Submit your post

Follow Us

मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार में आर्थिक मंदी पर क्या कहा?

5
शेयर्स

डॉ. मनमोहन सिंह. दो बार प्रधानमंत्री रहे हैं. वित्त मंत्री और आरबीआई के गर्वनर रह चुके हैं. योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे हैं. पिछले 30-35 साल से भारत के आर्थिक फैसलों के साथ उनका सीधा संबंध रहा है. 1991 में आर्थिक उदारीकरण से लेकर 2008 में पूरी दुनिया में आई आर्थिक मंदी से भारत को बचा ले गए. लेकिन अब भारत में अर्थव्यवस्था की हालत लगातार खराब होती जा रही है. और मनमोहन सिंह ने इसके लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को जिम्मेदार बताया है.

पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा,

अर्थव्यवस्था की हालत चिंताजनक है. पिछली तिमाही में जीडीपी केवल पांच प्रतिशत की दर से बढ़ी है. ये इस ओर इशारा करती है कि हम एक लंबी मंदी के दौरे में हैं. भारत में ज्यादा तेजी से वृद्धि करने की क्षमता है, लेकिन मोदी सरकार के चौतरफा कुप्रबंधन के चलते अर्थव्यवस्था में मंदी छा गई है. चिंताजनक बात ये है कि मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर केवल 0.6 प्रतिशत है. इससे साफ हो जाता है कि हमारी अर्थव्यवस्था अभी तक नोटबंदी के गलत फैसलों और जल्दबाजी में लागू किए गए जीएसटी के नुकसान से उबर नहीं पाई है.

अर्थव्यवस्था में और गिरावट की ओर इशारा करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा-

घरेलू मांग में काफी गिरावट है. वस्तुओं के उपयोग की दर 18 महीने में सबसे निचले स्तर पर है. नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 15 साल के सबसे निचले स्तर पर है. टैक्स रेवन्यू में कमी आई है. जीडीपी की तुलना में टैक्स की वृद्धि काल्पनिक रहने वाली है. क्योंकि छोटे और बड़े सभी व्यापारियो के साथ जबरदस्ती हो रही है. टैक्स टेरेरिज्म का खौफ है. इनवेस्टर्स में उदासी का महौल है. ये अर्थव्यवस्था में सुधार के आधार नहीं हैं.

मोदी सरकार में खत्म हो रही नौकरियों पर भी मनमोहन सिंह बोले. उन्होंने कहा-

मोदी सरकार की नीतियों के चलते भारी संख्या में नौकरियां खत्म हो गई हैं. अकेले ऑटोमोबाइल सेक्टर में साढ़े तीन लाख लोगों को नौकरियों से निकाल दिया गया है. असंगठित क्षेत्र में भी इसी प्रकार बड़े स्तर पर नौकरियां खत्म होंगी. जिससे कमजोर कामगारों को रोज़ी-रोटी से हाथ धोना पड़ेगा.

पूर्व प्रधानमंत्री ने किसानों की भी बात की है. उन्होंने कहा-

ग्रामीण भारत की हालत गंभीर है. किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. गांवों की आमदनी गिर रही है. कम महंगाई दर, जिसका मोदी सरकार प्रदर्शन करना पसंद करती है वह हमारे किसानों की आय कम करके हासिल की गई है. इससे देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या को ठेस पहुंची है.

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि संस्थानों पर हमले हो रहे हैं. और उनकी स्वायत्ता खत्म की जा रही है. सरकार को एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ रुपए देने के बाद आरबीआई की आर्थिक कुप्रबंधन को वहन कर सकने की क्षमता का टेस्ट होगा. जबकि सरकार इनती बड़ी राशि के इस्तेमाल की कोई योजना न होने की बात कह रही है.

इस सरकार के कार्यकाल में भारत के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा है. बजट घोषणाओं, और रोलबैक्स ने इंटरनेशन इंवेस्टर्स के विश्वास को झटका दिया है. भारत भगौलिक-राजनीतिक गठजोड़ों के कारण वैश्विक व्यापार में उत्पन्न हुए अवसरों का लाभ उठाते हुए अपना निर्यात भी नहीं बढ़ा पाया है. मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक प्रबंधन का बुरा हाल हो चुका है.

