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एकनाथ शिंदे के तीन मंत्रियों पर बवाल मचा, एक तो भ्रष्टाचार केस के दोषी हैं!

शपथ लेते ही एकनाथ शिंदे के कई मंत्री विवादों में आ गए!

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10 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 10 अगस्त 2022, 07:52 PM IST)
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बाएं से दाएं - महाराष्ट्र के मंत्री संजय राठौड़, अब्दुल सत्तार और विजय कुमार गावित | फाइल फोटो: आजतक
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महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) सरकार का मंगलवार, 9 अगस्त को कैबिनेट विस्तार (Maharashtra Cabinet Expansion) हुआ. शपथ लेने वाले 18 मंत्रियों में से 3 विवादों में घिर गए हैं. 

ये तीन मंत्री हैं संजय राठौड़, अब्दुल सत्तार और विजय कुमार गावित.

पहले मंत्री संजय राठौड़ 

मंत्री बनाया गया है. पिछली उद्धव ठाकरे सरकार में भी मंत्री थे, लेकिन 2021 में पुणे में एक महिला की मौत के मामले में उनका नाम आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. बाद में इस केस में उन्हें महाराष्ट्र पुलिस ने क्लीन चिट दे दी थी.

मंगलवार को संजय राठौड़ के मंत्री बनने पर जब सवाल उठे तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि पुलिस ने राठौड़ को क्लीन चिट दे दी है, इसलिए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. बता दें कि जून 2022 में जब शिवसेना विधायक एकनाथ शिंदे ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बगावत की तो संजय राठौड़ उनके खेमे में शामिल हो गए थे.

दूसरी ओर महाराष्ट्र भाजपा उपाध्यक्ष चित्रा वाघ ने भी संजय राठौड़ पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि वो व्यक्ति मंत्री बना है, जो कथित तौर पर एक महिला की मौत के लिए जिम्मेदार था. इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, चित्रा बाघ ने कहा,

'संजय राठौड़ के कैबिनेट मंत्री बनने के बाद भी मैं उनके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूंगी. मुझे अपने देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है. हम लड़ेंगे और जीतेंगे.'

दूसरे मंत्री अब्दुल सत्तार 

एकनाथ शिंदे के मंत्रिमंडल में शिवसेना के बागी विधायक अब्दुल सत्तार भी मंत्री बने हैं. हाल ही में सत्तार की 3 बेटियों और एक बेटे का नाम 7 हजार 880 अभ्यर्थियों की उस सूची में मिला था, जिन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2019-20 में कथित धांधली के चलते अयोग्य घोषित किया गया था. अब्दुल सत्तार पहले कांग्रेस में थे और 2019 के विधानसभा चुनाव से पहले वो शिवसेना में शामिल हो गए थे. बीते जून में वह एकनाथ शिंदे खेमे में शामिल हो गए.

टीईटी विवाद पर अब्दुल सत्तार ने सफाई देते हुए मीडिया से कहा,

“मेरी दोनों बेटियां 2019 में अपात्र हुई हैं. उन्होंने कोई गड़बड़ी नहीं की. मैं खुद मामले की जांच की मांग करता हूं. ये मुझे बदनाम करने का एक षड्यंत्र है. सारे आरोप बेबुनियाद हैं. महाराष्ट्र मंत्रिमंडल विस्तार के एक दिन पहले टीईटी की सूची का मामला उठाया गया. इसे पता चलता है कि ये मेरे खिलाफ एक राजनीतिक साजिश है.”

तीसरे मंत्री विजयकुमार गावित 

संजय राठौड़ और अब्दुल सत्तार के अलावा भाजपा नेता विजयकुमार गावित के भी शिंदे सरकार में मंत्री बनने पर सवाल उठे हैं. महाराष्ट्र में 2004 और 2009 के बीच आदिवासी विकास विभाग में भ्रष्टाचार हुआ था. आरोप ही नहीं लगे थे, 5 साल पहले ही इस मामले में विजयकुमार गावित को दोषी भी पाया गया था. गावित 2004-09 के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में थे और तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार में आदिवासी विकास मंत्रालय का प्रभार उनके ही हाथ में था. इसके बाद वह एनसीपी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे. उन्होंने 2014 और 2019 में बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता था.

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