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दिल्ली के राबिया स्कूल ने 59 बच्चियों को तहखाने में बंधक बनाया

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दिल्ली का बल्लीमारान इलाका. इसका जिक्र आते ही सबसे पहले याद आते हैं मशहूर शायर मिर्ज़ा गालिब. फिर मौलाना हसरत मोहानी से लेकर ख्वाजा अहमद अब्बास और पूर्व राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन तक की ज़िंदगी के तमाम किस्से इस इलाके से जुड़े हुए हैं. लेकिन ये अतीत की बाते हैं. वर्तमान ये है कि इस इलाके में लड़कियों को तालीम देने के लिए बनाए गए राबिया गर्ल्स पब्लिक स्कूल में 9 जुलाई को पांच से 8 साल की 59 बच्चियों को स्कूल के बेसमेंट में करीब पांच घंटे तक कैद रखा गया. वजह… इतनी मामूली कि जिक्र न भी किया जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन 59 बच्चियों के साथ इस क्रूरता की जो वजह स्कूल ने बताई वो ये है कि इनके माता-पिता ने उनकी स्कूल की फीस नहीं भरी थी. ये फीस करीब 3000 रुपये थी, जिसे महीने की 30 तारीख को जमा करना होता था.

बंधक बनी बच्चियां रोती-बिलखती रहीं, लेकिन स्कूल प्रशासन का दिल नहीं पसीजा. हंगामा करने पर स्कूल से नाम काटने तक की धमकी दी गई. (Photo : Facebook)

पांच साल की बच्ची, जिसे शायद ही पता हो कि स्कूल की फीस क्या होती है, उसे सजा दी गई. सजा क्या यातना दी गई. वो और उसकी हमउम्र कुल 59 बच्चियों को स्कूल के बेसमेंट में करीब 6 घंटे तक बंद रखा गया. इस दौरान बच्चियों को टॉयलेट भी नहीं जाने दिया गया. दोपहर के करीब 12.30 बजे जब बच्चियों को लेने के लिए उनके माता-पिता स्कूल पहुंचे, तो बच्चियां स्कूल में नहीं दिखीं. पूछताछ में पता चला कि बच्चियों को बेसमेंट में बंधक बनाकर रखा गया है. इसके बाद बच्चियों के घरवालों ने हंगामा कर दिया. हंगामे के बाद बच्चियों को बेसमेंट से बाहर निकालकर घरवालों के हवाले कर दिया गया.

बच्चियों के घरवाले जब उन्हें लेने के लिए स्कूल पहुंचे तो पता चला कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है.
बच्चियों के घरवाले जब उन्हें लेने के लिए स्कूल पहुंचे तो पता चला कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है. (Photo: Facebok)

लेकिन हंगामा यहीं खत्म नहीं हुआ. स्कूल प्रशासन की ओर से कहा गया कि फीस जमा न करने की वजह से बच्चियों को बंधक नहीं बनाया गया था, बल्कि उन्हें बेसमेंट में बने एक्टिविटी रूम में रखा गया था. और ऐसा स्कूल की हेड मिस्ट्रेस फराह दीबा खान के कहने पर किया गया था. लेकिन बच्चियों के घरवालों ने कहा कि उन्होंने सितंबर तक की फीस ज़मा कर रखी है. इसके बाद हंगामा बढ़ा तो मामला मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास पहुंचा. सीएम के निर्देश पर हौज काजी पुलिस स्टेशन में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जुवनाइल ऐक्ट की धारा 75 और आईपीसी की धारा 342 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. एफआईआर के मुताबिक स्कूल प्रबंधन पर आरोप है कि उसने फीस ज़मा होने के बाद भी बच्चों को छह घंटे तक भूखे-प्यासे बंधक बनाए रखा. वहीं उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा है कि स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

ये वो वक्त है, जब पूरी दुनिया और खास तौर से भारत में कहा जाता है कि ‘पढ़ेंगी बेटियां, तभी तो बढ़ेंगी बेटियां.’ यहीं पीएम मोदी नारा देते हैं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ. और जब बेटियों को पढ़ने के लिए उनके माता-पिता एक नामी प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं, तो उन्हें वहां बंधक बना लिया जाता है. उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जाता है, उन्हें भूखे-प्यासे रहकर यातनाएं दी जाती हैं. ये हाल तब है, जब घरवालों ने फीस ज़मा कर रखी थी. अगर नहीं भी ज़मा होती तो इस स्कूल को किसने हक दिया था कि वो इन बच्चियों के साथ इस क्रूरता के साथ पेश आए. अगर उन्हें फीस वसूलनी थी, तो बच्चों के घरवालों को बुलाते, उनके माता-पिता से बात करते. लेकिन स्कूल ने क्या किया. बच्चों के साथ अमानवीयता. इसलिए एफआईआर दर्ज होने से कुछ नहीं होता. सजा मिलनी चाहिए और जल्द मिलनी चाहिए ताकि  स्कूल हो या कोई और संस्था, बच्चों के साथ ऐसा करने की किसी की भी हिमाकत नहीं होनी चाहिए.


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Delhi : 59 girls from 5 year to 8 year old of Rabia Public School locked up in the basement over fees dispute

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