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मोदी सरकार गांधी परिवार से SPG सुरक्षा छीन रही है!

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मोदी सरकार ने गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैलसा किया है. सूत्रों के हवाले से ये खबर आई है. आधिकारिक तौर पर फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है. सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि गांधी परिवार से SPG सुरक्षा वापस ली जाएगी. एसपीजी की जगह Z+ सुरक्षा दी जाएगी. कुछ समय पहले ही सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी. उन्हें जेड प्लस सिक्योरिटी दी गई थी.

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के पास एसपीजी सुरक्षा है. अगर एसपीजी सुरक्षा इनसे वापस होती है तो अब सिर्फ पीएम मोदी के पास ये सुरक्षा रह जाएगी. बताया जा रहा है कि फैसला सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट्स के आधार पर लिया गया है.

कांग्रेस की ओर से इस पर प्रतिक्रिया भी आ गई है. पार्टी ने इस फैसले की निंदा की है. कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा है कि सरकार एसपीजी की सुरक्षा हटाकर गांधी परिवार को परेशान करना चाहती है. यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है. गांधी परिवार के दो लोगों की हत्या कर दी गई थी, ऐसे में यह सुरक्षा नहीं हटनी चाहिए थी.

किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति को सुरक्षा देने का काम सरकार का होता है. केंद्रीय गृह मंत्रालय अपनी एजेंसियों के मार्फत लगातार ऐसे लोगों पर खतरे का अंदाज़ा लगाती है. खतरा किसी भी तरह का हो सकता है. बाहरी या अंदरूनी. मसलन आंतकवादी या अपराधियों से, या फिर राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों से. जब सरकार को लगता है कि किसी नेता को जान का खतरा पैदा हो गया है, तब वो देखती है कि खतरे से निपटने के लिए किस तरह की और कितनी फोर्स चाहिए.

भारत में वीवीआईपी सिक्योरिटी के क्षेत्र में काम करने वाली कई एजेंसियां हैं. इनमें सबसे प्रसिद्ध है एसपीजी. स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप. इसकी स्थापना इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की गई थी. इसका काम है भारत के प्रधानमंत्री, उनके परिवार और पूर्व प्रधानमंत्रियों को सुरक्षा प्रदान करना. इनके अतिरिक्त एसपीजी किसी और वीवीआईपी की सुरक्षा में नहीं लगाई जाती. दूसरे वीवीआईपी व्यक्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस के पास रहती है. ज़रूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों के जवान लिए जाते हैं.

एसपीजी का गठन 1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद किया गया था. 1988 में इससे संबंधित कानून संसद से पास हुआ. उस समय कानून में पूर्व प्रधानमंत्रियों को इस सुरक्षा का पात्र नहीं माना गया था. वीपी सिंह सरकार ने 1989 में इसी आधार पर राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली थी. 1991 में राजीव की हत्या हो गई. इसके बाद एसपीजी कानून में संशोधन किया गया. संशोधित कानून में प्रावधान था कि पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवारों को पद से हटने के 10 साल बाद तक एसपीजी कवर मिलेगा. 2003 में इस कानून में फिर संशोधन किया गया, ये अब तक लागू है. इसके अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री को पद छोड़ने के एक साल बाद तक ही एसपीजी सिक्योरिटी कवर मिलेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांधी परिवार को एसपीजी की जगह Z+ सुरक्षा दी जाएगी. चुनिंदा लोगों को मिलने वाली इस सुरक्षा में हर वक़्त कम से कम 55 जवान तैनात रहते हैं. इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो रहते हैं. एनएसजी को वीवीआईपी सिक्योरिटी के लिए नहीं बनाया गया था. वो एक आतंकविरोधी दस्ता है. जिसके हर जवान को 90 दिन की कठिन ट्रेनिंग पास करनी होती है. हर कमांडो को ट्रेनिंग के दौरान पचास से बासठ हजार ज़िंदा कारतूसों की फायर प्रैक्टिस पूरी करनी होती है. जबकि किसी सामान्य सैनिक की पूरी जिंदगी में भी इतनी फायर प्रैक्टिस नहीं होती. NSG की इस ट्रेनिंग और क्षमता को देखते हुए ही उसे वीवीआईपी सिक्योरिटी के लिए भी तैनात किया जाता है.


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