Submit your post

रोजाना लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

Follow Us

कहानी उस दर्जी की, जो दिन में कपड़े सिलता था और रात को बन जाता था सीरियल किलर

948
शेयर्स

15 अगस्त 2018. देश स्वतंत्रता की 72वीं वर्षगांठ मना रहा था. लेकिन मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की पुलिस एक लाश को लेकर उलझी हुई थी. ये लाश थी औबेदुल्लागंज के रहने वाले 25 साल के माखन सिंह की. लाश झागरिया पठार में पुलिया के नीचे मिली थी. पुलिस इस बात को लेकर उलझी थी कि इसकी हत्या किसने की है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस को पता चला कि माखन सिंह एक ट्रक ड्राइवर है, जो हत्या वाले दिन यानी कि 15 अगस्त को मंडीदीप इलाके से लोहे की सरिया से भरा हुआ ट्रक लेकर निकला था. पुलिस ने खोजबीन की, तो ट्रक अयोध्या नगर में लावारिस हालत में बरामद हो गया. लेकिन अपराधी नहीं मिला. पुलिस भी जांच करती रही, लेकिन खाली हाथ रही.

लेकिन कुछ ही दिन के बाद भोपाल में एक और ट्रक गायब हो गया. ये ट्रक पुणे से भोपाल आया था और उसपर 25 टन चीनी लदी हुई थी. इस ट्रक के ड्राइवर की भी हत्या होनी थी. इसके लिए हत्यारों ने ट्रक ड्राइवर को अगवा कर लिया था. लेकिन इस ट्रक की एक खासियत थी. ये ट्रक मिसरोद के रहने वाले मनोज शर्मा का था, जिन्होंने अपने ट्रक का नंबर सारे टोल नाकों पर रजिस्टर्ड करवा रखा था. इसका फायदा ये था कि जब भी मनोज का ट्रक किसी टोल नाके को पार करता, उनके मोबाइल पर मैसेज आता कि उनका ट्रक किस टोल नाके को पार कर रहा है. ट्रक पुणे से भोपाल के लिए आया था. इसके बाद अपराधी उसे गुना, अशोकनगर, भितरवार होकर उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हुए, जिसमें कोई टोल नहीं है. लेकिन जब मनोज के फोन पर कानपुर के पास टोल नाके को पार करने का मैसेज मिला, तो वो चौकन्ने हो गए. उन्होंने पुलिस को खबर की, जिसके बाद पुलिस ने जयकरण और उसके साथ और साथियों को पकड़ लिया.

आदेश का साथी जयकरण जब पुलिस की गिरफ्त में आया, तो पुलिस के सामने हत्याओं के खुलासों की बाढ़ सी आ गई.

जब पुलिस ने जयकरण को पकड़ा तो उसने अपना गुनाह कबूल लिया. उसने वारदात में शामिल दो और लोगों के नाम बताए. एक है महाराष्ट्र का रहने वाला तुकाराम बंजारा और दूसरा है भोपाल के मंडीदीप का रहने वाला आदेश खमारा. 7 सितंबर को भोपाल पुलिस ने आदेश खामरा को भी गिरफ्तार कर लिया. और जब आदेश खामरा की कहानी की परतें एक-एक कर खुलने लगीं तो पता चला कि आदेश कोई सामान्य अपराधी नहीं, बल्कि एक सीरियल किलर है. उसने अब तक कम से कम 33 हत्याएं की हैं और ये सारी हत्याएं या तो ट्रक ड्राइवर की हैं या फिर ट्रक के खलासी और हेल्पर की. वजह. वजह एक ही ट्रक को लूटना और फिर उसे चोर बाजार में बेच देना. आदेश खामरा और उसका गैंग यही करता रहा है.

खैनी खाई, फ्रेश हुआ और फिर बताई अपनी हकीकत

आदेश खामरा को भोपाल की बिलखिरिया पुलिस ने 7 सितंबर को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर के जंगलों से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के लिए उसे भोपाल के बिलखिरिया थाने में लाया गया. यहां जब उससे पूछताछ होनी थी, तो उसने पुलिस से खैनी की मांग की. पुलिसवालों ने उसे खैनी दी, उसे खाकर वो फ्रेश हुआ और कहा कि अब पूछताछ करो. इस दौरान एक सिपाही उसे घूर रहा था तो आदेश ने कहा-

‘घूर मत मुझको, मैं कोई जेबकतरा नहीं हूं. तुम लोग मुझे को-ऑपरेट करोगे, तो ही मैं बोलूंगा.’

