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जानिए कौन हैं 4 नए राज्यपाल जिन्हें बिहार, बंगाल, त्रिपुरा और नागालैंड का गवर्नर बनाया गया है

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मोदी सरकार ने 20 जुलाई को दो राज्यपालों का ट्रांसफर कर दिया. वहीं कुछ राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की गई है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ओर से दो राज्यपालों के ट्रांसफर और चार नए राज्यपालों की नियुक्ति की सूचना जारी की गई है. मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को यूपी का नया राज्यपाल बनाया गया है. लालजी टंडन को मध्य प्रदेश भेजा गया है. वह बिहार के राज्यपाल थे.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी जगह जगदीप धनखड़ को राज्यपाल बनाया गया है. त्रिपुरा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी का भी कार्यकाल खत्म हो रहा है. उनकी जगह रमेश बैंस को राज्यपाल बनाया गया है. नागालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य का कार्यकाल खत्म होने के बाद आरएन रवि उनकी जगह लेंगे. फगु चौहान को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया है.

इन राज्यपालों का कार्यकाल खत्म

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी और नगालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ आचार्य का कार्यकाल खत्म हो रहा है.

दो महीने में इनका भी कार्यकाल खत्म हो रहा है

पांच और राज्य हैं जहां आने वाले समय में राज्यपालों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. महाराष्ट्र के राज्यपाल विद्यासागर राव का कार्यकाल 29 अगस्त को खत्म हो रहा है. यहां सितंबर या अक्टूबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं. गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा का कार्यकाल 30 अगस्त को खत्म हो रहा है. यहां कांग्रेस के 15 में से 10 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे. इनमें से कुछ को राज्यपाल ने मंत्री पद की शपथ दिलाई थी. कर्नाटक में जहां इस समय सियासी घमासान मचा हुआ है, यहां के राज्यपाल वजुभाई वाला का 31 अगस्त को कार्यकाल खत्म हो रहा है. राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह का कार्यकाल 3 सितंबर को और केरल के राज्यपाल पी. सदाशिवम का कार्यकाल 4 सितंबर को खत्म हो रहा है.

आनंदीबेन पटेल

आनंदीबेन पटेल और नरेंद्र मोदी क्लासमेट रहे हैं
आनंदीबेन पटेल और नरेंद्र मोदी क्लासमेट रहे हैं.

2014 में पहली बार मोदी के पीएम बनने के बाद आनंदीबेन पटेल गुजरात की सीएम बनीं. मोदी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी चुना था. मुख्यमंत्री बनने से पहले वह राज्य में मंत्री के तौर पर काम कर चुकी थीं. आनंदीबेन स्कूल टीचर से पॉलिटिक्स में आईं. आनंदी बेन पटेल की शादी मफत भाई पटेल से हुई थी, जो गुजरात के कद्दावर बीजेपी नेताओं में गिने जाते थे. मेहसाणा जिले के विजापुर तालुका के खरोद गांव में 21 नवम्बर 1941 को जन्मी आनंदीबेन मई 2014 में गुजरात की मुख्यमंत्री बनीं. अगस्त 2016 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया. 19 जनवरी 2018. बीजेपी के आलाकमान ने एक बार फिर आनंदीबेन पटेल से बात की. उन्हें मध्यप्रदेश का राज्यपाल बनने का ऑफर दिया गया. आनंदीबेन पटेल ने राज्यपाल बनने की हामी भर दी, इसके बाद मध्यप्रदेश के राज्यपाल के तौर पर उनका नाम अनाउंस कर दिया गया. अब लगभग डेढ़ साल बाद उन्हें यूपी का राज्यपाल बनाया गया है.

