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तेज बहादुर शराबी, बदतमीज़ और आदतन अनुशासनहीन: BSF

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बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स के जवान तेज बहादुर यादव के प्रधानमंत्री के नाम जारी वीडियो के बाद BSF और सरकार में हडकंप मचा हुआ है. होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने होम सेक्रेटरी से इस मामले की डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी है. साथ ही ज़रूरी कारवाई करने का अनुरोध भी किया है. बीएसएफ ने बयान जारी किया है कि जवान तेज बहादुर का अनुशासनहीनता का लंबा इतिहास है.rajnath

अपने वीडियो में तेज बहादुर ने कहा था कि हमें ढंग से खाना नहीं मिलता है. हम ग्यारह घंटे तक खड़े रहते हैं लेकिन ज़रूरी न्यूट्रीशन हमें हासिल नहीं पाता. सेना जो खाना जवानों को दे रही है वो कतई खाने लायक नहीं होता. अधपकी रोटियां, पतली दाल, नाश्ते में जले परांठे, वो भी बिना किसी अचार या जैम के. कई बार तो उन्हें भूखे पेट भी सोना पड़ता है. उन्होंने आगे कहा था कि ना तो मीडिया और ना ही कोई मंत्री जवानों की सुध लेता है. वीडियो मिनटों में वायरल हो गया था. उसको लाखों व्यूज मिले. अब BSF कह रही है कि इस जवान के साथ हमेशा से समस्या रही है.

देखें वीडियो

बीएसएफ का कहना है कि तेज बहादुर को करियर के शुरूआती दिनों से ही काउंसलिंग की ज़रूरत पड़ती आई है. बिना इजाज़त ड्यूटी से गैरहाज़िर रहना, शराबखोरी, सीनियर अफसरों से बदतमीज़ी करना जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं BSF ने इस जवान पर.

BSF का कहना है कि इन्हीं वजहों से तेज-बहादुर की ज़्यादातर पोस्टिंग हेडक्वार्टर्स में होती रही है, जहां किसी डेडिकेटेड सीनियर अफसर की उनपर नज़र रह सके. सेना ने ये भी बताया कि अनुशासनहीनता की वजह से कई बार तेज बहादुर की नौकरी जाते जाते बची है. उन्होंने वीआरएस के लिए भी अर्जी दे रखी है. उन्हें सिर्फ दस दिन पहले उस लोकेशन पर भेजा गया था जहां कि वीडियो उन्होंने बनाई है. वो भी उनकी काउन्सलिंग के नतीजे देखने के लिए एक्सपेरिमेंटल बेसिस पर. उनके अलावा वहां 20 और जवान तैनात हैं जिनमे से किसी को भी कोई शिकायत नहीं है. 

जहां तक वीडियो की बात है BSF ने कहा है कि तेज बहादुर के इतिहास के बावजूद इसकी जांच की जाएगी. डीआईजी रैंक के एक अफसर लोकेशन पर पहुंच चुके हैं और मामले की छानबीन जारी है.bsf

एक टीवी चैनल से फोन पर बात करते हुए तेज़ बहादुर ने कहा कि उनपर लगे अनुशासनहीनता के आरोप निराधार हैं.  छोटी मोटी गलतियां सबसे होती है. उनका निपटारा BSF में ही हो जाता है. मेरे 16 अवॉर्ड का ज़िक्र नहीं किया.  जब उनसे पूछा गया कि खाने की क्वालिटी क्या हमेशा ऐसी होती है तो उन्होंने बोला, कुछ लोकेशन में ऐसा ही होता है. कुछ जगह हो सकता कि ठीक भी मिलता हो. मैंने तो खुद जो देखा वो बताया है. यादव ने ये भी बताया कि उनपर वीडियो हटा लेने का दबाव डाला जा रहा है.

गृह राज्यमंत्री किरण रिजुजी ने ट्वीट कर के कहा कि उन्होंने जवान के वीडियो को सीरियसली लिया है.  लेकिन उन्होंने जब-जब भी बॉर्डर पर विजिट की जवानों को हमेशा संतुष्ट पाया. kiran

अपने वीडियो में यादव ने कहा था कि भारत सरकार सब कुछ देती है लेकिन बीच में अधिकारी उसे बेच कर खा जाते हैं. ये कहां से होता है इसकी जांच होनी चाहिए. यादव ने ये आशंका भी जताई थी कि इस वीडियो को जारी करने के बाद उनके साथ कुछ बुरा हो सकता है. ‘अधिकारियों के बहुत बड़े हाथ हैं’ ये उनके शब्द थे.

उनकी इस आशंका की रोशनी में बीएसएफ के उनपर लगाए तमाम आरोप कितने सच्चे हैं ये सवाल तो उठेगा ही. जवान का इतिहास चाहे जो रहा हो लेकिन वीडियो में दिखाए गए खाने की क्वालिटी बेहद ख़राब थी ये तो तय है.

जवान का बिहेवियर अलग मुद्दा है और उसके द्वारा उठाए गए सवाल अलग. बात फिलहाल इस पर ही होनी चाहिए कि क्या उसके आरोप सही है? अगर हां तो इसका दोषी कौन है? इसकी जगह जवान को ही विलेन साबित करने की, ‘हैबिच्युअल ऑफेंडर’ साबित करने की कोशिशें कोई अच्छा सिग्नल तो नहीं ही देती. 

क्या बड़े हाथों वाले अधिकारियों की उंची पहुंच भारी पड़ेगी तेज बहादुर पर? क्या ‘समरथ को नहीं दोष गुसाईं’ का मिलिट्री वर्शन देखने को मिलने वाला है? क्या तंत्र फिर लील जाएगा किसी छोटी-मोटी आवाज़ को? सिस्टम के ख़िलाफ़ खड़े होने की हिम्मत दिखाने वाले में रातोरात खामियां कैसे निकल आती है? तेज बहादुर अगर इतने ही बुरे थे तो उनको आज तक निकाला क्यों नहीं गया? इस बात को देखना दिलचस्प रहेगा कि तेज बहादुर के आरोपों का संज्ञान लेकर भ्रष्ट अफसरों पर कारवाई होती है या खुद तेज बहादुर पर!


 

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