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AN 32 क्रैश: 13 में से 1 के भाई ने कहा, 'हमसे कोई मिलने तक नहीं आया'

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37 साल के संतोष दिल्ली के होटल अशोक के पास चाय की दुकान चलाते हैं. उनकी रिहाइश प्रधानमंत्री के घर 7 रेस कोर्स रोड के आस-पास ही एक स्लम में है. वो भारतीय वायुसेना से ख़फा हैं. और खफ़ा होने का कारण है भारतीय वायुसेना की बेरुखी.  दरअसल, संतोष के भाई राजेश कुमार अरुणाचल प्रदेश में क्रैश हुए AN-32 विमान में सवार थे. वो भारतीय वायुसेना में बतौर नॉन कॉम्बेटेंट काम कर रहे थे. संतोष के परिवार का दावा है कि हादसे के बाद बीते 11 दिनों में वायुसेना की ओर से एक भी शख़्स उनसे मिलने नहीं आया. इंडियन एक्सप्रेस में साक्षी दयाल और सौम्या लखानी की रिपोर्ट छपी है. इसके मुताबिक संतोष ने कहा,

जब से प्लेन गुम हुआ है वायुसेना से कोई भी अधिकारी हमसे मिलने नहीं आया. किसी को हमारे माता-पिता की परवाह नहीं है. हमारे घर के आस-पास भारतीय वायुसेना की बिल्डिंग्स हैं. प्रधानमंत्री का घर भी यहीं पास में ही है. लेकिन कोई हमारे घर तक नहीं पहुंचा. मेरे पिता भी भारतीय वायुसेना में थे, क्या हमारे साथ ऐसा बर्ताव होना चाहिए?

संतोष नाराज़गी जाहिर करते हैं कि उन्हें वायुसेना की ओर से कोई अपडेट तक नहीं मिली. वह कहते हैं,

मैं अशोक होटल के पास चाय की दुकान चलाता हूं. प्लेन गुम होने के बाद मुझे किसी ने सोलंकी साहब का नंबर दिया था, (राज कुमार सोलंकी, AN 32 के पायलट के ससुर) वो नज़दीक ही काम करते हैं. तब से वही हमें ताजा जानकारियां मुहैया करवा रहे हैं.

13 जून को भारतीय वायुसेना ने AN-32 में सवार किसी भी वायुसैनिक के ज़िंदा न बचने की जानकारी दी थी. लेकिन संतोष और उनके परिवार को ऐलान के बाद भी तीन घंटे तक इसकी जानकारी तक नहीं थी. वो नहीं जानते थे कि उन तक शव कैसे पहुंचेगा, एयरपोर्ट पर उनकी ज़रूरत है या नहीं. संतोष बताते हैं कि मेरा भाई हमारे पिता के काम से प्रभावित था इसीलिए उसने भारतीय वायुसेना को चुना. राजेश की शादी बीते नवंबर में ही हुई थी. 3 जून को प्लेन पर सवार होने से पहले राजेश ने पिता से बात की थी.

संतोष को अपने भाई से की आखिरी मुलाकात भी याद है. संतोष कहते हैं,

वो (राजेश) छुट्टियों के दौरान दिल्ली आया था और वापसी के वक्त मैं खुद राजेश को रेलवे स्टेशन तक छोड़ने गया था. मुझे क्या पता था कि ये हमारी आखिरी मुलाकात होगी…


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