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जुलाई के जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े सरकार का सिरदर्द बढ़ाने वाले हैं

जुलाई महीने के गु़्ड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के आंकड़े आ गए हैं. इसके तहत 87,422 करोड़ रुपये सरकार के खजाने में आए. लेकिन यह जून महीने की तुलना में कम है. जून में 90,917 करोड़ रुपये जीएसटी आया था. इसका मतलब है कि जुलाई में लगभग चार हजार करोड़ रुपये कम आए हैं. अगर साल 2019 के जुलाई महीने से तुलना की जाए तो इस बार जुलाई में जीएसटी रेवेन्यू का 86 फीसदी ही आया है.

जुलाई 2020 में केंद्रीय जीएसटी 16,147 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी 21,418 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी 42,592 करोड़ रुपये रहा. एकीकृत जीएसटी में वस्तुओं के आयात पर जुटाए गए 20,324 करोड़ रुपये का टैक्स शामिल है.

जून से कम है जुलाई का कलेक्शन

वित्त मंत्रालय ने कहा कि जुलाई का जीएसटी कलेक्शन जून की तुलना में कम है. लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जून में बड़ी संख्या में करदाताओं ने फरवरी, मार्च और अप्रैल 2020 से संबंधित टैक्स का भुगतान किया था. बता दें कि टैक्सपेयर्स को कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर फरवरी, मार्च और अप्रैल में जीएसटी भुगतान से राहत प्रदान की गई थी. यह राहत सितंबर 2020 तक के लिए है.

अरुणाचल प्रदेश-गोवा में सबसे ज्यादा कमी

जीएसटी कलेक्शन में राज्यों के बारे में बात की जाए तो अरुणाचल प्रदेश के कलेक्शन में सबसे ज्यादा कमी आई है. यहां पर जुलाई 2019 में 49 करोड़ रुपये आए थे जबकि जुलाई 2020 में 33 करोड़ ही आए. यानी लगभग 32 फीसदी की कमी. वहीं गोवा की बात करें तो यहां पर जुलाई 2019 में 361 करोड़ रुपये जीएसटी कलेक्शन में आए थे. लेकिन इस साल जुलाई 2020 में केवल 257 करोड़ रुपये का ही कलेक्शन हुआ. यह 29 फीसदी की कमी है.

वित्त सचिव ने दिए थे कम जीएसटी कलेक्शन के संकेत

बता दें कि पिछले दिनों वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने भी जीएसटी कलेक्शन को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने वित्त मामलों की संसदीय समित के सामने कहा था कि वर्तमान हालातों में केंद्र सरकार राज्यों को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में उनके हिस्से का पैसा देने की हालत में नहीं है. उन्होंने कहा था कि अभी जो जीएसटी की कमाई बांटने का फॉर्मूला है, उसके अनुसार तो केंद्र राज्यों को पैसा नहीं दे सकता. अगर टैक्स कलेक्शन एक निश्चित सीमा से कम होता है तो जीएसटी एक्ट में राज्यों को पैसा देने के फॉर्मूले में बदलाव की व्यवस्था है. यानी टैक्स कलेक्शन कम होने पर राज्यों को मिलने वाले पैसे की हिस्सेदारी में कमी की जा सकती है.


Video: केंद्र ने GST पर जो कहा है वो राज्य सरकारों के लिए दिक्कत की बात हो सकती है!

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