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घिनौनेपन की हद! दिलजीत के जन्मदिन पर ट्रेंड हुआ #HappyBirthdayKhalistaniKutte

किसी को जन्मदिन पर 'खालिस्तानी कुत्ते' कहने वाले इन लोगों को किसका समर्थन है?

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6 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 6 जनवरी 2021, 01:37 PM IST)
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आलोचना समझ आती है, पर ये बेहूदगी? इसका क्या जवाब है. फोटो - ट्विटर
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हम मनोरंजन के शौकीन हैं. वो भी भारी वाले. जगह और मौका मिले बस, लपक पड़ते हैं. कुछ भी सुनने को मिल जाए, देखने भर को मिल जाए बस. पड़ोसी की किटपीट से लेकर न्यूज़ चैनल की डिबेट तक. हमें एक ही चीज़ से मतलब है. एंटरटेनमेंट, एंटरटेनमेंट और एंटरटेनमेंट. यहां से भी पेट ना भरे तो ऑनलाइन बैटलग्राउंड ज़िंदाबाद. नहीं, पबजी वापस नहीं आया. बात हो रही है ट्विटर की. जहां आए दिन कुछ ना कुछ भसड़ मची ही रहती है. ‘गदर’ का सनी पाजी शायद कभी शांत बैठ जाए, पर ट्विटर? सवाल ही नहीं. ट्विटर पर आज एक नई गंद देखी गई. हां गंद, क्यूंकि इसे ट्रेंड बोलना तो ‘रेन एंड मार्टिन’ की तौहीन होगी. हुआ यूं कि आज है दिलजीत दोसांझ का हैप्पी बर्थडे.  सुबह से #HappyBirthdayDiljitDosanjh ट्रेंड होने लगा था. फिर आई ट्रोल्स की फ़ौज. ये वो लोग हैं जो कहते हैं कि अंडे वाला केक है, नहीं खाएंगे. फिर बर्बाद करने भी सबसे पहले कूद पड़ते हैं. ये अपना हैशटैग चलाने लगे. #HappyBirthdayKhalistaniKutte. हद ही हो गई. मतलब घिनौनेपन की इंतेहा. ट्विटर पर अपनी बात सुनाने के दो तरीके हैं. भद्दी गालियां और मीम्स. बाकी फैक्ट्स की उम्मीद तो लोग टीवी न्यूज़ से भी नहीं करते अब .  यहां भी मीम्स चलने लगे. वो भी धड़ल्ले से. अपने-अपने सार्काज़म का नमूना पेश करने लगे. हैशटैग को ट्वीट कर लिखने लगे कि इस हैशटैग को ट्रेंड मत करवाओ. ठीक ‘सिंघम’ के उस सीन की तरह. कोई गौतम को गोट्या-गोट्या कहकर नहीं बुलाएगा. पर यहां ये बात फनी नहीं. निहायत ही भद्दी है. आप किसी को कुत्ता और खालिस्तानी कहकर अपना पॉइंट प्रूव करना चाहते हैं. ठीक उस बच्चे की तरह जिसे मनपसंद चीज़ ना मिले तो बिलबिलाने लगता है. कुछ भी अटर-पटर बकने लगता है. कुछ कहने लगे कि कुत्ते से तुलना मत करो. कुत्ता वफ़ादार होता है. भाई, इन्होंने कौनसी गद्दारी कर ली? हालांकि इस मामले का जन्म आज नहीं हुआ है. रंजिश पुरानी है. थोड़ा सा पीछे चलते हैं. किसान आंदोलन चल रहे हैं. ट्विटर क्वीन कंगना का एक ट्वीट आया. पंजाब वाली किसान दादी को शाहीन बाग वाली दादी यानि बिलकिस बानो बता डाला. कहने लगी कि पैसे लेकर प्रोटेस्ट करती हैं. जवाब में उतरे दिलजीत दोसांझ. कंगना के एक ट्वीट पर करारा जवाब दिया. उस टाइम भी एक हैशटैग ट्रेंड हुआ था. जो दिलजीत की मां को लेकर भद्दी बात कह रहा था.   बहरहाल, ये खालिस्तानी ऐंगल आया कहां से? जब से फार्मर्स प्रोटेस्ट शुरू हुए हैं, एक तबका इनपर खालिस्तानी ठप्पा लगाने में लगा है. दिलजीत भी खुलकर इस प्रोटेस्ट के फ़ेवर में दिखे. ट्विटर, इंस्टाग्राम, कहीं अपनी बात कहने से ना चूके. यहां तक कि किसानों को सपोर्ट करने सिंघु बॉर्डर तक पहुंच गए. डोनेशन भी दिया. 1 करोड़ का. पर ज़्यादा हो-हल्ला नहीं मचाया. जब आम किसान खालिस्तानी कहलाने से नहीं बच पाए, तो बेचारे दिलजीत किस मिट्टी के बने थे. अभी भी ट्विटर पर ये बेहूदगी जारी है. खत्म नहीं होगी. कल कोई नया ड्रामा शुरू हो जाएगा. फिर लोग इसे छोड़, उसमें लग जाएंगे.

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