Submit your post

Follow Us

पाकिस्तान इलेक्शन: इस बार यहां चाहे जो जीते, भारत को नुकसान ही होगा

597
शेयर्स

दुनिया में बाकी जगहों पर चुनाव की वजह से परेशानियां खत्म होती हैं. दिक्कतों का हल निकलता है. मगर पाकिस्तान में चुनाव के साथ परेशानियां पैदा होती हैं.

– हेनरी किसिंजर, अमेरिका के पूर्व NSA

25 जुलाई, 2018. इस तारीख को पाकिस्तान में वोट डलेंगे. केंद्र और प्रांत, दोनों के लिए नई सरकारें चुनी जाएंगी. पाकिस्तान में लोकतंत्र का जिंदा होना, अच्छी खबर है. लेकिन लोकतंत्र की सेहत मापने के लिए बस चुनाव काफी नहीं. चुनी हुई सरकार का आजाद होना, सेना और ISI के दबाव के बिना काम करना भी बहुत जरूरी है. पाकिस्तान में चुनाव तो पहले भी हुए हैं. पर ये पहली बार हुआ है कि पिछले दो बार से लगातार वहां चुनी हुई सरकारों ने अपना कार्यकाल पूरा किया. इसका मतलब ये नहीं कि पाकिस्तान में सेना कमजोर पड़ गई है. या कि सेना की तरफ से दखलंदाजी नहीं हो रही है. ये सब हो रहा है. शायद यही वजह है कि पाकिस्तान में तरक्की के कामों से ज्यादा फोकस फालतू की चीजों पर रहता है. मसलन- भारत में गड़बड़ियां पैदा करना. अफगानिस्तान में शांति बहाली की कोशिशों में अड़ंगा लगाना. आतंकवादी संगठनों को सपोर्ट देना.

इमरान की पार्टी और नवाज की पार्टी, दोनों में से कौन जीतेगा ये तय होगा पंजाब में. नैशनल असेंबली की सबसे ज्यादा सीटें वहीं से आती हैं. पंजाब, खासतौर पर सेंट्रल पंजाब नवाज के सपोर्ट का गढ़ रहा है. इमरान इसमें सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
इमरान की पार्टी और नवाज की पार्टी, दोनों में से कौन जीतेगा ये तय होगा पंजाब में. नैशनल असेंबली की सबसे ज्यादा सीटें वहीं से आती हैं. पंजाब, खासतौर पर सेंट्रल पंजाब नवाज के सपोर्ट का गढ़ रहा है. इमरान इसमें सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)

इस बैकग्राउंड में देखिए, तो पाकिस्तान के चुनाव धुकधुकी पैदा करते हैं. पाकिस्तान में चुनाव का नतीजा क्या आता है, कौन जीतता है, कैसी सरकार बनती है, ये सारी बातें भारत के अच्छे-बुरे के साथ जुड़ी हुई हैं.  इस बार के चुनाव में जो बड़े खिलाड़ी हैं, उनके सत्ता में आने से भारत को क्या नफा-नुकसान होगा, ये जान लीजिए-

ये विमान के अंदर की तस्वीर है. जब नवाज शरीफ अपनी बेटी मरियम के साथ लंदन से पाकिस्तान लौट रहे थे. दोनों ने पाकिस्तान आकर गिरफ्तारी दी. ऐसा लगा कि सेना और ISI को नवाज से इस बात की उम्मीद नहीं थी. नवाज और मरियम के जाने के बाद लोगों के बीच उन्हें लेकर सहानुभूति पैदा हुई है (फोटो: रॉयटर्स)
ये विमान के अंदर की तस्वीर है. जब नवाज शरीफ अपनी बेटी मरियम के साथ लंदन से पाकिस्तान लौट रहे थे. दोनों ने पाकिस्तान आकर गिरफ्तारी दी. ऐसा लगा कि सेना और ISI को नवाज से इस बात की उम्मीद नहीं थी. नवाज और मरियम के जाने के बाद लोगों के बीच उन्हें लेकर सहानुभूति पैदा हुई है (फोटो: रॉयटर्स)

