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IND vs NZ : ये पांच चीजें न होतीं तो टीम इंडिया न जीत पाती पांचवां वनडे

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इंडिया वर्सेज न्यूजीलैंड. पांचवा और सीरीज का आखिरी वनडे. सीरीज तो टीम जीत चुकी थी. पर चौथे वनडे में हार के बाद भारतीय फैंस का मूड खराब था. जनता हार से नहीं दुखी थी, 92 रन के स्कोर पर ऑलआउट और फिर मिली बुरी वाली हार से दुखी थी. पांचवा वनडे शुरू हुआ तो लगा एक बार फिर बेइज्जती तय है. मगर फिर टीम इंडिया ने वापसी की. एक कंप्लीट टीम परफॉर्मेंस दी और मैच जीत लिया. 35 रनों से. फिर किसी ने कहा है न – अंत भला तो सब भला. तो अंत भला हो गया. और इस भले के पीछे ये 5 वजहें रहीं –

1. रायडू-शंकर की पार्टनरशिप

मैच में टीम इंडिया ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग का फैसला किया. पर जैसे चौथे वनडे में टॉप ऑर्डर ढेर हुआ था. वैसा ही हाल इस मैच में भी हुआ. 18 रन पर चार विकेट हो गए. रोहित, धवन, शुभमन और धोनी वापस जा चुके थे. टीम को एक पार्टनरशिप की सख्त जरूरत थी. तो वो काम किया अंबाती रायडू और विजय शंकर ने. दोनों के बीच 98 रनों की पार्टनरशिप हुई. और इसी पार्टनरशिप की बदौलत टीम ने मैच में वापसी की.

2. पंड्या-जाधव का कैमियो

रायडू मैच के 44वें ओवर में 90 रन पर आउट होकर चले गए तो टीम को अब एक फिनिश की जरूरत थी. तो ये काम कर दिया पहले जाधव और आखिर में पंड्या ने. और पंड्या ने तो बहुत कसके कूटा. पांच छक्के लगाए और अपनी 22 बॉल पर 45 रन की पारी की बदौलत टीम का स्कोर 250 पार पहुंचवा दिया.

पंड्या ने तगड़ी पारी खेली.
पंड्या ने तगड़ी पारी खेली.

3. शमी की वापसी

चौथे वनडे में टीम ने जो एक सबसे बड़ी कमी महसूस की, वो थी मोहम्मद शमी की. सबको यही लगा कि शमी होते तो वो जल्दी शुरुआती विकेट निकालते और मैच जरूर फंसता. सो पांचवे वनडे में शमी लौटे और उन्होंने दोनों ओपनर कॉलिन मुनरो और निकोलस का विकेट निकाला भी. 8 ओवर में 35 रन देकर 2 विकेट निकाले. साबित किया कि बुमराह की जगह उनको मौका देना गलत नहीं था. देखा जाए तो शमी ही इस न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया सीरीज की सबसे बड़ी खोज हैं. उन्हें न्यूजीलैंड सीरीज में मैन ऑफ द सीरीज का अवॉर्ड भी मिला.

4. बॉलिंग में सबने दिखाया दम

इस मैच में कुल्चा माने कुल्दीप और चाहल की जोड़ी तो नहीं थी. मगर इसकी भरपाई चाहल ने अकेले कर दी. क्या गजब गेंद नचाई है. खास बात ये रही कि उन्होंने 3 विकेट लिए और तीनों एलबीडब्लू आउट किए. ये विकेट थे लैथम, ग्रैंडहोम और एसले के. 10 ओवर में रन भी चाहल ने केवल 41 दिए. कुल मिलाकर इस मैच में बॉलरों ने अपनी पूरी जान लगाई. पंड्या ने तो टेलर का विकेट लिया जिन्हें सबसे खतरनाक माना जाता है. इसी तरह जाधव ने तो केन विलियमसन का विकेट लिया जो टीम के लिए बड़ा ब्रेक था. रही सही कसर न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने खराब शॉट्स खेलकर पूरी कर दी.

5. धोनी-रोहित की जुगलबंदी

अंतिम वजह थी कप्तानी. पर किसकी. रोहित शर्मा की नहीं. महेंद्र सिंह धोनी की. धोनी भले आज बल्ले से नहीं चले. पर उन्होंने स्टंप के पीछे खड़े होकर अपना सारा हुनर लगा दिया. फील्डरों को सेट करने में. बॉलरों को गाइड करके. विलियमसन का विकेट धोनी के दिमाग का ही नतीजा था. उन्होंने ही गेंद जाधव से बाहर रखने को कही थी. तभी विलियमसन का विकेट लेने के बाद जाधव नाच रहे थे और धोनी खिलखिला रहे थे. उधर रोहित भी बिना टोका टाकी अपना काम करते रहे.

महेंद्र सिंह धोनी.
महेंद्र सिंह धोनी.

मैच जीतने के बाद जैसा कि रोहित शर्मा ने कहा भी कि ये एक कंप्लीट टीम परफॉर्मेंस थी. ये सही बात थी. टीम बैलंस्ड भी दिखी और सबने कोशिश भर खेला भी. नतीजा सामने है.


 

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