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कांग्रेस और सपा छोड़कर भाजपा में आए नेताओं ने मोदी के बारे में क्या कहा?

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भाजपा दोबारा लोकसभा चुनाव क्या जीतकर आयी, लोकसभा के साथ-साथ पार्टी ने राज्यसभा में भी बढ़त बना ली. ये बढ़त कैसे? नेताओं की आवाजाही से. भाजपा के धुर विरोधी अब अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में आने लगे हैं. और इनमें से अधिकतर या तो राज्यसभा सांसद हैं, या तो राज्यसभा जाने के इंतज़ार में.

इसमें नाम लीजिए संजय सिंह, संजय सेठ, अमिता सिंह और सुरेन्द्र नागर का. कांग्रेस और सपा से आए इन नेताओं ने कल भाजपा की सदस्यता ली. लखनऊ पार्टी मुख्यालय में. पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह की मौजूदगी में. और इस बात की तस्दीक हुई कि भाजपा का मिस्ड कॉल वाला सदस्यता अभियान अब फैलकर दिग्गज नेताओं तक चला गया है.

यूपी भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह
यूपी भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह

कल लखनऊ में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में जब प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह इन नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिला रहे थे, तो उनसे परिचय भी करवा रहे थे. हाल-फिलहाल राज्यसभा सांसद संजय सिंह और उनकी पत्नी अमिता सिंह ने कांग्रेस का साथ छोड़ा. कैसा परिचय? स्वतंत्र देव सिंह ने कहा,

“संजय सिंह की लोकप्रियता बस उत्तर प्रदेश में नहीं, बल्कि पूरे देश भर में है. उनकी लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है.”

संजय सिंह की पत्नी और पूर्व में भाजपा से जुड़ी रह चुकीं अमिता सिंह बीच में कांग्रेस में शामिल हो गयी थीं. अब फिर से भाजपा में हैं. उनके बारे में स्वतंत्र देव सिंह ने कहा,

“इनके भाजपा में आने से पार्टी मजबूत होगी और पार्टी की प्रतिष्ठा बढ़ेगी. भाजपा सरकार में मंत्री रह चुकीं डॉ. अमिता सिंह कुछ दिनों के लिए “इधर-उधर” हो गयी थीं, लेकिन अब वे भाजपा में वापिस आ गयी हैं.”

कहा जाता है भाजपा में हाल-फिलहाल चहलकदमी कर रहे विपक्षी नेताओं में सपा नेता और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर, कांग्रेस नेताद्वय संजय सिंह और अमिता सिंह, सपा नेता संजय सेठ और सुरेन्द्र सिंह नागर सबसे बड़े नाम हैं. संजय सिंह तो वो नेता ठहरे, जिन्होंने अमेठी में कांग्रेस को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निबाही थी.

अमीता सिंह और संजय सिंह
अमीता सिंह और संजय सिंह

सपा नेता संजय सेठ और सुरेन्द्र सिंह नागर के बारे में बात करते हुए स्वतंत्र देव सिंह ने कहा,

“ये लोग त्याग करके भाजपा में आए हैं. ये तपस्वी लोग हैं. संजय सेठ एक बड़े व्यापारी और कुशल नेता हैं. वहीं सुरेन्द्र नागर की गुर्जर समाज और नोएडा के इलाके में अच्छी लोकप्रियता है. जनता में इनकी अच्छी पकड़ है. ऐसे में इनके पार्टी में आने से भाजपा और मजबूत होगी.”

संजय सेठ ने कश्मीर मसले, धारा 370 पर केंद्र की तारीफ की. इन चार नेताओं के भाजपा में आधिकारिक तौर पर शामिल होने के बाद सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ली. खबरें हैं कि भाजपा की सदस्यता लेने के पहले इन चारों नेताओं ने मुख्यमंत्री आवास जाकर योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की.

सूत्रों के हवाले से खबरें आने लगी हैं कि राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देकर आए इन नेताओं को भाजपा फिर से राज्यसभा भेजेगी. लेकिन रविवार 18 अगस्त को बात करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि इन नेताओं को राज्यसभा भेजा जाएगा या नहीं, ये भाजपा का संसदीय बोर्ड तय करेगा.

संजय सिंह ने भी इस बारे में बात की. कहा कि वे किसी बहकावे या फुसलावे में भाजपा में नहीं आये हैं. जब पत्रकारों ने उनसे सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा,

“हम बिजनेस या ट्रेडिंग करके नहीं, प्रिंसिपल और विचारों के साथ पार्टी में आए हैं. हम लोग राजनैतिक लोग हैं. जो जनता चाहती है, वही करते हैं. आज जनता चाहती है कि सभी लोग भाजपा के साथ खड़े हों. मोदी ने देश के कोने-कोने तक योजनाओं को पहुंचाया है.”

लेकिन अगर राज्यसभा का समीकरण देखें तो भाजपा संख्या में अभी भी कमज़ोर है. कोई भी बिल राज्यसभा में वोटिंग के लिए जा रहा है तो भाजपा उन बिलों को फ्लोर मैनजेमेंट के ज़रिए पास करा लेने में सफल हो जा रही है. अगर संख्या का साथ मिलता है तो भाजपा को फ्लोर मैनेज करने के लिए मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. ऐसे में राज्यसभा सदस्यता छोड़कर आए नेता अगर फिर से भाजपा की ही ओर से संसद में नहीं पहुंचते हैं, तो सांसदों का नुकसान तो है ही, भाजपा को भी दिक्कत ही होगी.


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