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बिहार के मुजफ्फरपुर में होटल के कमरे से EVM क्या मिले, अफवाहों को पंख लग गए

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07 मई, 2019 को हुए पांचवे चरण के मतदान में बिहार में सबसे आधी वोटिंग मुजफ्फरपुर में हुई. कुल 58 प्रतिशत के लगभग. ये काफी था मुजफ्फरपुर का सुर्ख़ियों में आने के लिए अब यहां से एक और खबर सुर्खियां बटोर रही है. और ये खबर चौंकाने वाली है.

# हुआ क्या –

दरअसल जब यहां पर चुनाव चल ही रहे थे, तभी एक होटल से ईवीएम (और वीवीपैट) मशीनें मिलने को लेकर काफी बवाल मच गया. होटल एक पोलिंग बूथ के काफी नज़दीक था. इसलिए जब पोलिंग एजेंटों को इस बात की भनक लगी कि सेक्टर मजिस्ट्रेट के पास दो ईवीएम मशीन हैं तो वह गड़बड़ी की आशंका जताते हुए हंगामा करने लगे.

# तो क्या यहां चुनाव फिर से होंगे –

नहीं क्यूंकि जो ईवीएम (और वीवीपैट) होटल से मिली हैं, वो रिप्लेसमेंट के लिए रिजर्व थीं. यानी न इसमें वोट पड़े थे और न ही पड़ने वाले थे, जब तक कि कुछ इमरजेंसी न आ जाती. मतलब कि ये अधिक से अधिक ऐसा ही है कि बारहवें खिलाड़ी का ड्रिंक्स मैदान में लाते वक्त चोटिल हो जाना. (वो भी अधिक से अधिक).

ये मात्र कुछ अधिकारियों की लापरवाही और उनका लचर रवैया है. और संतुष्ट करने वाली बात ये है कि उनपर उचित कार्यवाई हो भी रही/गई है.

# किनकी लापरवाही और क्या कार्रवाई –

हंगामे के बाद स्थानीय एसडीओ कुंदन कुमार वहां पर पहुंचे और चारों ईवीएम मशीन को अपने कब्जे में ले लिया. मुजफ्फरपुर जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने मामले की जांच कर कार्रवाई की बात कही है. सेक्टर मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार को इस लापरवाही के लिए कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है ईवीएम मशीन होटल में कैसे पहुंचे?

# मगर ये ईवीएम होटल पहुंचे कैसे –

तो चलिए लापारवाही भी थी, और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो ली. तो भी होटल में उस लापारवाही के चलते भी कैसे पहुंची ये मशीनें? उत्तर सिंपल है. अगर प्रशासन की मानें तो दरअसल, सेक्टर मजिस्ट्रेट अवधेश कुमार जो कि ईवीएम के संरक्षक थे 4 ईवीएम मशीन बैकअप के तौर पर ले चल रहे थे ताकि अगर किसी पोलिंग बूथ पर ईवीएम खराब हो जाता है तो उसे तुरंत बदला जा सके. तो इसी लॉजिस्टिक्स के दौरान इन ईवीएम को ढोकर ले जा रही गाड़ी के ड्राइवर को भी अपना वोट डालने की इच्छा हुई (जो कि अच्छी बात थी). तो उसके बाद अवधेश कुमार उस मतदान केंद्र के पास ही एक होटल में ईवीएम मशीन को लेकर उतर गए. (जो कि, ऑफ़ कोर्स बुरी बात थी).

# तो इस खबर से हमें क्या सीख लेनी चाहिए –

हम आपको विशेष तौर पर बताना चाहेंगे कि इस पूरे प्रकरण में जो भी हुआ वो केवल इसलिए बुरा है क्यूंकि ये सब उन अफवाहों- जैसे ‘ईवीएम से छेड़छाड़’ आदि – को हवा देने का और पूरी चुनावी प्रक्रिया में उंगली उठाने का कार्य करती है जिससे हमारे भरोसे को ठेस पहुंचती है. बाकी तंत्र को इन छोटी-छोटी मगर मोटी गलतियों से बचना तो चाहिए ही था.

 

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