार फिर से रामपाल पर हत्या, हत्या की कोशिश, देशद्रोह, षड्यंत्र रचने और गैर कानूनी हथियार रखने के आरोप में केस दर्ज कर लिया.

दो केस में पहले ही बरी कर चुकी है अदालत

हिसार की एक अदालत रामपाल को दो मामलों में पहले ही बरी कर चुकी है.
हिसार की एक अदालत रामपाल को दो मामलों में पहले ही बरी कर चुकी है.

हिसार की एक अदालत ने 29 अगस्त 2017 को रामपाल को दो मामलों में बरी कर दिया था. इसमें से पहला केस राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का था, जबकि दूसरा केस आश्रम में महिलाओं को बंधक बनाने का था. पुलिस दोनों ही मामलों में अदालत में सबूत पेश नहीं कर पाई और कोर्ट ने रामपाल को बरी कर दिया.

फैसले के दौरान पूरे जिले में लागू हुई धारा 144

पूरे हिसार में धारा 144 लगा दी गई है और फोर्स तैनात है.
पूरे हिसार में धारा 144 लगा दी गई है और फोर्स तैनात है.

18-19 नवंबर 2014 को हुई हिंसा को देखते हुए इस बार प्रशासन सजग था. 11 अक्टूबर को जब रामपाल पर फैसला आना था, तो उससे पहले ही प्रशासन की ओर से पूरे हिसार में धारा 144 लगा दी गई थी. इसके अलावा हिसार के सारे बॉर्डर सील कर दिए गए थे. कोर्ट के तीन किलोमीटर के दायरे को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया था और किसी भी बाहरी के आने-जाने पर रोक लगा दी गई थी. शहर में कुल 48 जगहों पर नाकेबंदी की गई थी. प्रशासन को अंदेशा था कि सुनवाई के दौरान 20,000 समर्थक पहुंच सकते हैं. किसी तरह की हिंसा से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से जिले की पुलिस के 1300 जवान लगाए गए हैं, वहीं बाहर से भी 700 जवान बुलाए गए हैं. आरएएफ की पांच कंपनियां तैनात की गई हैं.


 

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Rampal: Self Cliamed Godman Rampal found guilty in two murder cases by special court of Hisar

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