क्या वाकई रूस में पुतिन का तख्तापलट हो जाएगा?
इस बगावत का यूक्रेन युद्ध पर क्या असर होगा?

रूस में शुरू हुए आंतरिक कलह की चर्चा दुनिया भर में हो रही है. यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे प्राइवेट आर्मी ‘वेग्नर ग्रुप’ ने दावा किया कि उसने रोस्तोव में रूसी सेना के मुख्यालय पर कब्जा कर लिया. इधर, राजधानी मॉस्को में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सड़कों पर टैंक उतार दिये गए. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 जून को एक संबोधन में कहा कि बागियों को करारा जवाब दिया जाएगा. लेकिन एक चर्चा हो रही है कि क्या ‘वेग्नर ग्रुप’ के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन सरकार के खिलाफ तख्तापलट कर देंगे? क्या पुतिन सत्ता से हट जाएंगे?
पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ पिछले डेढ़ साल से जंग छेड़ रखा है. इस साल मई में इसी वेग्नेर ग्रुप ने यूक्रेन के बाखमुत में जीत का दावा किया था. मई में ही वेग्नर ने रूसी सेना पर पर्याप्त हथियार न देने का इल्ज़ाम लगा दिया था. प्रिगोझिन ने इस हालात के लिए रूसी सेना को ज़िम्मेदार ठहराया. इसके बाद से ही वेग्नेर ग्रुप और रूसी सेना के बीच दरार बढ़ गई थी. हाल में, रूस के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन में लड़ रहे ‘वॉलंटियर ग्रुप्स’ के लिए एक निर्देश जारी किया. इसके मुताबिक, वॉलंटियर फ़ोर्सेस में शामिल लड़ाकों को डिफ़ेंस मिनिस्ट्री के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन करना होगा. लेकिन प्रिगोझिन ने कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से साफ मना कर दिया था.
पुतिन का क्या होगा?इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (IDSA) की असोसिएट फेलो डॉ स्वस्ति राव के मुताबिक, इस पूरे संकट का ठीकरा किसी न किसी पर फोड़ा जाएगा. इस बार रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और रूसी आर्म्ड फोर्सेस के 'चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ' जनरल गेरासिमोव ‘बलि का बकरा’ बनते दिख रहे हैं. कायदे से पुतिन को सख्ती से सबकुछ नियंत्रण में करना पड़ेगा.
क्या पुतिन को हटना पड़ेगा? इस पर वो कहती हैं कि कुर्सी खतरे से बाहर भी नहीं है. या तो सर्गेई शोइगु को प्रिगोझिन से बातचीत के लिए मनाने को कहा जाएगा या दूसरे उपाय किए जाएंगे.
स्वस्ति राव कहती हैं कि वेग्नेर ग्रुप ने रोस्तोव में जिस तरीके से कब्जा किया और मॉस्को में जिस तरीके से एयरफोर्स के प्लेन दिख रहे हैं इससे लगता है कि सबकुछ कंट्रोल में नहीं है. दी लल्लनटॉप से बातचीत में वो बताती हैं,
“जो भी इस तरह के सत्तावादी नेता होते हैं, उन्हें प्राइवेट आर्मी की जरूरत होती है. वो इसलिए क्योंकि सैन्य तख्तापलट की स्थिति में ऐसी आर्मी काम आती है. प्रिगोझिन ने पहले भी रूसी सेना के खिलाफ कई बयान दिये थे लेकिन पुतिन ने सार्वजनिक रूप से कोई जवाब नहीं दिया था. अब स्थिति गंभीर है इसलिए उन्हें सामने आना पड़ा.”
हालांकि JNU में 'सेंटर फॉर रशियन एंड सेंट्रल एशियन स्टडीज' के असोसिएट प्रोफेसर अमिताभ सिंह कहते हैं कि सत्ता पलटने की संभावना बेहद कम है. इससे पुतिन के शासन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. अमिताभ सिंह के मुताबिक,
यूक्रेन युद्ध पर क्या असर होगा?“असली फर्क ये पड़ेगा कि पुतिन अब जनता के सामने एक्सपोज हो जाएंगे. उनके सामने दुनिया को दिखाने के लिए नहीं रहेगा कि रूस एक एकीकृत आर्मी है. ये अगर कुछ दिनों तक चलेगा तो लोगों को लगेगा कि रूसी सेना भी कमजोर है.”
इस संकट के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की का भी बयान सामने आया है. जेलेंस्की ने ट्विटर पर लिखा कि जो भी बुराई का रास्ता चुनता है, वो खुद को नष्ट कर देता है. जब आप दूसरे देश को खत्म करने के लिए सैनिकों की टुकड़ियां भेजेंगे, और फिर उन्हें रोका जाएगा, तो वो टुकड़ियां भागेंगी और विश्वासघात करेंगी ही. जेलेंस्की ने ये भी लिखा,
"यूक्रेन, यूरोप को रूसी अराजकता को फैलने से बचाने में सक्षम रहा है. हम अपनी एकता और ताकत बनाए रखेंगे. हमारे सभी कमांडर और सैनिक जानते हैं उन्हें क्या करना है. यूक्रेन की जीत होगी."
यूक्रेन के मसले पर डॉ स्वस्ति राव कहती हैं कि अगर प्रिगोझिन रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और जनरल गेरासिमोव को रक्षा मंत्रालय से हटाने में कामयाब हो जाते हैं तो यूक्रेन में रूस की सेना पर असर पड़ेगा. हालांकि इसकी संभावना काफी कम है. लेकिन इस लड़ाई से यूक्रेन को बढ़त मिलेगी. स्थिति काफी गंभीर है. अगर पुतिन इसे कंट्रोल करने की कोशिश करेंगे और आर्मी को प्रिगोझिन के खिलाफ लगाएंगे तो उन्हें कम से कम यूक्रेन से ध्यान हटाना पड़ेगा.
उन्होंने आगे कहा कि येवगेनी प्रिगोझिन ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम नहीं लिया है. प्रिगोझिन ने रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु और जनरल गेरासिमोव का नाम लिया. उन्हें भ्रष्ट बताया. प्रिगोझिन बार-बार कह रहे हैं कि उनकी लड़ाई रक्षा मंत्रालय से है. ये रूस की नैतिक हार है, उनके लिए नाक कटाने वाला मामला है.
प्रोफेसर अमिताभ के मुताबिक, रोस्तोव से आगे येवगेनी प्रिगोझिन की आर्मी ज्यादा नहीं बढ़ पाएगी, क्योंकि उनकी संख्या काफी कम है. 20 से 25 हजार. इससे सिर्फ ये होगा कि रूसी आर्मी का मनोबल घटेगा, जब यूक्रेन में वो जंग लड़ रही है.
पुतिन ने क्या कहा?इस संकट के बीच 24 जून को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने देश को संबोधित किया. पुतिन ने कहा कि रूस अपने भविष्य के लिए मजबूती से लड़ रहा है. इस 'धोखे' का सामना करने के लिए सभी फोर्स को एकजुट होने की जरूरत है. पुतिन ने कहा कि हमारी पीठ पर छुरा घोंपा गया है और उन्हें (बागियों) इसकी सजा मिलेगी. हम अपने लोगों की सुरक्षा के लिए लड़ रहे हैं. हथियारबंद बागियों को हम करारा जवाब देंगे. हालांकि इस संबोधन में उन्होंने प्रिगोझिन या वेग्नेर ग्रुप का नाम नहीं लिया.
वीडियो: रूस के वैग्नर ग्रुप का व्लादामीर पुतिन के साथ क्या कनेक्शन है?

