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झारखंड में पुलिस ने उपद्रवियों के पोस्टर लगाए, सरकार ने कागज भेजकर कानून गिना दिया!

"पोस्टर क्यों लगे? दो दिन के अंदर जवाब दीजिए"

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16 जून 2022 (अपडेटेड: 20 जून 2022, 08:29 PM IST)
Jharkhand Goernment against poster of accused by  police
झारखंड सरकार योगी के बुलडोज़र मॉडल का ठप्पा नहीं लेना चाहती! (फोटो सोर्स- आज तक)
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झारखंड (Jharkhand) की राजधानी रांची (Ranchi) में पोस्टर (Poster) विवाद छिड़ गया है. बीते शुक्रवार 10 जून को यहां हिंसा हुई थी. जिसके बाद राज्यपाल रमेश बैस के निर्देश पर अमल करते हुए पुलिस ने उपद्रवियों के पोस्टर लगाए थे. हालांकि सत्तारूढ़ पार्टी के हस्तक्षेप के बाद इन्हें हटाया भी गया, लेकिन अब झारखंड सरकार के प्रधान सचिव ने रांची के SSP को नोटिस भेज दिया है. इस नोटिस में इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए पोस्टर लगाने की कार्रवाई को गलत बताया गया है. और SSP से दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण की मांग की गई है.

झारखंड में अब तक क्या हुआ?

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के कथित आपत्तिजनक बयान के बाद बीते शुक्रवार, 10 जून को देश के कई हिस्सों में पथराव और हिंसा हुई थी. ये सब कुछ नूपुर शर्मा के विरोध और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर हुआ. अलग-अलग जगहों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई. झारखंड की राजधानी रांची में भी उपद्रवियों की भीड़ ने पथराव, तोड़फोड़ और फायरिंग की थी. रांची के मेनरोड में नमाज के बाद लोगों ने जमकर बवाल काटा. ये लोग हाथ में काला और धार्मिक झंडा लिए हुए थे. डेली मार्केट के सामने अल्बर्ट एक्का चौक की तरफ अनियंत्रित भीड़ से पुलिस की झड़प भी हुई. जिसके बाद भीड़ आक्रोशित होकर हिंसा पर उतारू हो गई.

इसके बाद बीते सोमवार 13 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस (Ramesh Bais) से पूरे मामले पर रिपोर्ट मांगी. राज्यपाल ने रांची के डीजीपी और बाकी कई आला अधिकारियों को तलब किया. और साथ ही फरमान सुनाया कि हिंसा में शामिल उपद्रवियों के पोस्टर और होर्डिंग शहर के ख़ास चौराहों पर लगाए जाएं ताकि जनता उन्हें पहचान कर पुलिस की मदद कर सके. राज्यपाल रमेश बैस ने रांची पुलिस की तत्परता पर भी सवाल किए.

दी प्रिंट की खबर के मुताबिक, राज्यपाल रमेश बैस के निर्देश के बाद पुलिस ने बीते मंगलवार को चौक-चौराहों पर उपद्रवियों के पोस्टर लगा दिए थे. लेकिन ये सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के हस्तक्षेप के बाद पोस्टर हटा लिए गए. कह दिया गया कि पोस्टर में संशोधन होना है.

पुलिस को सरकार का नोटिस

इसके बाद कल 15 जून की देर रात झारखंड के गृह, कारा और आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का ने रांची के SSP सुरेंद्र कुमार झा को एक नोटिस भेजा. जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक ऑर्डर का हवाला देते हुए पोस्टर लगाने की कार्रवाई को गलत कहा गया है. और SSP झा से इस बारे में दो दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है.

नोटिस में चीफ़ सेक्रेटरी ने कहा है कि 

“10 जून को रांची में हुई घटनाओं में नाजायज मजमों में और हिंसा में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के फोटो वाले पोस्टर 14 जून को रांची पुलिस द्वारा लगाए गए. जिनमें कई व्यक्तियों के नाम एवं अन्य विवरण भी दिए गए हैं. यह विधिसम्मत नहीं है और उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा पीआईएल संख्या-532/2020 में तारीख़ 9 मार्च, 2020 को पारित न्यायादेश के विरुद्ध है. इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण पत्र मिलने के दो दिनों के अंदर समर्पित करें.”

बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के साल 2020 के जिस आदेश का जिक्र झारखंड के चीफ़ सेक्रेटरी ने किया है. उसमें न्यायालय ने सड़क किनारे लगे बैनरों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए थे. उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया था कि बिना किसी कानूनी अधिकार के लोगों की व्यक्तिगत जानकारी वाले बैनर सड़क किनारे न लगाए जाएं. ऐसा करना लोगों की निजता में एक अनुचित हस्तक्षेप है. और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद - 21 का भी उल्लंघन है.

हालांकि पत्रकारों से बात करते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कहते हैं कि हम झारखंड को कट्टरपंथियों के टकराव का मैदान नहीं बनने देंगे. शांति-सौहार्द की बहाली होगी. एसआईटी की जांच से सब साफ हो जाएगा. यहां किसी को भी धर्म के नाम पर नफरत फैलाने की अनुमति नहीं है. 

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