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वाजपेयी का वीडियो शेयर कर वरुण गांधी ने इशारों में कह दी BJP को चुभने वाली बात

41 साल पुराने इस वीडियो में वाजपेयी सरकार को चेतावनी देते दिख रहे हैं.

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बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक वीडियो क्लिप शेयर की है. इसमें वाजपेयी किसानों के समर्थन की बात करते दिख रहे हैं.
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अमित
14 अक्तूबर 2021 (Updated: 14 अक्तूबर 2021, 09:59 AM IST)
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बीजेपी सांसद वरुण गांधी इस वक्त किसानों के मुद्दे को लेकर पूरे फॉर्म में हैं. एक तरफ जहां बीजेपी के दूसरे बड़े नेता किसान आंदोलन को तवज्जो नहीं दे रहे, वहीं वरुण गांधी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर किसान आंदोलन के समर्थन में काफी मुखर हैं. गुरुवार को उन्होंने ट्विटर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के एक पुराने वीडियो की क्लिप शेयर की. इसमें वाजपेयी उस वक्त चल रहे किसान आंदोलन के बारे में बोलते नजर आ रहे हैं. वरुण के इस ट्वीट को बीजेपी सरकार पर निशाने की तरह देखा जा रहा है. वीडियो बहाना, सरकार पर निशाना? वरुण गांधी वैसे तो पहले भी किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट कर चुके हैं, लेकिन इस बार सीधा सरकार पर निशाना लगाते दिख रहे हैं. उन्होंने 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी के दिए एक भाषण का वीडियो शेयर किया है. 42 सेकेंड्स के इस वीडियो में वाजपेयी किसानों के मुद्दे पर सरकार को ललकारते दिख रहे हैं. वीडियो में वो कहते हैं कि,
"मैं सरकार को चेतावनी देना चाहता हूं. दमन के तरीके छोड़ दीजिए. डराने की कोशिश मत करिए. किसान डरने वाला नहीं है. हम किसानों के आंदोलन का दलीय राजनीति के लिए उपयोग नहीं करना चाहते. लेकिन हम किसानों की उचित मांग का समर्थन करते हैं. और अगर सरकार दमन करेगी, कानून का दुरुपयोग करेगी, शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश करेगी तो किसानों के संघर्ष में कूदने में हम संकोच नहीं करेंगे. हम उनके साथ कंधे से कंधा लगाकर खड़े होंगे."
पहले भी किए हैं चुभने वाले ट्वीट ये पहली बार नहीं है जब वरुण गांधी ने बीजेपी और सरकार को चुभने वाले ट्वीट किए हैं. 28 अगस्त को उन्होंने हरियाणा के करनाल में किसानों के प्रदर्शन को लेकर एसडीएम आयुष सिन्हा का वीडियो शेयर किया था. इस वीडियो में एसडीएम किसानों का सिर फोड़ने की बात कहते सुने जा रहे हैं. ये वीडियो खूब वायरल हुआ था. इसके बाद एसडीएम का तबादला भी कर दिया गया था. वीडियो शेयर करते हुए वरुण ने लिखा था,
"मुझे उम्मीद है कि वीडियो में अधिकारी जो कुछ कह रहा है, वो एडिटेड है. हालांकि अगर ये बात सही है तो एक लोकतांत्रिक देश में ऐसा कृत्य स्वीकार नहीं किया जा सकता."
31 अगस्त को उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र पीलीभीत में किसानों की सभा में शामिल होने की बात करते हुए ये ट्वीट किया, 5 सितंबर को उन्होंने मुजफ्फरनगर में किसान महासभा का वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया,
"मुजफ्फरनगर में आज के विरोध प्रदर्शन में लाखों किसान जमा हुए. ये हमारे अपने हैं. हमें इनके साथ सम्मानपूर्ण तरीके से फिर से बातचीत का सिलसिला शुरू करना चाहिए. इनके दर्द और दृष्टिकोण को समझकर और उनके साथ काम करके एक समान धरातल पर पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए."
12 सितंबर को उन्होंने किसानों की समस्याओं पर सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखा अपना पत्र शेयर करते हुए ट्वीट किया,
"किसानों की बुनियादी समस्याओं को इंगित करता मेरा पत्र उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नाम, उम्मीद है कि भूमिपुत्रों की बात ज़रूर सुनी जाएगी."
4 अक्टूबर को वरुण गांधी ने लखीमपुर में किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ाने के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी अपनी चिट्ठी शेयर करते हुए ट्वीट किया,
"लखीमपुर खीरी की हृदय-विदारक घटना में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ. इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से सख्त कार्रवाई करने का निवेदन करता हूँ."
5 अक्टूबर को उन्होंने लखीमपुर खीरी कांड का वो वायरल वीडियो शेयर किया, जिसमें एक कार लोगों को रौंदते हुए निकल रही है. उन्होंने लिखा.
"लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ियों से जानबूझकर कुचलने का यह वीडियो किसी की भी आत्मा को झकझोर देगा. पुलिस इस वीडियो का संज्ञान लेकर इन गाड़ियों के मालिकों, इनमें बैठे लोगों और इस प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार करे."
बता दें कि लखीमपुर खीरी कांड में किसानों को कुचलने के आरोप में पुलिस ने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा उर्फ टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को गिरफ्तार कर रखा है. बीजेपी कार्यकारिणी से वरुण-मेनका बाहर वरुण गांधी के नए तेवर ऐसे समय दिख रहे हैं, जब 7 अक्टूबर को बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी का नाम हटा दिया था. सियासी हलकों में कहा जा रहा है कि किसानों के मुद्दों पर पार्टी लाइन से अलग और मुखर होकर बोलने की वजह से ये फैसला लिया गया है. हालांकि 11 अक्टूबर को सुल्तानपुर में मीडिया के साथ बातचीत में मेनका गांधी ने साफ कहा था कि कार्यकारिणी बदलना पार्टी का हक है. इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं.

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