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राहुल गांधी को कश्मीर का न्योता देकर फंस गए राज्यपाल सत्यपाल मलिक

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11 अगस्त, 2019. दिन, रविवार.

कश्मीर पर राहुल गांधी का बयान आया. उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर में हिंसा से जुड़ी कुछ खबरें आई हैं. ऐसी बातों पर प्रधानमंत्री मोदी को बिल्कुल पारदर्शिता के साथ लोगों की चिंताओं से जुड़े जवाब देने चाहिए. राहुल ने कहा था-

सरकार जैसा दावा कर रही है, वैसी नॉर्मल स्थिति नहीं है जम्मू-कश्मीर में.

12 अगस्त, 2019. दिन, सोमवार.

राहुल के कहे पर जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का बयान आया. वो राहुल गांधी से नाराज़ थे. गवर्नर ने कहा-

मैंने राहुल गांधी को यहां आने का न्योता दिया है. मैं उनके लिए एक प्लेन भेज दूंगा, ताकि वो उसमें बैठकर यहां आएं और खुद ज़मीनी हकीकत देख लें और फिर बोलें. राहुल, आप जिम्मेदार इंसान हैं और आपको इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए.

ये इंडियन एक्सप्रेस की उस खबर का स्क्रीनशॉट है, जिसमें गर्वनर मलिक द्वारा राहुल को घाटी में आने का आमंत्रण दिए जाने की बात थी. और भी जगहों पर रिपोर्ट हुई थी ये खबर. सोर्स इसका PTI है.
ये न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से लिखी गई इंडियन एक्सप्रेस की उस खबर का स्क्रीनशॉट है, जिसमें गर्वनर मलिक द्वारा राहुल को घाटी में आने का आमंत्रण दिए जाने की बात थी. और भी जगहों पर रिपोर्ट हुई थी ये खबर. 

13 अगस्त, 2019. दिन, मंगलवार.
सत्यपाल मलिक के न्योते पर राहुल का जवाब आया. उन्होंने ट्वीट करके लिखा-

प्रिय सत्यपाल मलिक,
मैं और विपक्ष के कुछ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आने के आपके न्योते को स्वीकार करते हैं. हमें किसी एयरक्राफ्ट की ज़रूरत नहीं, लेकिन इतना सुनिश्चित करें कि हम कहीं आने-जाने की आज़ादी हो. हम लोगों से मिल सकें. मुख्यधारा के नेताओं और वहां ड्यूटी पर तैनात अपने जवानों के साथ मुलाकात कर सकें.

13 अगस्त, 2019. इसी मंगल की बात. 

राहुल ने न्योता मान लिया. मगर फिर एक नई बात हुई. सत्यपाल मलिक ने राहुल पर इस पूरे मामले का राजनीतिकरण करने का इल्ज़ाम लगा दिया. कहा, राहुल ने घाटी आने से पहले ही कई सारी शर्तें रख दी हैं. इन शर्तों में हिरासत में रखे गए मुख्यधारा के कश्मीरी नेताओं से मिलने की कंडीशन भी शामिल है. गर्वनर ऑफिस से जारी हुए बयान के मुताबिक-

विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को लाने की बात करके राहुल गांधी इस मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं. इससे अव्यवस्था बढ़ेगी और आम लोगों को परेशानी होगी. जम्मू-कश्मीर आने के लिए उन्होंने कई सारी शर्तें रख दी हैं. इनमें हिरासत के अंदर रखे गए यहां के मुख्यधारा से जुड़े लीडर्स से मुलाकात भी शामिल है. चूंकि उन्होंने जम्मू-कश्मीर आने के लिए इतनी सारी शर्तें रख दी हैं, तो अब गवर्नर ने ये मामला स्थानीय पुलिस और प्रशासन के पास भेद दिया है. वो राहुल द्वारा रखी गई शर्तों पर विचार करेंगे. 

