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रातभर में क्या बड़ा हुआ जम्मू-कश्मीर में?

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कश्मीर में क्या हो रहा है और कश्मीर में क्या होगा? पिछले कुछ दिनों से पूछे जा रहे इन सवालों के बीच घाटी से बड़ा अपडेट आया है. कश्मीर के दोनों पूर्व मुख्यमंत्री नज़रबंद कर दिए गए हैं. उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती. रविवार देर रात से राजधानी श्रीनगर और आसपास के इलाकों में सेक्शन 144 लगा दिया गया. सेक्शन 144 जहां लगता है, वहां किसी इलाके में चार से ज्यादा लोग एक जगह जमा नहीं हो सकते हैं. धारा 144 का मतलब कर्फ्यू नहीं होता. मोबाइल और ब्रॉडबैंड इंटरनेट, केबल टीवी सब बंद कर दिया गया है. स्कूल-कॉलेज समेत सारे शैक्षणिक संस्थान भी फिलहाल बंद रहेंगे. अगले आदेश तक कोई भी जनसभा या रैली नहीं की जा सकेगी.

ख़बरों के मुताबिक, किश्तवार, डोडा, रामबन और राजौरी-पुंछ में कर्फ्यू लगाया गया है. पुलिस लोगों को घर के अंदर रहने को कह रही है. कश्मीर को लेकर दिल्ली में एक कैबिनेट मीटिंग होनी है. इससे किसी बड़े फैसले के बाहर आने की बातें हो रही हैं. चूंकि संसद सत्र भी चल रहा है, ऐसे में संभावना है कि ये मसला वहां भी उठेगा.

सरकार की तरफ से कुछ साफ नहीं किया गया है
मोदी सरकार कई बार कह चुकी है. कि कश्मीर मसले को मुहब्बत, बातचीत और गर्वनमेंट के स्तर पर बेहतर कामकाज से सुलझाया जाएगा. मगर बीते दिनों में कश्मीर के अंदर काफी अफरातफरी और कन्फ्यूज़न का माहौल है. कई तरह की अफ़वाहें चल रही हैं. कयास लगाए जा रहे हैं. इन सबके बीच भी सरकार ने चीजें साफ नहीं की हैं. घाटी की दो सबसे बड़ी पार्टियां- नैशनल कॉन्फ्रेंस और पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) की टॉप लीडरशिप नज़रबंद है. उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती के लगातार किए गए ट्वीट बताते हैं कि वो भी अंधेरे में है.

‘ये वो भारत नहीं जिससे जुड़ा था जम्मू-कश्मीर’
रात साढ़े 11 बजे ओमर अब्दुल्ला का ट्वीट आया. उन्होंने लिखा था कि शायद उन्हें हाउस अरेस्ट में रखा जाने वाला है. बाकी मुख्यधारा के नेताओं को भी हाउस अरेस्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है. इसके बाद एक और ट्वीट में उन्होंने कश्मीर के लोगों को संबोधित करते हुए लिखा कि आगे क्या होने वाला है, मालूम नहीं. उमर ने लोगों ने सुरक्षित रहने और शांति बनाए रखने की अपील की. एक और ट्वीट में उमर ने लिखा-

ये वो भारत नहीं है, जिसके साथ जुड़ा था जम्मू-कश्मीर. मगर मैं अभी भी उम्मीदें खत्म करने को तैयार नहीं.

‘शांति के लिए संघर्ष करने वाले जन प्रतिनिधियों को नज़रबंद क्यों किया’
महबूबा मुफ़्ती ने भी रविवार को 11.34 बजे ट्वीट करके लिखा कि वो कश्मीर के लोगों को भरोसा देना चाहती हैं. कि चाहे जो भी हो जाए, वो लोगों का साथ नहीं छोड़ेंगी. साथ मिलकर संघर्ष करेंगी. एक और ट्वीट में महबूबा ने अपने जैसे जनता के हाथों चुने हुए प्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट में रखे जाने के फैसले पर सवाल उठाया. अपने आखिरी ट्वीट में महबूबा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का ज़िक्र किया. लिखा कि बीजेपी नेता होने के बावजूद वाजपेयी को कश्मीरियों के साथ सहानुभूति थी. इसीलिए उन्होंने कश्मीर के लोगों की मुहब्बत भी कमाई. महबूबा ने लिखा कि इस मौके पर आकर वाजपेयी की कमी सबसे ज्यादा खल रही है. महबूबा ने कश्मीर के मौजूदा हालात पर खुशी जताने वालों के नाम भी ट्वीट किया. लिखा कि जो भी इन हालातों का जश्न मना रहे हैं वो नहीं जानते कि भारत सरकार ने अगर सर्वसम्मति से निर्णय नहीं लिया, तो इसके क्या नतीजे हो सकते हैं.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं की नज़रबंदी पहले भी होती आई है. बल्कि ये आम है. मगर ओमर और महबूबा को हाउस अरेस्ट में डालना बड़ी कार्रवाई है.

कैसी अफ़वाहें चल रही हैं?
कश्मीर में क्या होने वाला है, इसे लेकर ठीक-ठीक किसी को जानकारी नहीं. कुछ थिअरीज़ चल रही हैं. एक तो ये कि सरकार 35 A खत्म करने जा रही है. दूसरी बड़ी अफ़वाह ये चल रही है कि सरकार कश्मीर को केंद्र-शासित प्रदेश बनाकर जम्मू और लद्दाख को अलग राज्य बनाने जा रही है. अफ़वाहों का एक सेट ये भी है कि डॉनल्ड ट्रंप के कश्मीर में मध्यस्थता की पेशकश के बाद सरकार अपनी तरफ से सख़्त मेसेज दे रही है. एक ख़बर ये भी है कि 15 अगस्त के मद्देनज़र कश्मीर घाटी में आतंकियों की किसी बड़ी साज़िश के बारे में खुफिया इनपुट है. बहुत सारे ऐंगल गिनाए जा रहे हैं. इनसे कोई मदद नहीं हो रही, बल्कि और संशय बढ़ गया है.

अफ़वाहों की बाढ़ में 4 अगस्त की रात एकाएक ये ख़बर फैली कि तिहाड़ जेल में बंद यासिन मलिक गुज़र गए हैं. बाद में ख़बर आई कि ये झूठी बात है. यासिन बिल्कुल ठीक हैं.


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