पुलिस के सामने भी आदेश खमारा का रौब कम नहीं हुआ. उसने पुलिसवालों से खैनी मांगकर खाई और फिर पूरी कहानी सुनाई.

पुलिस ने आदेश खामरा को को-ऑपरेट किया. और आदेश ने भी पुलिस को को-ऑपरेट किया. इस को-ऑपरेशन का नतीजा निकला कि भोपाल पुलिस ने अब तक एक ही झटके में 33 हत्याओं की गुत्थी सुलझा ली. ये सारी हत्याएं उन ट्रक ड्राइवरों, हेल्परों और खलासियों की थी, जिनके पास 12 चक्का या 14 चक्का ट्रक थे और ये सारे ट्रक टाटा कंपनी के बनाए होते थे. लेकिन कौन है ये आदेश खामरा, जिसे अब अपराध की दुनिया में 42 लोगों का गला रेतने वाले रमन राघव, निठारी कांड में दोषी सुरेंद्र कोली और कोलकाता का स्टोनमैन की लिस्ट में शामिल कर लिया गया है.

आदेश, एक ऐसा दर्जी जिससे कपड़े सिलवाने के लिए लाइन लगाते थे लोग

अपराधी से पहले आदेश खामरा एक ऐसे आदमी का नाम है, जो पेशे से दर्जी है. भोपाल के बाहरी इलाके मंडीदीप के मुख्य बाजार राधा कृष्ण चौक में आदेश खामरा की एक छोटी सी दुकान है. मंडीदीप में वो अपने बेटे और तीन बेटियों के साथ रहता था. घर पर बड़ा सा कुत्ता पाल रखा था, इसलिए लोग उसके घर नहीं जाते थे. वो दिन में लोगों के कपड़े सिलता था. टेलर इतना अच्छा था कि नए ट्रेंड के कपड़े सिलवाने के लिए लोग उसके पास लाइन लगाते थे. दो-तीन दिन इंतजार भी करते थे और कपड़े उसी से सिलवाते थे.

आदेश ने जितनी भी हत्याएं की हैं, वो सब या तो ट्रक ड्राइवरों की हैं या फिर ट्रक के खलासी औरहेल्पर की.

लेकिन रात होते ही आदेश पर खून सवार हो जाता था. इसकी शुरुआत हुई थी 2010 में. पहले महाराष्ट्र के अमरावती में और फिर नासिक में दो अलग-अलग ट्रक ड्राइवरों की लाश मिली थी. ट्रक लूटने के बाद दोनों की हत्या की गई थी. पुलिस ने लूट और हत्या का मामला दर्ज कर जांच कर रही थी. लेकिन अचानक से मध्यप्रदेश में ऐसी हत्याओं की बाढ़ सी आ गई. फिर उत्तर प्रदेश और बिहार में भी ऐसे ही शव मिलने लगे. कॉमन एक चीज थी और वो था ट्रक. ट्रक सिर्फ टाटा कंपनी का होता था. ये काम आदेश खामरा का था, जो एक गैंग के लिए काम करता था. लेकिन जनवरी 2018 में उसने गैंग के लिए काम करना छोड़ दिया.

शराब की दुकान पर मिला जयकरण और बॉस बन गया आदेश खामरा

जनवरी में मंडीदीप में एक शराब की दुकान पर आदेश की मुलाकात जयकरण से हुई. इसके बाद आदेश गैंग का लीडर बन गया और जयकरण वो करने लगा, जो आदेश पहले किसी दूसरी गैंग के लिए करता था. दोनों ने मिलकर कई हत्याओं को अंजाम दिया, जो सिर्फ ट्रक से जुड़ी हुई थी. हर हत्या पर उसके हिस्से 25 से 30 हजार रुपये आते थे. आदेश पुलिसिया तहकीकात का भी अच्छा जानकार था. पुलिस के मुताबिक हर हत्या के बाद वो फोन और सिम बदल देता था. अब तक की जांच में पुलिस को उसके अलग-अलग मोबाइल फोन के 43 आएमईआई नंबर मिले हैं, जिसमें उसने 50 से ज्यादा सिमकार्ड का इस्तेमाल किया है. इसिलिए जब पुलिस उससे सबूत जुटाने के लिए मोबाइल की तफ्तीश कर रही थी, तो उसने साफ-साफ कह दिया कि कितनी भी जांच करवा लो, वारदात वाली जगह पर उसकी लोकेशन तक नहीं मिलेगी.