लालजी टंडन

लालजी टंडन
लालजी टंडन

बीजेपी के सीनियर नेताओं में शुमार रहे हैं. राजनीतिक सफर साल 1960 में शुरू हुआ. मायावती और कल्याण सिंह की कैबिनेट में नगर विकास मंत्री रहे. कुछ वर्षों तक वह नेता प्रतिपक्ष भी रहे. टंडन ने जेपी आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. कभी मायावती ने भाई माना था. 22 अगस्त, 2002 को मुख्यमंत्री मायावती थाली में चांदी की राखी सजाकर टंडन को राखी बांधने पहुंचीं थीं. सियासी राखी को निजी रिश्तों का नाम दिया था. टंडन ने मायावती की खूब आवभगत की. मायावती ने लालजी टंडन को भाई बताया और उनकी पत्नी कृष्णा टंडन को भाभी.

लालजी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बेहद करीबी रहे हैं. लखनऊ से जब वाजपेयी सांसद थे तो लालजी टंडन ही उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करते थे. बाद में वाजपेयी के राजनीति से संन्यास लेने के बाद लालजी टंडन लखनऊ से 2009 में लोकसभा सांसद चुने गए. लेकिन 2014 के चुनाव में राजनाथ सिंह के लिए लखनऊ की सीट खाली कर दी.

फागू चौहान

Phagu Chauhan

फागू चौहान, बिहार के गवर्नर बनाए गए हैं. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से आते हैं. आजमगढ़ जिले में जन्म हुआ. मऊ जिले में एक विधानसभा क्षेत्र पड़ता है घोसी, फागू चौहान यहां से 6 बार विधायकी का चुनाव जीत चुके हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से जीत हासिल की थी. वह राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन और दर्जा प्राप्त कैबिनेट मंत्री हैं. उन्होंने 1985 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. दलित मजदूर किसान पार्टी से सफर शुरू किया. दो बार बसपा से विधायक रहे. एक बार मायावती के मंत्रिमंडल और एक बार बीजेपी की सरकार में भी मंत्री रहे.

जगदीप धनखड़

Jagdeep Dhankhar

जानेमाने वकील और जनता दल के पूर्व सांसद रहे हैं. पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनाए गए हैं. धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 में किठाना गांव में किसान परिवार में हुआ. धनखड़ की पढ़ाई-लिखाई चित्तौडगढ़ के सैनिक स्कूल से हुई. राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर से उच्च शिक्षा पूरी की. 1977 से राजस्थान हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी. इस समय सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील थे. जगदीप धनखड़ 9वीं लोकसभा में झुंझुनूं संसदीय सीट से जीते. जनता दल उम्मीदवार के रूप में. लेकिन 1991 में जनता दल छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ले ली. 1991 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर अजमेर से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी के रासासिंह रावत से हार गए. 1993 में वे अजमेर के किशनगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट विधायक बने. 2003 में वसुंधरा राजे के प्रदेश अध्यक्ष बनने पर बीजेपी में शामिल हो गए.

आर.एन रवि 

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आर.एन रवि को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. 2015 की बात है रवि ने नागालैंड में नागा विद्रोही समूह नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड और केंद्र व चरमपंथियों के बीच शांति समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. एनएससीएन-आईएम के साथ केंद्र सरकार की जो वार्ता चल रही है उसमें आर.एन. रवि सरकार की ओर से वार्ताकार हैं. संयुक्त खुफिया समिति के अध्यक्ष रहे आरएन रवि को अक्टूबर 2018 में उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) बनाया गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की टीम में तीन डिप्टी एनएसए में से एक थे. वह केरल कैडर के 1976 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी हैं. नागालैंड को आर.एन रवि के अनुभव का फायदा मिलेगा.

रमेश बैस

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त्रिपुरा के राज्यपाल बनाए गए हैं. छत्तीसगढ़ से ताल्लुक़ रखते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों के टिकट काट दिए थे. रायपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश बैस का भी नाम था. रायपुर लोकसभा सीट से बैस ने सात बार जीत हासिल की. उन्हें सिर्फ साल 1991 के लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था. 1996 से 2014 तक लगातार छह बार उन्होंने जीत हासिल की. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं.


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