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रफाएल पर 'द हिंदू' का एक और खुलासा, लेकिन क्या इसमें जानकर कुछ छिपाया गया?

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रफाएल पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने 11 फरवरी को एक और खुलासा किया. अपनी रिपोर्ट में अखबार ने सीधे-सीधे मोदी सरकार पर आरोप लगाए हैं. इन नए खुलासों के बाद कांग्रेस एक बार फिर सरकार पर हमलावर हो गई है. राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि चौकीदार ने खुद दरवाजा खोला और अनिल अंबानी को भारतीय वायुसेना के 30,000 करोड़ लूटने दिए. हालांकि इस खुलासे पर भी सवाल उठे हैं.

क्या है नया खुलासा
 11 फरवरी के अंक में ‘द हिंदू’ अखबार ने लिखा है कि रफाएल रक्षा सौदे की खरीद प्रक्रिया में राजनीतिक दखल दिया गया. इसके कारण भ्रष्टाचार रोकने के लिए निर्धारित गाइडलाइन में ढील दी गई. एस्क्रो अकाउंट जैसे फाइनेंशियल सेफगार्ड होने की शर्त को रद्द कर दिया गया. इतना ही नहीं, बिना बैंक या सॉवरेन गारंटी के ही सौदे को मंजूरी दे दी गई.

मोदी सरकार पहले की यूपीए सरकार पर रक्षा सौदों में दलाली का आरोप लगाती रही है. लेकिन इस बार खुद के दामन पर दाग़ लगते नज़र आ रहे हैं. रफाएल मामले में पहली बार तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.

कांग्रेस रफाएल सौदे में पीएम मोदी को लगातार घेर रही है
कांग्रेस रफाएल सौदे में पीएम मोदी को लगातार घेर रही है

क्या होता है एस्क्रो अकाउंट जिसे हटा दिया गया
एस्क्रो अकाउंट एक अस्थाई बैंक खाता होता है. बैंकिंग की भाषा में बात करें तो जब दो पार्टियां किसी सौदे में लेन-देन पूरा करने के लिए एक बैंक अकाउंट खोलती हैं. तो उसमें किसी तीसरी पार्टी को ट्रस्टी के रूप में शामिल करती हैं. कोई भी लेन-देन इस ट्रस्टी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता. ये ट्रस्टी इस लेन-देन पर पूरी निगरानी रखता है. तो ऐसे अकाउंट को एस्क्रो अकाउंट कहते हैं.

स्टैंडर्ड कॉन्ट्रेक्ट डॉक्यूमेंट के मुताबिक रक्षा सौदे में एस्क्रो अकाउंट जैसे सेफगार्ड का होना ज़रूरी है. लेकिन 24 अगस्त, 2016 को हुई हाई लेवल मीटिंग में रक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी ने इसे बदल दिया. इंटर-गवर्मेंट एग्रीमेंट में बैंक या सॉवरेन गारंटी की शर्त को सिर्फ ‘लेटर ऑफ कंफर्ट’ में बदल दिया गया. फ्रांस सरकार की ओर से वहां के प्रधानमंत्री ने 8 सितंबर, 2016 को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी कर दिया. इसमें कहा गया कि अगर दसॉ एविएशन या एमबीडीए फ्रांस सौदा पूरा करने में विफल रहते हैं तो फ्रांस सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि भारत की ओर से इन कंपनियों को दी गई राशि जल्द से जल्द वापस लौटाई जाए.

क्यों आया मनोहर पर्रिकर का नाम?
भारत और फ्रांस के बीच ये डील 23 सितंबर, 2016 को दिल्ली में साइन हुई थी. इस डील में दोनों देशों की सरकारों के बीच होने वाले इंटर-गवर्मेंट एग्रीमेंट और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट्स को रक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी ने 24 अगस्त, 2016 को ही मंजूरी दे दी थी. कमिटी की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे थे. रक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी भारत के रक्षा सौदों पर अंतिम फैसला करने वाली सबसे बड़ी कमिटी होती है. इसका डिसीजन ही फुल एंड फाइनल होता है.