PML-N: नवाज जेल में हैं. जेल से छूट भी गए, तो न चुनाव लड़ सकते हैं और न किसी पद पर बैठ सकते हैं. अगर PML-N जीत जाती है, तो नवाज के छोटे भाई शाहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बनेंगे. नवाज की ही तरह शाहबाज भी भारत के साथ रिश्ते सुधारने के हिमायती हैं. मगर नवाज जिस तरह से सेना के साथ भिड़ जाते थे, वैसा शाहबाज का अंदाज नहीं है. कहते हैं कि नवाज और सेना के बीच अगर PML-N चुनाव में जीत जाती है, तो हो सकता है सेना के साथ कोई गुपचुप समझौता हो. जिसके तहत नवाज और मरियम को रिहाई मिल जाए. अगर ऐसा होता है, तो सेना और हावी हो जाएगी. सेना के हावी होने के मतलब है ऐंटी-इंडिया फीलिंग का और जोर पकड़ना. वैसे भी, नवाज के खिलाफ भ्रष्टाचार के अलावा जो एक सबसे गंभीर आरोप लगा है, वो ‘भारत के साथ दोस्ती’ का है. उनके विरोधी ‘मोदी का यार’ कहकर उन्हें घेरते हैं. ये भी एक आशंका है कि अगर PML-N जीत जाती है, तो खुद का गला छुड़ाने के लिए वो भारत के खिलाफ बेवजह आक्रामकता दिखा सकती है.

जहां विरोधी दल अपने खिलाफ ज्यादती की शिकायत कर रहे हैं. सेना और ISI पर अंगुलियां उठ रही हैं. मगर इमरान और उनकी पार्टी लगातार सेना और खुफिया एजेंसियों का बचाव करने में लगे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
जहां विरोधी दल अपने खिलाफ ज्यादती की शिकायत कर रहे हैं. सेना और ISI पर अंगुलियां उठ रही हैं. मगर इमरान और उनकी पार्टी लगातार सेना और खुफिया एजेंसियों का बचाव करने में लगे हैं (फोटो: रॉयटर्स)

PTI- अगर इमरान प्रधानमंत्री बनते हैं, तो भारत के लिए बहुत परेशानी की बात है. इमरान बहुत अप्रत्याशित हैं. एक तरफ जहां वो अपने मेनिफेस्टो में भारत के साथ बातचीत करने की बात करते हैं. वहीं दूसरी तरफ भारत-विरोधी बातें करते हैं. कहते हैं, भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते तोड़ देने चाहिए. दूसरी बात कि इमरान हार्डलाइनर हैं. आतंकवादी संगठनों, कट्टरपंथी जमातों से बातचीत की हिमायत करते हैं. अमेरिका की प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की लिस्ट में शामिल कुछ नामों ने तो खुलकर इमरान को समर्थन दिया है. इसीलिए इमरान के विरोधियों ने उनका एक नाम ‘तालिबान खान’ रख दिया है. चर्चा है कि सेना इमरान को PM बनाने की ठान ली है. अगर ऐसा है, तो इमरान बस नाम के प्रधानमंत्री होंगे. असली ताकत सेना के हाथों में होगी. ऐसे में भारत को पाकिस्तान से शांति-अमन की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. पाकिस्तानी सेना ने जो इतनी ताकत हासिल की है, उसके पीछे एक वजह उसका भारत-विरोधी होना भी तो है. इन सबके अलावा एक और आशंका है. पीटीआई के कुछ नेता खालिस्तान का मुद्दा उठा रहे हैं. उनका कहना है कि अगर इमरान जीतते हैं, तो दुनिया भर के सिख आंदोलनों को मदद दी जाएगी. सिख आंदोलनों से मतलब चरमपंथी मूवमेंट्स से. जिनमें खालिस्तान मुद्दा सबसे ऊपर है.

बिलावल भुट्टो को इस बार के चुनाव से ज्यादा उम्मीद नहीं होनी चाहिए. PPP की छवि को उनके पिता आसिफ अली जरदारी की वजह से काफी धक्का लगा है. ऊपर से बिलावल के पास कोई अनुभव भी नहीं है. उनकी तुलना कई बार राहुल गांधी के साथ होती है. दोनों के पास राजनैतिक विरासत है. दोनों के समर्थक उनसे काफी उम्मीद करते हैं, जबकि विरोधी अनाड़ी और अनुभवहीन कहकर उन्हें सिरे से खारिज कर देते हैं (फोटो: रॉयटर्स)
बिलावल भुट्टो को इस बार के चुनाव से ज्यादा उम्मीद नहीं होनी चाहिए. PPP की छवि को उनके पिता आसिफ अली जरदारी की वजह से काफी धक्का लगा है. ऊपर से बिलावल के पास कोई अनुभव भी नहीं है. उनकी तुलना कई बार राहुल गांधी के साथ होती है. दोनों के पास राजनैतिक विरासत है. दोनों के समर्थक उनसे काफी उम्मीद करते हैं, जबकि विरोधी अनाड़ी और अनुभवहीन कहकर उन्हें सिरे से खारिज कर देते हैं (फोटो: रॉयटर्स)

