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अहमदाबादः ऑक्सीजन और दवाइयों की सप्लाई का इतना बुरा हाल कि तंग आकर डॉक्टर ने इस्तीफा दिया

सरकारी अस्पताल गर्दन तक क़र्ज़ में दबे हुए हैं.

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Gujrat के अहमदाबाद में अस्पताल में बेड ना मिलने पर एंबुलेंस में ही भर्ती कोविड पॉजिटिव मरीज की देखभाल करते परिजन. (फोटो: PTI)
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अमित
22 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 22 अप्रैल 2021, 12:35 PM IST)
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कोरोना की दूसरी लहर (Covid 19 Second Wave) को आम लोग जितनी बुरी तरह भुगत रहे हैं, उतना ही प्रेशर हेल्थकेयर वर्कर्स भी झेल रहे हैं. डॉक्टर और नर्स सबसे ज्यादा प्रेशर में काम कर रहे हैं. ऐसे माहौल में, अहमदाबाद में प्राइवेट अस्पतालों और नर्सिंग होम के संगठन के सेक्रेटरी डॉक्टर वीरेन शाह ने पद से इस्तीफा दे दिया. वहज आप खुद ही समझ सकते हैं. कि उन्हें सरकार से किसी भी तरह की मदद नहीं मिल रही थी. परेशान होकर दिया इस्तीफा गुजरात भी कोरोना वायरस की मार से बेज़ार है. इसमें भी अहमदाबाद शहर की हालत काफी खराब है. मरीजों के दबाव के चलते प्राइवेट कोविड अस्पतालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन मिलने में काफी दिक्कतें आ रही थीं. परिणाम स्वरूप कई मरीज और उनके परिवार दवाइयों के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. अस्पताल ही नहीं, होम आइसोलेट होने वाले मरीज भी दवाई न मिलने से परेशान हैं. अहमदाबाद अस्पताल और नर्सिंग होम एसोसिएशन (AHNA), जो अहमदाबाद के डॉक्टरों और नर्सों  का संगठन है, उसके सेक्रेटरी थे डॉक्टर वीरेन शाह. डॉ शाह एसोसिएशन के मुद्दों को लगातार अहमदाबाद नगर निगम से लेकर सरकार के सामने उठाते रहे थे. वह उस प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थे जो मंगलवार को रिवरफ्रंट हाउस में अहमदाबाद के म्युनिसिपल कमिश्नर को कोरोना मरीजों की परेशानी के बारे में बताने गए थे. प्राइवेट कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन और रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी के मामले में जब डॉक्टर वीरेन शाह को संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया. कोरोना से बिगड़े हालात में अहमदाबाद नगर निगम डॉक्टरों को लगातार दोषी ठहरा रहा था. इसे लेकर भी डॉक्टर शाह काफी नाराज थे. डॉक्टर वीरेन शाह के इस्तीफा देने की पुष्टि बुधवार को AHNA के प्रेसिडेंट डॉक्टर भरत गडवी ने भी कर दी. उन्होंने कहा,
सरकार के रेमडेसिविर की और ऑक्सीजन की प्राइवेट हॉस्पिटल में सप्लाई सुनिश्चित न करने और होम आइसोलेशन पर गए मरीजों के लिए रेमडेसिविर उपलब्ध न करा पाने से नाखुश होकर डॉक्टर वीरेन शाह ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है. हमने उनसे ऐसा न करने की मिन्नतें कीं लेकिन वह नहीं माने.
प्राइवेट अस्पतालों के क़र्ज़ का बोझ AHNA का ये भी दावा है कि पिछले 10 महीने में प्राइवेट हॉस्पिटल्स का 40 करोड़ रुपए म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन पर बकाया है. क्योंकि इलाज की सुविधाएं न होने पर प्राइवेट हॉस्पिटल की मदद ली गई थी. मंगलवार, 20 अप्रैल को AHNA ने अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को ये पेमेंट क्यिलर करने को कहा था. जिससे लोगों को कम से कम प्राइवेट हॉस्पिटल में ही भेजा जा सके. इसपर डॉक्टर गडवी ने कहा,
हमें म्यूनिसिपल कमिश्नर ने आश्वासन दिया था कि 90 फीसदी बकाया पेमेंट शनिवार तक कर दिया जाएगा. इससे प्राइवेट हॉस्पिटल को काफी राहत मिलेगी.
गुजरात हाई कोर्ट ने भी राज्य में इलाज के लिए इंजेक्शन के मामले में सरकार को फटकार लगाई थी. सरकार का दावा है कि अस्पताल में भर्ती मरीज और होम आइसोलेट मरीजों को इंजेक्शन देने की व्यवस्था की गई है. जबकि रिपोर्ट्स तो ये कहती हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को ही अभी तक रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों को यह कैसे मिल पाएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. गुजरात के आंकड़े भी देख लीजिए -गुजरात में बुधवार को भी अहमदाबाद जिले में सबसे ज्यादा 4906 मरीजों की पुष्टि हुई है. -इनमें अहमदाबाद शहर में 4821 हैं इसके बाद सूरत जिले में 2240, वडोदरा में 751, राजकोट में 516, जामनगर में 809, मेहसाणा में 495, गांधीनगर में 281 और भावनगर 260 मरीजों की मिले हैं. -बुधवार को सामने आए कुल 12,553 मरीजों के साथ ही अब तक गुजरात में कुल मामले 4,40,731 हो गए हैं.

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