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स्टीफन हॉकिंग वाली बीमारी से जूझ रहे विनायक की एग्ज़ाम्स के दौरान मौत, रिज़ल्ट आया तो सब हैरान

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आनंद फ़िल्म का एक फ़ेमस डायलॉग है ‘ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं’. किरदार समझाना चाहता था कि ‘जितना जियो भरपूर जियो’. कितनों की समझ में आया, नहीं कह सकते. लेकिन कुछ असल ज़िंदगी के किरदार वाक़ई ये समझा देते हैं कि ‘आज में जियो, कल की फ़िक्र करने में अपना आज मत बिगाड़ो’.

इस बार CBSE में दसवीं के एग्ज़ाम देने वाले विनायक ने अपनी असल ज़िंदगी में ‘आनंद’ को जिया. बोर्ड एग्जाम में विनायक ने कुल तीन ही पेपर दिए. और विनायक को इंग्लिश में 100, होम साइंस में 97 और संस्कृत में 96 मार्क्स मिले हैं. टॉपर लिस्ट में आने भर मार्क्स हैं ये. विनायक बचे हुए दोनों पेपर्स नहीं दे सका. क्योंकि मौत के एग्ज़ाम्स में ना तो ग्रेस मार्क्स हैं और ना ही री-इवैलुएशन. विनायक अब इस दुनिया में नहीं है.

# एक गंभीर बीमारी थी विनायक को:

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक ऐसी बीमारी है, जो मांसपेशियों की नेचुरल ग्रोथ नहीं होने देती. और शरीर बेहद कमजोर हो जाता है. यह डिस्ट्रोफिन की कमी के कारण होता है, जो एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो सेल्स को स्वस्थ रखने में मदद करता है. विनायक एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा का छात्र था.

विनायक ने जाते जाते जो सबक सिखाया वो आपको ज़िंदगी के हर एग्ज़ाम में पास कराएगा
विनायक ने जाते जाते जो सबक सिखाया वो आपको ज़िंदगी के हर एग्ज़ाम में पास कराएगा

# मां पिता ने ऐसे पूरा किया विनायक का एक सपना:

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में विनायक की मां ने कहा

विनायक स्टीफ़न हॉकिंग को अपना आदर्श मानता था. अंतरिक्ष में जाना चाहता था. और ढेर सारे अनसुलझे रहस्य सुलझाना चाहता था. वो कहता था कि अगर हॉकिंग्स कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं? और बोर्ड एग्ज़ाम्स के बाद विनायक रामेश्वरम जाना चाहता था.

परीक्षा ख़त्म हुई. विनायक का रिज़ल्ट भी आ गया. रामेश्वरम भी अपने जगह क़ायम है. बस विनायक नहीं है. लेकिन विनायक की ये ख़्वाहिश अपनी तरफ़ से पूरी करने के लिए मां पिता रामेश्वरम गए. विनायक का जिस्म ना सही ज़िद तो रामेश्वरम गई ही.

# जुनून इसे कहते हैं:

विनायक की तबियत एग्ज़ाम्स के बीच में ही ख़राब हो चुकी थी. लेकिन 26 मार्च को जब विनायक उठा तो सबसे पहले अपनी मां से किताबें देने के लिए कहा. उसे फ़िक्र थी आने वाले दो पेपर्स की. पिता ने नाश्ता कराया. और जब पिता विनायक को नहला रहे थे तभी विनायक बेहोश हो गया. पिता और मां अस्पताल लेकर भागे. लेकिन इस बार रेस में मौत भी थी. और मौत ने माता पिता से पहले पाला छू लिया. विनायक नहीं रहा. रह गई विनायक की कहानी. जिसे सुनने वाले सुनते रहेंगे. लेकिन विनायक आख़िरी दिन तक अपने सपने को प्यार करता रहा.

# बड़ी बहन जैसे टॉपर बनना चाहता था विनायक:

विनायक की बड़ी बहन भी सीबीएससी टॉपर रह चुकी हैं और फ़िलहाल अपनी आगे की पढ़ाई यूएस से कर रही हैं. विनायक अपनी बहन की ही तरह सीबीएससी टॉपर बनना चाहता था. और उसके लिए विनायक ने भरपूर मेहनत भी की थी. लेकिन ज़िंदगी अलग ही पेपर लिए खड़ी थी.

इतिहास में बेहद रूचि रखने वाला विनायक अब ख़ुद इतिहास है. लेकिन एक ऐसा इतिहास जिस पर कोई अपने भविष्य की नींव रख सके. आपको जब भी कोई परीक्षा डराए तो घड़ी भर रूककर व्हील चेयर पर बैठे विनायक को याद करिएगा. कंधे झटक कर आगे बढ़िएगा और ज़िंदगी से कहिएगा ‘लेट्स डू इट बिफ़ोर आई डाय’.


वीडियो देखें: ‘पिछले 5 साल में मोदी ने फायदा नहीं किया तो क्या हुआ, अब कर देगा’

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