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मेजर चित्रेश की कहानी, जो अपनी शादी के लिए 28 फरवरी को घर आने वाले थे लेकिन...

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15 फरवरी. देहरादून की नेहरु कॉलोनी के रहने वाले रिटायर्ड पुलिस अफसर एसएस बिष्ट का जन्मदिन था. वो उठे तो घर पर एक सरप्राइज गिफ्ट उनका इंतजार कर रहा था. केक के साथ. इसे उनके बेटे ने भिजवाया था. बिष्ट साहब खुश थे. बेटे का फोन आया. बर्थडे विश किया. बताया 28 फरवरी को घर आ रहा हूं.

ये फोन था मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट का. 28 फरवरी को वो इसलिए आने वाले थे क्योंकि 7 मार्च को उनकी शादी तय थी. उन्होंने मां से फोन पर कहा था कि आकर मैं अपनी पसंद की साड़ी दिलाऊंगा. वही मेरी शादी में पहनना. मगर वो नहीं आए. चित्रेश जम्मू कश्मीर के नौशेरा में पोस्टेड थे. 16 फरवरी की सुबह नौशेरा के बॉर्डर पर कई माइंस मिलीं. आतंकियों ने बिछाई थीं. चित्रेश अपनी बम डिस्पोजल टीम के साथ मौके पर पहुंचे. एक माइन डिफ्यूज कर दी. दूसरी कर रहे थे कि माइन एक्टिवेट हो गई. विस्फोट हुआ. और 31 साल के चित्रेश घायल हो गए. उन्हें अस्पताल लो जाया गया पर उन्हें बचाया नहीं जा सका. चित्रेश शहीद हो गए.

मेजर चित्रेश की मार्च में ही शादी थी.
मेजर चित्रेश की मार्च में ही शादी थी.

जब ये हादसा हुआ. चित्रेश के पिता एसएस बिष्ट बेटे की शादी के कार्ड बांटने में व्यस्त थे. पूरा परिवार शादी की तैयारियों में लगा था. मगर 16 फरवरी की शाम ये माहौल बदल गया. जब बेटे के शहीद होने की खबर घर पहुंची. पिता कहते हैं –

अजीब विडंबना है. वह शादी के लिए घर आने वाला था. अब हम उसके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे हैं.

18 फरवरी को चित्रेश का पार्थिव शरीर जब देहरादून की नेहरु कॉलोनी स्थित अपने घर पहुंचा तो हर तरफ लोग थे. हजारों लोग. सड़क पटी पड़ी थी. नारे गूंज रहे थे – चित्रेश अमर रहें. भारत माता की जय. जब तक सूरज चांद रहेगा, चित्रेश तेरा नाम रहेगा…

मेजर चित्रेश की अंतिम यात्रा में पहुंचे उनके दोस्त मेजर जींतेंद्र रमोला कहते हैं चित्रेश बहुत बहादुर अफसर थे. अपनी ड्यूटी के लिए जुनून से भरे हुए. देश की सेवा करने के किसी भी मौके पर उन्हें कोई रोक नहीं सकता था. चित्रेश का शहीद होना देश के लिए तो बड़ी क्षति है ही, उससे ज्यादा उस परिवार के लिए है जिसने अपना बेटा खो दिया. परिवार के मुताबिक मेजर बिष्‍ट ने अब तक 25 बम डिफ्यूज किए थे. वह पढ़ाई में भी बचपन से ही बहुत होनहार थे. मेजर रैंक के लिए हुई परीक्षा में उन्होंने नौवां स्‍थान हासिल किया था. भारतीय सैन्‍य अकैडमी देहरादून से 2010 में पासआउट हुए थे. फिलहाल सेना की इंजिनियरिंग कोर में तैनात थे.

मेजर चित्रेश की अंतिम यात्रा में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पहुंचे. वो बोले – मैं देश की सेवा में मेजर बिष्ट की शहादत को नमन करता हूं और शहीद के परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. संकट की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ खड़ा है.

शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट और उनके परिवार को हमारा भी सलाम.


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Pulwama Attack : Story of Major Chitresh Singh Bisht who lost his life defusing an IED in Jammu & Kashmir

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