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मायावती के चेहरे पर मुस्कान लाने वाला कर्नाटक का इकलौता विधायक

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कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग तय हो चुके हैं. भाजपा के येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए हैं. दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही जेडीयू के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा कर रही है. लेकिन एक पार्टी है जो सरकार बनने – न बनने की इस पूरी कवायद से बहुत दूर है, फिर भी खुशी से फूली नहीं समा रही है. हम बात कर रहे हैं बहन मायावती की पार्टी बसपा की. माने बहुजन समाज पार्टी. चमराजनगर ज़िले की कोल्लेगल विधानसभा सीट से बसपा के एन. महेश चुनाव जीत गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पहली बार है कि कर्नाटक में बसपा का कोई कैंडिडेट विधायकी जीता है. इस बार का विधानसभा चुनाव बसपा ने जेडीएस के साथ मिलकर लड़ा है. फरवरी में दोनों पार्टियों के बीच चुनाव साथ लड़ने को लेकर समझौता हुआ था और बसपा को 20 सीटें मिली थीं.

कोल्लेगल अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट है. एन महेश को इतिहास बनाने से भी ज़्यादा खुशी इस बात की रही होगी कि 2013 के चुनाव में वो जिस सीट पर 10 हज़ार की मार्जिन से हारे थे, उसी सीट पर वो 19,454 की मार्जिन से जीते. एन महेश को इस बार कुल 71,792 वोट मिले. दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के ए आर कृष्णमूर्ति, जिन्हें 52,338 वोट मिले. राज्य में सबसे आगे रहने वाली भाजपा इस सीट पर तीसरे नंबर पर रही है. 2013 में ये सीट कांग्रेस के एस जयना को गई थी.

एन महेश कर्नाटक से पहले बसपा सांसद हैं.
एन महेश कर्नाटक से पहले बसपा सांसद हैं.

क्यों हुआ जेडीएस और बसपा में गठबंधन?

2013 में जेडीएस कर्नाटक की 224 सीटों में से सिर्फ 40 सीटें जीती थी. कई सीटों पर जेडीएस बहुत कम अंतर से दूसरे नंबर पर रह गई थी. तो जेडीएस का अनुमान रहा कि ऐसी सीटों पर छोटे दलों के साथ दोस्ती काम आ सकती है, ताकि वोट कम प्रत्याशियों में बंटे. शायद इसीलिए उसने बसपा से हाथ मिलाया. बसपा ने 2013 का चुनाव 175 सीटों पर लड़ा था लेकिन वो किसी भी सीट को जीत नहीं पाई थी. वोट शेयर भी एक फीसदी से कम रहा था. इसीलिए बसपा भी एक क्षेत्रीय दल के साथ जाना सही लगा होगा. वोट शेयर के हिसाब से बसपा को इस बार भी एक फीसदी से कहीं कम वोट मिले हैं – 0.3%. लेकिन बसपा का खाता ज़रूर खुल गया है.

जेडीएस का भविष्य यूपी में सपा-बसपा का भविष्य है

चुनाव के बाद लगभग हर एग्ज़िट पोल का दावा था कि कर्नाटक में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिलेगा. जिसे भी सरकार बनानी होगी, उसे जेडीएस का समर्थन लगेगा ही. चुनाव नतीजे ठीक ऐसे ही आए. बाज़ी कांग्रेस मार ले गई. पर्याप्त विधायक नहीं जिता पाई लेकिन जेडीएस को भाजपा से पहले मना ले गई. वैसे जेडीएस यदि बसपा को लेकर भाजपा के साथ जाती तो अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान यूपी में सपा-बसपा की ट्यूनिंग बिगड़ जाती. फिलहाल सपा-बसपा दोनों उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव साथ में लड़ने के मूड में हैं. लेकिन दक्षिण में बसपा अगर भाजपा की सरकार में शामिल होती, तो सपा इसे पसंद तो नहीं ही करती. इसलिए सपा वाले भी कर्नाटक के नतीजों पर नज़र लगाए हुए थे.

बात यहां ये भी है कि बसपा के लिए ये कहना भी आसान नहीं था कि वो किसी कीमत पर भाजपा का साथ नहीं देगी. क्योंकि मायावती के खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है. इल्ज़ाम है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहने के दौरान चीनी मिल बिक्री घोटाले में हिस्सा लिया. फिलहाल बसपा ने अपनी ओर से कोई बयान जारी नहीं किया है. उनके पास खुशी मनाने की एक वजह है, वो उसी में रमे हुए लगते हैं.


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BSP creates history in Karnataka, wins first assembly seat in history

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