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मोबाइल नेटवर्क को 3G से 4G करने को हामी भरी, लग गई 12 लाख रुपये की चपत

तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही साइबर क्राइम के मामले भी बढ़ रहे हैं. कभी एटीएम अपडेट तो कभी आधार लिंक कराने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी हो रही है. ऐसा ही एक मामला दिल्ली से आया है. यहां पर एक शख्स ने सिम कार्ड को 3G से 4G में अपग्रेड करने के बहाने एक महिला के नाम पर बैंक से कथित तौर पर 12 लाख रुपये का लोन ले लिया. महिला का आरोप है कि बैंक ने बिना क्रॉस चेक किए पर्सनल लोन दे दिया. अब उससे लोन चुकाने को कहा जा रहा है. घटना लॉकडाउन के दौरान मई महीने में दिल्ली की है. महिला ने पुलिस में मामला दर्ज कराया है.

नेटवर्क अपग्रेड के बहाने की धोखाधड़ी

पुलिस ने बताया, नेहा खत्री नाम की महिला मोती नगर इलाके में रहती हैं. वह एक आईटी कंपनी में काम करती है. उन्होंने 20 जुलाई को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. इसमें बताया कि 10 मई को उनके पास एक व्यक्ति का फोन आया. उसने खुद को आइडिया कंपनी के कस्टमर केयर से बताया. उसने सिम कार्ड को 3G से 4G में अपग्रेड करने का ऑफर दिया. नेहा इस पर सहमत हो गई क्योंकि वह नेटवर्क की समस्या से परेशान थीं. उन्होंने उस आदमी के बताए अनुसार हां के लिए “Y” लिखकर एक मैसेज कर दिया. नेहा को बताया गया कि 24 घंटे में सिम अपग्रेड हो जाएगी.

फोन कटते ही नेटवर्क भी गायब

नेहा ने अपनी शिकायत में कहा,

उस आदमी का कॉल कटते ही सिम का नेटवर्क चला गया. अगले 24 घंटे में भी नेटवर्क नहीं आया. ऐसे में मैंने कस्टमर केयर को फोन किया और सिम ब्लॉक करने को कहा. लेकिन कस्टमर केयर ने मना कर दिया. कहा कि इस सिम से आपकी आइडेंटिटी मैच नहीं करती है. लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद थीं तो व्यक्तिगत रूप से जाकर सिम बंद नहीं करा सकती थी. इस पर मुझे किसी गड़बड़ का अंदेशा हुआ, लेकिन मेरे पास कोई मैसेज वगैरह नहीं आया. 12 मई को रात ढाई बजे तक मैं इंटरनेट बैंकिंग कर पा रही थी.

बैंक ने पास कर दिया करीब 12 लाख रुपये का लोन

नेहा की शिकायत के अनुसार, 12 मई को जब वह सुबह उठीं तो उनके पास इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड चेंज होने का मैसेज आया. इस पर वह एटीएम गईं ताकि बचे-खुचे पैसे निकाल लाए. साथ ही उन्होंने बैंक को मेल कर दिया कि उनके खाते को ब्लॉक कर दिया जाए. उसी दिन दोपहर 12 बजे वह बैंक गईं. बकौल नेहा,

वहां बैंक के डिप्टी मैनेजर ने कहा कि आपके खाते में 2.50 लाख रुपये है. यह सुनकर वह हैरान रह गई. मैंने कहा कि यह हो ही नहीं सकता, क्योंकि उन्होंने सारे पैसे निकाल लिए हैं. फिर भी उन्होंने खाता ब्लॉक करने को कहा. लेकिन खाता फ्रीज होने तक बाकी के पैसे भी उनकी आंखों के सामने से ट्रांसफर हो गए. बाद में डिप्टी मैनेजर ने कहा कि यह पैसा उनके खाते में पहले से अप्रूव इंस्टा पर्सनल लोन के जरिए आए थे. यानी उनके खाते से 11,90,561 रुपये का पर्सनल लोन लिया गया.

बिना वेरिफाई किए लोन दिया, अब चुकाने को कह रहा बैंक

नेहा का आरोप है कि बैंक ने बिना वेरिफाई किए पर्सनल लोन पास कर दिया. उसने बैंक को खाता ब्लॉक करने का मेल भी किया था लेकिन उसके बाद भी लोन दे दिया गया. नेहा का कहना है कि 12 मई को ही उन्होंने साइबरक्राइम ऑनलाइन में एफआईआर कराई थी. लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ. नेहा का आरोप है कि दो महीने बाद भी बैंक यह नहीं बता रहा है कि लोन पास कैसे किया गया. उन्होंने कहा,

पैसा कहां गया? बैंक ने पैसा वापस लेने को क्या कदम उठाए? इस पर बैंक कुछ नहीं बोल रहा. मुझे ही रोजाना फोन कर लोन चुकाने को कहा जाता है जबकि मैंने लोन लिया ही नहीं.

वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कर रही है. इस मामले में अभी तक बैंक की ओर से कोई बयान नहीं आया है.


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