PPP- बेनजीर भुट्टो जब प्रधानमंत्री थीं, तब उनके विरोधी भी उनके ऊपर ‘इंडियन एजेंट’ होने का इल्जाम लगाते थे. ये उनके पहले कार्यकाल (1988-1990) की बात है. फिर 1993 में जब वो दोबारा प्रधानमंत्री बनीं, तब उनका अंदाज बदल गया. कश्मीर पर कड़ा रुख, भारत के साथ बातचीत करने से इनकार, ये सब करने लगीं वो. इस चुनाव में बेनजीर के बेटे बिलावल भुट्टो पार्टी की बागडोर संभाल रहे हैं. PPP का बेस सिंध इलाके में है. लगता नहीं कि इसके अलावा वो कहीं कुछ खास कर पाएगी. सरकार बनाना तो बहुत दूर की कौड़ी है. जहां तक बिलावल की बात है, तो वही थे जिन्होंने नवाज को ‘मोदी का यार’ कहना शुरू किया था. हालांकि अपने मेनिफेस्टो में उन्होंने भी भारत से बातचीत करने की बात कही है.

पाकिस्तान के साथ जुड़ी भारत की सबसे बड़ी परेशानी है आतंकवाद. इस लिहाज से भी ये चुनाव बड़े परेशान करने वाले हैं. हाफिज सईद की 'अल्लाह-हू-अकबर तहरीक' केंद्र और प्रांत, दोनों जगहों पर चुनाव लड़ रही है. और भी कई आतंकवादी संगठन इलेक्शन लड़ रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
पाकिस्तान के साथ जुड़ी भारत की सबसे बड़ी परेशानी है आतंकवाद. इस लिहाज से भी ये चुनाव बड़े परेशान करने वाले हैं. हाफिज सईद की ‘अल्लाह-हू-अकबर तहरीक’ केंद्र और प्रांत, दोनों जगहों पर चुनाव लड़ रही है. और भी कई आतंकवादी संगठन इलेक्शन लड़ रहे हैं (फोटो: रॉयटर्स)

पत्रकार कह रहे हैं: हमें डराया जा रहा है
पाकिस्तान के अंदर से आवाजें आ रही हैं कि सेना PTI के अलावा किसी पार्टी को फुटेज नहीं लेने दे रही है. वो किसी भी हाल में इमरान को बहुमत दिलवाना चाहती है. पाकिस्तान के कई पत्रकारों ने भी कहा है कि मीडिया पर दबाव बनाया जा रहा है. उनसे कहा जा रहा है कि वो PML-N और PPP को जगह न दें. उनके चुनाव प्रचार को नजरंदाज करें. जैसे हालात हैं, उनसे तो यही लगता है कि चाहे कोई भी हारे-जीते, चलेगी तो सेना की ही.

कुछ अखबार और टीवी चैनल कह रहे हैं कि उनके लोगों को परेशान किया जा रहा है. उन्हें लोगों तक पहुंचने से रोका जा रहा है. अखबार हैं, तो बंट नहीं पा रहे. टीवी चैनल हैं, तो प्रसारण में दिक्कत आ रही है. ये सब उनके ही साथ हो रहा है, तो ISI के दबाव को मानने से इनकार कर रहे हैं. एक राना इकबाल सिराज नाम के शख्स हैं. दक्षिणी पंजाब इलाके के. वो PML-N के उम्मीदवार हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ISI उनके ऊपर अपनी उम्मीदवारी वापस लेने और निर्दलीय चुनाव लड़ने का दबाव बना रही है. सिराज के मुताबिक, जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो ISI ने उन्हें तबाह करने की धमकी दी. तब नवाज लंदन में थे. उन्होंने साफ-साफ कहा था. कि ISI के लोग सिराज को तंग कर रहे हैं. बाद में सिराज ने अपना आरोप वापस ले लिया. कहा-

मैं अपना बयान वापस लेता हूं. जिस आदमी ने मुझे थप्पड़ मारा और परेशान किया, वो सिंचाई विभाग का आदमी था.