लेकिन इस मीटिंग में मंजूर हुए इंटर-गवर्मेंट एग्रीमेंट को सितंबर महीने में बदला गया. ये बदलाव हुए डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल की मीटिंग में. इसकी अध्यक्षता की, उस समय रक्षा मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर ने. कुल 8 बदलाव हुए. लेकिन एक बदलाव अहम था. ये था. किसी आवांछित दखल, कंपनी अकाउंट तक पहुंच और एजेंट या एजेंसी को कमीशन देने पर लगने वाली पेनल्टी की शर्त को हटाना. अखबार के मुताबिक इस शर्त को हटाना 2013 में बने स्टैंडर्ड कॉन्ट्रेक्ट डॉक्यूमेंट के खिलाफ है. ये डॉक्यूमेंट 2013 के बाद से भारत के लिए होने वाली हथियारों की ख़रीद में गाइडलाइन की तरह इस्तेमाल होता है.

बदलाव का हुआ था विरोध
इस बदलाव के खिलाफ रफाएल डील में मोल-भाव कर रही कमिटी के तीन सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया था. कमेटी मेंबर एम पी सिंह (कॉस्ट एडवाइज़र), ए.आर.सुले (फाइनेंशियल मैनेजर- एयर) और राजीव वर्मा( जॉइंट सेक्रेटरी) ने एक डिसेंट नोट लिखा. इसमें कहा गया है क्योंकि पैसे का लेनदेन सीधा कंपनी के साथ है, फ्रांस की सरकार के साथ नहीं, इसलिए बेसिक फाइनेंशियल सेफगार्ड को नहीं छोड़ना चाहिए.

इस कमिटी के अलावा फाइनेंशियल एडवाइज़र (डिफेंस) सुधांशु मोहंती ने भी एस्क्रो अकाउंट या इसके जैसा कोई फाइनेंशियल सेफगार्ड रखने की सलाह दी थी. मोहंती ने एक नोट लिखा. उन्होंने कहा कि बैंक या सॉवरिन गारंटी ना होने की सूरत में समझदारी यही होगी कि कोई एस्क्रो अकाउंट या फिर इसी तरह की कोई सुरक्षित व्यवस्था की जाए. पैसे के लेनदेन में फ्रांस की सरकार को शामिल करना बेहतर होगा ताकि सप्लाई में कोई दिक्कत ना हो. खुलासे में ये दावा भी है कि कानून मंत्रालय ने भी सॉवरेन या बैंक गारंटी की जरूरत के बारे में रक्षा मंत्रालय को लिखा था.

खुलासे पर भी उठ रहे हैं सवाल
ट्वीटर पर एक शख्स हैं अभिजीत अय्यर मित्रा. कोणार्क सूर्य मंदिर वाले वीडियो के कारण काफी चर्चा में रहे हैं. वे अखबार के दावे को गलत बता रहे हैं. अभिजीत डिफेंस प्रॉक्यॉरमेंट प्रोसीज़र 2013 यानी DPP-2013 का हवाला देते हुए अखबार के दावे को गलत साबित कर रहे हैं. हालांकि इस पॉलिसी को 2016 में संशोधित किया गया था. इस पॉलिसी के पॉइंट नंबर 108 में लिखा हुआ है कि खरीद की प्रक्रिया में बदलाव हो सकते हैं. लेकिन इस पर मंजूरी के लिए डिफेंस प्रॉक्यॉरमेंट बोर्ड को डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल के सामने प्रस्ताव लाना होगा.

कांग्रेस की ओर से तेज हुआ हमला

कांग्रेस पिछले कई महीनों से रफाएल सौदे में घोटाले का दावा कर रही है. आज के खुलासे के बाद कांग्रेस इस दावे को और मज़बूत हुआ बता रही है. कांग्रेस ने ट्वीट किया है कि पीएमओ ने भ्रष्टाचार रोधी शर्तों में ढील देने के लिए कहा है. पीएमओ बताए कि किसे बचाने की कोशिश हो रही है.


वीडियो- रक्षा मंत्रालय के काम में PMO का अड़ंगा बताया लेकिन सच दबा गए राहुल गांधी

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Rafale deal: Modi government waived anti corruption clauses

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