बदले की राजनीति को छोड़ने और अर्थव्यवस्था को सुधारने की सलाह देते हुए मनमोहन बोले-

हमारे युवा, किसान और खेत मजदूर, एंटरप्रेन्योर्स और गरीब वर्ग इससे बेहतर स्थिति का हकदार है. भारत इस हालात में ज्यादा समय तक नहीं रह सकता. इसलिए मैं सरकार से आग्रह करता हूं वो बदले की राजनीति छोड़े. और सभी वुद्धिजीवियों और विचारकों का सहयोग लेकर हमारी अर्थव्यवस्था को इस मानव निर्मित संकट से बाहर निकाले.

और जब मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था की ऐसी हालत के लिए सीधे तौर पर पीएम मोदी को घेरा तो सफाई के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आगे आना पड़ा.  पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के बयान पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा,

‘क्या डॉ. मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना में लिप्त होने के बजाय समझदार लोगों से बातचीत कर रास्ता निकालना चाहिए? क्या उन्होंने ऐसा कहा है? ठीक है, धन्यवाद, मैं इस पर उनकी बात सुनूंगी. यही मेरा जवाब है.

क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी कैबिनेट पूर्व प्रधानमंत्री और उससे भी ज्यादा एक बड़े अर्थशास्त्री की बातों पर ध्यान देगी. क्या मनमोहन सिंह ने जो रास्ते सुझाएं हैं, पीएम मोदी उसपर अमल करेंगे. भविष्य में जो भी हो, लेकिन फिलहाल की हालत ये है कि देश की अर्थव्यवस्था पिछले सात साल के सबसे निचले स्तर पर है. और ये हम नहीं, सरकार के आंकड़े कह रहे हैं.


Video: रेलवे मिनिट्री ने ऑनलाइन बुकिंग पर दोबारा सर्विस चार्ज वसूलने का ऑर्डर जारी किया है

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्या चल रहा है?

पत्नी ने जिस आधार पर तलाक मांगा, उसे पढ़कर आप भी सोच में पड़ जाएंगे

भले ही ये मामला चटखारे लेने जैसा लगे, लेकिन इसपर गंभीर बहस की जरूरत है.

कबीर सिंह का डिलीटेड सीन सामने आया, जो फ़िल्म में होता तो कबीर को गालियां नहीं तालियां मिलतीं

और 'कबीर सिंह' के माथे पे महिला विरोधी होने का कलंक भी नहीं लगता.

बुमराह कन्फ्यूज थे, कप्तान विराट कोहली ने डीआरएस लिया और इतिहास बन गया

कैरेबियाई धरती पर हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय बने जसप्रीत बुमराह.

8वीं के छात्र ने प्रार्थना पत्र में लिखा, '10 बजे मेरा निधन हो गया', प्रिंसिपल ने छुट्टी दे दी

बच्चे का लीव एप्लीकेशन वायरल हो रहा है.

आज से गाड़ी चलाते वक्त नियम तोड़ा तो इतना जुर्माना लगेगा कि आधी सैलरी खत्म हो जाएगी

आपकी जेब से जुड़ी वो 5 चीजें, जो एक सितंबर से बदल गई हैं.

रानू मंडल को गाना भी गाना है, रानू को फेमस भी होना है और रानू को लाइफ पर फिल्म भी चाहिए!

पहले अच्छे परिवार से थीं, गरीब तो बाद में हुईं.

परिवार में हैं 52 लोग, 'य' और 'र' के चक्कर में NRC लिस्ट से बाहर हो गए 45 आदमी

NRC के लिए सबसे सक्रिय स्थानीय प्रचारकों में से एक इमान अली के परिवार की कहानी.

जिस नहर को बनने में लगे 42 साल और 2000 करोड़, वो 13 घंटों में ही बह गई

सरकार ने नहर बहने का जो कारण बताया वो जानकर आप अपना माथा पीट लेंगे.

ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए एक बुरी खबर है

ऑनलाइन टिकट बुक करते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है.

भारत को कोसते हुए रैली कर रहे थे पाकिस्तान के मंत्री और फिर करंट लग गया

कहीं करंट लगने के लिए भी मोदी को जिम्मेदार न बता दें पाकिस्तानी मंत्री...