साफ था कि सिराज डर के मारे बयान वापस ले रहे थे. पाकिस्तान में लोगों के बीच चुनाव को लेकर बहुत जोश है. रैलियों में, सभाओं में, लोगों की भीड़ पहुंच रही थी हर जगह. लोग चुनाव देने जाएंगे. वोट डालकर आएंगे. लेकिन अगर चुनाव ही फिक्स हों, तो कोई क्या कर सकता है. शायद ऐसे में पाकिस्तानी आवाम ये सोचकर तसल्ली करे. कि कम से कम फिक्सिंग हुई है, तख्तापलट तो नहीं हुआ. ये अलग बात है कि ये दोनों ही स्थितियां एक बराबर डरावनी हैं.

जहां तक लोगों की बात है, तो उनमें चुनाव की खुशी है. शहर-गांव, हर जगह से वोटिंग की तस्वीरें आ रही हैं. एक खबर धमाके की भी आई. क्वेटा में एक पुलिस टीम पर हमला हुआ. इस ब्लास्ट में करीब 31 लोग मारे गए. इस ट्वीट में विडियो देख सकते हैं आप. विडियो शुरुआती है, इसीलिए इसमें मरने वालों की गिनती कम है.


ये भी पढ़ें: 

अगर जिन्ना की ऐम्बुलेंस का पेट्रोल खत्म न हुआ होता, तो शायद पाकिस्तान इतना बर्बाद न होता
उस बाग का शाप, जहां पाकिस्तान के दो प्रधानमंत्री कत्ल कर दिए गए
जब पाकिस्तानी हुक्मरान स्तनों पर अफीम लगाकर बच्चे मारने वाली मां की तरह देश खत्म कर रहे थे
मीर जाफर ने हिंदुस्तान से गद्दारी की थी, उसके वंशज के साथ पाकिस्तान में गद्दारी हुई
पाकिस्तान के उस तानाशाह की कहानी, जो खुद को कुत्ता कहता था
पाकिस्तान की प्लानिंग: 28 जुलाई को भारत में घुसेंगे, 9 अगस्त को कश्मीर हमारा होगा
पाकिस्तान चीन से मदद मांगने गया, चीन ने कहा भारत के हाथों लाहौर हार जाओ
भारत के आर्मी चीफ ने गलत जानकारी न दी होती, तो उस साल भारत लाहौर जीत जाता!


ये पाकिस्तानी नेता जैसे प्रचार कर रहा है, वैसे भारत में कभी न हुआ होगा

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्या चल रहा है?

ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड से कहा- करारा जवाब मिलेगा और लंका लगा दी

एक ओर जोफ्रा आर्चर थे तो दूसरी ओर हेजलवुड.

BCCI की टाइटल राइट्स डील में क्या झोल है?

ई-ऑक्शन नहीं होने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

पतंजलि वाले बालकृष्ण को हार्ट अटैक आया, रेफर होने के बाद एम्स में भर्ती

पहले हरिद्वार के पतंजलि योगपीठ के पास भूमानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

पाकिस्तानी टेरर फंडिंग के आरोप में बलराम सिंह, सुनील सिंह और शुभम मिश्रा को ATS ने धरा

बलराम सिंह को 2017 में भी गिरफ्तार किया था. फिलहाल बेल पर था.

प्रियंका चोपड़ा को हटाने की रिक्वेस्ट पर यूनिसेफ ने पाक का मूड और खराब कर देने वाला जवाब दिया

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रियंका का 'जय हिन्द' लिखने वाला मुद्दा अब जोर क्यों पकड़ रहा है?

सरकार के थिंक टैंक ने माना, 'बीते 70 साल में ऐसी बुरी मंदी नहीं देखी'

इससे पहले सुब्रमण्यम ने प्राइवेट सेक्टर को दो टूक हिदायत दे डाली थी कि,'बालिग व्यक्ति लगातार अपने पापा से मदद नहीं मांग सकता.'

जोफ्रा आर्चर ने ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग का धागा खोलकर रख दिया

जितनी उम्मीद थी उससे ज़्यादा डिलीवर किया है.

वेल्लोर मामले में प्रशासन ने तो और भी बड़ी गड़बड़ी कर दी है

दलित की मौत के बाद उसे मजबूरी में पुल से लटकाकर उतारना पड़ा था

ICC में फर्स्ट रैंक वाली टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर ही फेल हो गया, लेकिन आगे अच्छी खबर आनी बाकी थी

अच्छी खबर का नाम रहाणे और राहुल था.

ये तस्वीरें बता रहीं कि टाइटैनिक के मलबे को समंदर खा गया है

एकदम ताज़ा तस्वीरें हैं.