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रघुराम राजन ने ऐसा क्या कह दिया, जिससे कांग्रेस और बीजेपी दोनों की छीछालेदर हो रही है?

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रघुराम राजन. बड़े अर्थशास्त्री हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर भी रहे हैं. उन्हें गवर्नर की कुर्सी पर कांग्रेस ने बिठाया था. सितंबर 2016 में उनका कार्यकाल पूरा हुआ, लेकिन तब केंद्र में बीजेपी की सरकार आ गई थी और उसने रघुराम राजन की जगह पर उर्जित पटेल को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का गवर्नर बना दिया.

रिजर्व बैंक से छूटने के साथ ही रघुराम राजन फिर अमेरिका चले गए. पढ़ाने-लिखाने. लेकिन देश में बीजेपी और कांग्रेस के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर आरोप-प्रत्यारोप चलते रहे. जब आंकड़ा सामने आया कि देश में बैंकों पर एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट) बढ़ता जा रहा है, तो बीजेपी ने इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताया, वहीं कांग्रेस इसके लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताने लगी. जिम्मेदार कौन है, इसके लिए संसद की एक समिति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पिछले गवर्नर रघुराम राजन का सहारा लिया. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली समिति ने रघुराम राजन से अपील की कि वो समिति के सामने पेश होकर अपनी बात रखें. कमिटी ने कहा था कि अगर वो पेश नहीं हो सकते, तो पत्र लिखकर ही एनपीए के बारे में समिति को बता दें. अब रघुराम राजन भले आदमी हैं. उन्होंने पत्र लिख दिया. और जब पत्र लिख दिया तो इससे कांग्रेस और बीजेपी दोनों की ही छीछालेदर हो गई है. जानते हैं, रघुराम राजन ने अपने पत्र में क्या लिखा है-

रघुराम राजन का कार्यकाल बढ़ाया नहीं गया.
रघुराम राजन को कांग्रेस ने गवर्नर बनाया था, लेकिन बीजेपी ने उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाया.

# बैंकों ने जो लोन दिया है, उनमें सबसे ज्यादा खराब लोन 2006-2008 के बीच बांटे गए हैं.

# बैंकों ने इस दौरान नया कर्ज बांटने में लापरवाही की और ऐसे लोगों को कर्ज दे दिया, जिनका इतिहास रहा है कि वो कर्ज नहीं लौटाते हैं.

# ऐसे लोगों को भी कर्ज दे दिया गया, जिन्हें कर्ज की ज़रूरत नहीं थी.

# सबसे ज्यादा लापरवाही सरकारी बैंकों ने की. कर्ज देने के बाद बैंकों ने कंपनियों से ये भी नहीं पूछा कि उन कंपनियों ने लिए गए कर्ज का कितना हिस्सा खर्च किया है.

रघुराम राजन के बयान के बाद पिछली मनमोहन सरकार पर बीजेपी ने हमलावर रुख अपना लिया है.

# यूपीए सरकार के दौरान घोटालों की जांच में लंबा वक्त लगा, जिससे एनपीए बढ़ गया.

# चाहे यूपीए हो या फिर एनडीए, दोनों ही सरकारों ने फैसले लेने में देर की. इसी दौरान कोयला खदानों के आवंटन में सवाल खड़े हुए, जिसके बाद इन्फ्रास्ट्रक्चर वाले कई प्रोजेक्ट्स रुक गए. नतीजा ये हुआ कि जिन कंपनियों ने प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज लिए थे, वो शुरू ही नहीं हो पाए.

# मैं चाहता था कि बैंक कर्ज को छिपाने का काम बंद करें और रुके हुए प्रोजेक्ट्स चालू किए जाएं. इससे जिन कंपनियों ने कर्ज लिया है, उनका पैसा खर्च हो सकेगा. लेकिन बैंकों ने ये काम नहीं किया.

मोदी सरकार ने भी नहीं लिया ऐक्शन!

रघुराम राजन ने डिफॉल्टर्स की लिस्ट पीएमओ को सौंप दी थी. उस वक्त पीएम कौन था, राजन ने ये नहीं बताया है.
रघुराम राजन ने डिफॉल्टर्स की लिस्ट पीएमओ को सौंप दी थी. उस वक्त पीएम कौन था, राजन ने ये नहीं बताया है.

रघुराम राजन ने कहा है कि जब बैंकों का एनपीए बढ़ने लगा, तो उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को कई हाई प्रोफाइल एनपीए डिफॉल्टर्स की लिस्ट सौंपी थी. लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसपर क्या ऐक्शन लिया, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. पत्र में रघुराम राजन ने ये नहीं लिखा है कि जब उन्होंने डिफाल्टर्स की लिस्ट पीएमओ को सौंपी थी, तो उस वक्त प्रधानमंत्री कौन था. लेकिन मीडिया में उस वक्त छपी खबरों के मुताबिक रघुराम राजन ने अप्रैल 2015 में डिफॉल्टर्स की लिस्ट सौंपी थी और उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे.

नीती आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रघुराम राजन पर आरोप लगाए थे, जिसका जवाब राजन ने अपने पत्र में लिखा है.
नीती आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रघुराम राजन पर आरोप लगाए थे, जिसका जवाब राजन ने अपने पत्र में लिखा है.

रघुराम राजन ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार को भी जवाब दिया है. राजीव कुमार ने खराब अर्थव्यवस्था के लिए रघुराम राजन को जिम्मेदार ठहराया था. उन्होंने कहा था कि तीन साल के दौरान विकास दर में गिरावट बैंक के एनपीए में हुई बढ़ोतरी के चलते है. मोदी सरकार जब सत्ता में आई, तो बैंकों का एनपीए 4 लाख करोड़ रुपये था. मार्च 2017 तक एनपीए बढ़कर 10.5 लाख करोड़ हो गया और इस बढ़ोतरी के लिए सिर्फ रघुराम राजन जिम्मेदार हैं. इन आरोपों का जवाब भी रघुराम राजन ने संसदीय समिति को दिया और कहा कि नीति आयोग की तरफ से यह बयान बिना होमवर्क के दिया गया है. राजन ने कहा कि जब उन्होंने बैंकों की बैलेंसशीट सुधारने की कवायद शुरू की, तो लोगों ने इसके लिए रिजर्व बैंक को जिम्मेदार ठहराया.


एनटीपीसी के प्लांट्स के पास कुछ ही दिन का कोयला बचा है

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NPA : Raghuram Rajan, ex RBI Governor has said that during 2006 to 2008 in UPA 2 loan were provided very badly to the companies by banks

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