आदेश गैंग के निशाने पर सिर्फ टाटा कंपनी के ट्रक होते थे. और ये ट्रक भी 12-14 चक्का वाले बड़े ट्रक ही होते थे. (सांकेतिक तस्वीर)

ग्वालियर में सामान और यूपी-बिहार में बेच देता था ट्रक

आदेश खामरा और उसका गैंग पूरे दिन रात के 11 बजने का इंतजार करता था. 11 बजते ही शहर में बड़े ट्रकों की एंट्री होने लगती थी. इसके बाद जयकरण शिकार तलाशता था, आदेश उसे नशीली शराब पिलाता था और दोनों मिलकर ट्रक को लूट लेते थे. ट्रक लूटने के बाद भी वो ड्राइवर-क्लीनर को गाड़ी में ही रखते थे. लंबे सफर में मौका मिलने पर हत्या कर बॉडी फेंक देते थे. ट्रक में भरा सामान ग्वालियर में बेचा जाता था, जबकि ट्रक को वो यूपी-बिहार और नार्थ ईस्ट में ले जाकर बेचते थे. टाटा के ट्रकों की रिसेल वैल्यू ज्यादा होती है, इसलिए वो सिर्फ टाटा के ही ट्रक को लूटते थे.

पुलिस को बताई उसकी गलतियां

आदेश खामरा ने जांच के दौरान पुलिस को भी उसकी गलती बताई है. ये मामला 2010 के होशंगाबाद ट्रक लूट से जुड़ा है. आदेश ने होशंगाबाद के सुखतवा से एक ट्रक लूटा था. ड्राइवर और क्लीनर की हत्या के बाद वो ट्रक लेकर अमरावती गया था. वहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था. बाद में वो जमानत पर रिहा हो गया. उस केस में होशंगाबाद पुलिस ने जिस ट्रक लूट के बारे में केस दर्ज किया था, उसमें टाटा की जगह पर अशोक लेलैंड ट्रक का जिक्र कर दिया. आदेश खामरा ने पुलिस को बताया कि इस गलती की वजह से उसे होशंगाबाद वाले मामले में सजा नहीं मिलेगी. हालांकि उसने 2014 में नागपुर में हुई ट्रक लूट और हत्या के बारे में कहा कि उसे इस केस में सजा हो जाएगी. ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सीसीटीवी में उसकी फुटेज मौजूद है साथ ही माल की भी रिकवरी हो गई है.


बिहार की उस महिला IPS की कहानी, जिसने बाहुबली सांसद पप्पू यादव को रुला दिया

लल्लनटॉप न्यूज चिट्ठी पाने के लिए अपना ईमेल आईडी बताएं !

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें
MP : Story of serial killer Adesh Khamara who was a tailor and has accepted 33 killings of truck drivers for robbery

क्या चल रहा है?

पाकिस्तान विरोध अब टी सीरीज तक पहुंचा, आतिफ और राहत के गाने गायब

सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी गायकों का विरोध शुरु हो गया है.

आतंकी के पिता ने कहा- हम CRPF जवानों की मौत का जश्न नहीं मना रहे हैं

कहा- नौजवानों को आतंकी बनने से रोको.

लोगों के गुस्से के शिकार कश्मीरी स्टूडेंट्स की मदद के लिए CRPF आगे आई है

लोग भी मदद के लिए सामने आ रहे हैं.

इस क्रिकेट क्लब ने इमरान खान के विरोध का अनोखा तरीका निकाला है

कहा- अब इमरान खान सिर्फ पूर्व क्रिकेटर नहीं, प्रधानमंत्री भी हैं.

क्या आप वर्ल्ड कप टीम में ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक को साथ नहीं देखना चाहेंगे?

ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज में जगह नहीं मिलना भी कार्तिक के लिए अच्छी बात है.

पुलवामा अटैक के बाद सोशल मीडिया पर नासमझी इन लोगों पर बहुत भारी पड़ी

आतंकियों का समर्थन कर, कईयों की नौकरी गई, कई गिरफ्तार किए गए..

देश में कुछ लोगों की इन हरकतों से पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड बहुत खुश होंगे

हर बार आतंकी हमलों के बाद हम एक ही गलती क्यों करते हैं?