राज्यपाल द्वारा जारी बयान के मुताबिक-

राहुल गांधी शायद कश्मीर की स्थितियों को लेकर सरहद पार (पाकिस्तान) से फैलाई जा रही फर्जी खबरों पर प्रतिक्रिया कर रहे थे. कुछ छोटी-मोटी नगण्य सी घटनाओं को छोड़कर यहां स्थितियां शांतिपूर्ण हैं. राहुल इस मामले में कई सारे भारतीय चैनलों द्वारा की गई रिपोर्ट्स देख सकते हैं. वो घाटी में सही स्थिति से जुड़ी रिपोर्टिंग कर रहे हैं.

राज्यपाल के कहे पर अब कांग्रेस क्या कह रही है?
इससे पहले भी कुछ विपक्षी नेताओं ने घाटी जाने की कोशिश की थी. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद. लेफ्ट नेता सीताराम येचूरी और डी राजा. मगर उन्हें श्रीनगर एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया. राहुल गांधी और उन्हें दिए गए निमंत्रण पर गवर्नर की तरफ से जो प्रतिक्रिया आई है, उसके बाद कांग्रेस फाउल-फाउल कह रही है. पी चिदंबरम ने ट्विटर पर लिखा-

जम्मू-कश्मीर के गवर्नर द्वारा राहुल गांधी को दिया गया आमंत्रण गंभीर था ही नहीं. ये बस दुष्प्रचार का एक ज़रिया था. ये कहना कि राहुल ने शर्तें रखी हैं, बेकार बात है. राहुल गांधी ने जवानों समेत बाकी लोगों से मिलने की आज़ादी मांगी थी. ये शर्त रखना कैसे हुआ? 

वैसे इससे पहले भी शशि थरूर का ट्वीट आया था. उन्होंने लिखा था कि बस राहुल को ही क्यों बुला रहे हैं. शशि ने लिखा था कि एक ऑल-पार्टी डेलिगेशन को जम्मू-कश्मीर जाकर हालात का मुआयना करने दिया जाए.

इस बात से एक बात याद आई
हमारे यहां मिथिला में न्योते के कई ‘प्रकार’ होते हैं. एक होता है- नौत. कोई कहे कि आपको ‘नौत रहे हैं’ मतलब खाने का भोज है. यानी आपका इस टाइम का खाना हमारे यहां होगा. इसमें भी वैरायटी होती है. जैसे, कोई कहे कि ‘स्त्रगणे पुरखे नौत है’. तो इसका मतलब घर के सारे सदस्यों को खाना खाने आना है. वरना सिलेक्टेड लोगों को. बस महिलाओं को या बस पुरुषों को. फिर ‘नौत’ देने वाला भोज से ठीक पहले भी एक बार फिर से बुलाने आता है. इसको कहते हैं- बीझो. मतलब अब टाइम हो गया है खाने का, चलिए.

न्योते की एक दूसरी प्रजाति भी होती है- हकार. कोई कहे ‘हकार है’ तो इसका मतलब है कि हमारे यहां प्रोग्राम है (पूजा टाइप). आपको आना है, शरीक होना है, मगर भोज नहीं मिलेगा. कई बार लोग ‘हकार’ को ‘नौत’ समझकर मायूस होकर लौटते हैं. खाने का सोचकर जाते हैं और चाय-पानी पिलाकर भेज दिया जाता है. बड़ी कहानियां हैं इसपर. ये सब यूं ध्यान आया कि सत्यपाल मलिक के इनविटेशन से शायद राहुल गांधी को क्लियर नहीं हुआ होगा. कि वो किस तरह का निमंत्रण पा रहे हैं. निमंत्रण में क्लैरिटी होनी चाहिए थी. कम-से-कम उतना क्लियरेंस तो होना ही चाहिए, जितना इंश्योरेंस के विज्ञापनों में पर अति-सूक्ष्म अक्षरों में लिखा होता है- टर्म्स ऐंड कंडीशंस अप्लाइड.


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