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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में असीमानंद को बरी करने वाले जज ने इस्तीफा दे दिया है

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हैदराबाद की मक्का मस्जिद बम ब्लास्ट मामले में एनआईए की विशेष अदालत का फैसला आ गया है. और फैसला देने वाले जज के रविंद्र रेड्डी ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया है. कोर्ट ने 5 आरोपियों को बरी कर दिया है. स्वामी असीमानंद समेत हिंदू दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत से जुड़े 7 लोग इस मामले में आरोपी थे. केस के दो आरोपी अब भी फरार हैं और एक आरोपी का सुनवाई के दौरान मर्डर हो गया था. कोर्ट ने कहा कि एनआईए इन आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश नहीं कर पाई. इस मामले में आरोपी बनाए गए कुछ मुस्लिम युवा पहले ही बाइज़्ज़त बरी हो चुके हैं.

तो फिलहाल के लिए इतना कहा जहा सकता है कि मक्का मस्जिद ब्लास्ट किसने किया, हम नहीं जानते.

हैदराबाद की मक्का मस्जिद.
हैदराबाद की मक्का मस्जिद.

क्या था मक्का मस्जिद ब्लास्ट?

18 मई, 2007 को हैदराबाद की ऐतिहासिक मस्जिद में 10 हज़ार से ज़्यादा लोग मौजूद थे. तभी घड़ी एक पल के लिए रुक गई. लोगों की आंखों के आगे दृश्य धुंधला हो गया और कान सुन्न. मस्जिद के वुज़ूखाने में एक ज़ोरदार धमाका हुआ था. कुछ समझ आता, उसके पहले 8 लोगों की मौत हो गई और 58 लोग ज़ख्मी हो गए. मस्जिद के अंदर मौजूद लोग एक भीड़ की शक्ल में जान बचाने भागे. इन्हें काबू करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी. इसमें पांच और लोगों की जान गई थी.

बाद में जांच हुई तो मालूम चला कि धमाके में पाइप बम का इस्तेमाल किया गया था. इसे एक मोबाइल फोन की मदद से दागा गया था. किस्मत थी कि धमाका संगमर्मर के एक मज़बूत चबूतरे के नीचे हुआ. इसलिए वो धमाके का ज़्यातादर असर सह गया. वर्ना धमाके का असर और बड़ा होता. मस्जिद से दो ज़िंदा पाइप बम भी मिले, जो किसी वजह से फटे नहीं थे. इन्हीं बमों के आधार पर जांच एजेंसियां मक्का मस्जिद और अजमेर दरगाह ब्लास्ट में एक पैटर्न ढूंढ पाईं और फिर आरोपियों तक पहुंची.

असीमानंद. अजमेर दरगाव ब्लास्ट और मक्का मस्जिद ब्लास्ट दोनों मामलों में बरी हो चुके हैं.
असीमानंद. अजमेर दरगाव ब्लास्ट और मक्का मस्जिद ब्लास्ट दोनों मामलों में बरी हो चुके हैं.

पहला बड़ा मामला जिसमें हिंदू दक्षिणपंथियों पर इल्ज़ाम लगा

देश के और मामलों की तरह इस मामले में भी पहले शक मुस्लिम कट्टरपंथी आतंकवादियों पर किया गया था. 38 युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था. लेकिन सबूतों के अभाव में उन्हें जल्द छोड़ दिया गया. जून में केस सीबीआई को सौंप दिया गया. इसी साल दिसंबर में संघ से जुड़े कार्यकर्ता सुनील जोशी की देवास में गोली मारकर हत्या हो गई. सुनील अजमेर दरगाह ब्लास्ट के अलावा इस मामले में भी आरोपी थे. कहा गया कि सुनील अगर गिरफ्तार होते तो इस मामले में बड़े खुलासे कर सकते थे इसलिए उन्हें रास्ते से हटाया गया है. इस मामले में संघ के नेता इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ हुई थी.

कर्नल पुरोहित. भारत के पहले सैन्य अफसर जिनपर भारत में आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप लगा.
कर्नल पुरोहित. भारत के पहले सैन्य अफसर जिनपर भारत में आतंकी हमले में शामिल होने का आरोप लगा.

2011 में केस सीबीआई से एनआईए को दे दिया गया. केस की सुनवाई भी एनआईए की विशेष अदालत में ही हुई. एनआईए ने अपनी चार्जशीट में हिंदू दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत के 7 लोगों को आरोपी बनाया. ये थे – स्वामी असीमानंद, देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा उर्फ अजय तिवारी, लक्ष्मण दास महाराज, मोहनलाल रतेश्वर और राजेंद्र चौधरी. दो आरोपी – रामचंद्र कालसंग्रा और संदीप डांगे आजतक फरार हैं. 2017 में असीमानंद ने एक एफिडेविट में लिखकर ये बात कही कि उन्होंने और अभिनव भारत के लोगों ने मिलकर मक्का मस्जिद धमाके को अंजाम दिया था.

इस केस में कई गवाह अपनी बात से पलटे. उनमें से एक नाम कर्नल श्रीकांत पुराहित का भी है. कर्नल पर अभिनव भारत से जुड़े होने और मालेगांव ब्लास्ट की साजिश रचने का आरोप था. कर्नल मक्का मस्जिद केस में स्वामी असीमानंद और देवेंद्र गुप्ता की पहचान करने वाले थे. वो इस बात की गवाही भी देने वाले थे कि असीमानंद ने उन्हें सुनील जोशी का मर्डर करने के बाद फोन किया था. लेकिन कर्नल पुरोहित बयान से पलट गए. कर्नल पुरोहित मालेगांव ब्लास्ट केस में बरी हो गए हैं.

गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि इस फैसले से बिलकुल हैरान नहीं हैं.
गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि इस फैसले से बिलकुल हैरान नहीं हैं.

बयान बयान बयान

फैसला आने के बाद से ही भाजपा और दूसरे हिंदुत्ववादी दल मुखर हैं. भाजपा के प्रवक्त संबित पात्रा राहुल गांधी और कांग्रेस से पूछ रहे हैं कि क्या वो 2 G स्कैम मामले की ही तरह इस मामले में भी अदालत के फैसले का स्वागत करेंगे? या वो भगवा आतंक जैसे शब्द इस्तेमाल करने के लिए आधी रात में मोमबत्ती लेकर निकलेंगे और माफी मांगेगे. विश्व हिंदू परिषद भी कह रही है कि ये फैसला कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है. कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत ने इतना कहा कि अब ये एनआईए को सोचना चाहिए कि मामले में आगे अपील करनी है या नहीं. एक बयान गृह मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी रहे आरवीएस मणि का भी आया, जिसमें उन्होंने कहा कि हिंदू आतंक वाला एंगल आधारहीन था. फर्ज़ी सबूतों के आधार पर मामला चलाया गया और इसीलिए कोई हैरानी नहीं कि सारे आरोपी बरी हो गए.


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NIA special judge K Ravindra Reddy quits citing personal reasons after acquitting Abhinav Bharat’s Swami Aseemanand and others accused in Hyderabad’s Mecca Masjid blast case

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