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आपके 10 हज़ार रुपए महज़ पांच साल में एक करोड़ बन जाते, अगर यहां लगाए होते

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‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यूं मारा’, ‘इन्सेप्शन की एंडिंग क्या थी’, ‘मोदी जी आज रात को आठ बजे क्या घोषणा करेंगे’, ‘बिग बॉस में अगला एलिमिनेशन किसका होगा’, ‘बगदादी कब मरेगा’, ‘तीसरा विश्व युद्ध कब शुरू होगा’ और ऐसे ही न जाने कितने सवाल आए और गए हो गए. पर दो सवाल जिनको चिरायु और चिर-यौवन का वरदान प्राप्त है वो हैं–‘ईश्वर कहां हैं’ और ‘पैसा कहां इन्वेस्ट करें’?

ईश्वर तो फिर भी खोजने पर मिल जाता है (ऐसा बड़े बुज़ुर्ग कहते हैं) लेकिन कोई बढ़िया इन्वेस्टमेंट प्लान मिलना मुश्किल है. कारण एक है – भविष्य अनिश्चित है. ‘पैसे’ और ‘कैसे’ दोनों का ही.

लेकिन बड़े बुज़ुर्ग ये भी कह गए हैं, और कहते ही रहते हैं कि यदि भविष्य का पता न हो तो अतीत के ट्रेंड फ़ॉलो करो. और जब बड़े बुजुर्गों की बात लोग नहीं मानते तो ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’ जैसे ब्लंडर होते हैं. सूरज बड़जात्या तीन सुपर हिट के बाद जब सलमान को निकाल बाहर किए तो – ‘मैं प्रेम की दीवानी हूं’.

तो इसलिए ही मैं बेशक आपको ये तो नहीं बता पाऊंगा कि पैसे कैसे इन्वेस्ट करें, मगर आपकी सुविधा के लिए पास्ट-परफॉर्मेंस का एक तुलनात्मक अध्ययन पेश करता हूं (नोट: ये एक ‘लगभग’ कैलकुलेशन है और आप लोग इसे ‘घर पर कतई ट्राई न करें’)

7 दिसंबर 2012 यानि ठीक पांच साल पहले यदि आपने अपने दस हज़ार रुपए –

7)
क्रूड में लगाए होते – 5816 हो चुकते

6)
यूरो में लगाए होते – 9075 हो चुकते

5)
गोल्ड में लगाए होते – 9218 रुपए हो चुकते

4 (ब्रेक इवन पॉइंट)
घर में रखा होता – 10000 (अगर 500 और हज़ार के नोट होते तो – 0) हो चुकते

3)
डॉलर में लगाए होते – 10550 हो चुकते

2)
शेयर मार्किट (निफ्टी फिफ्टी) में लगाए होते – 17100 हो चुकते

1)
बिट-कॉइन में लगाए होते – 10500000 हो चुकते (जी हां, जैसे चेक में लिखते हैं वैसे ही अगर शब्दों में यहां पर लिखें तो – रुपए एक करोड़ पांच लाख मात्र.)

और, अब भी लोग कूद-कूद के बिट कॉइन में पैसे लगा रहे हैं. जितने पैसे लग रहे हैं उतना तेज़ी से ये आगे बढ़ रहा है. यानी यदि आप इस पोस्ट को लिखे जाने के एक दिन बाद पढ़ रहे हैं तो हो सकता है ये पोस्ट बहुत पुरानी हो चुकी है.

बहरहाल कुछ लोग ही जानते हैं कि ये बिट कॉइन क्या है? आइए हम-आप भी इन कुछ लोगों में शामिल होते हैं.

बिट कॉइन दरअसल ‘कुछ नहीं’ है. यानी कि इसका कोई स्थूल अस्तित्व नहीं है. ये कम्प्यूटरों, इंटरनेटों में ही घूमती है. और वहीं इसे खोद-खोद के निकाला जाता है, यानी माइनिंग के मार्फत.
(पन-फैक्ट: खोद-खोद के नहीं कोड-कोड के निकाली जाती है बिट कॉइन.)

बहरहाल, बिट कॉइन की शुरुआत ‘सतोषी अकीमोतो’ ने की थी. ये सतोषी अकीमोतो कौन हैं ठीक-ठीक कोई नहीं जानता, मगर 2010 में उन्होंने बिट कॉइन की शुरुआत ये दिखाने के लिए की थी कि बिना पारंपरिक करेंसी के भी लेन देन किया जा सकता है. इस डी सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम को बनाने का उद्देश्य आपके पैसे पर सरकारी दखल को रोकना था. मतलब आपके बैंक में जमा पैसे को सरकार किसी और को लोन न दे पाए और वो इसे लेकर भाग न जाए इसकी पूरी गारंटी.

यानी इस हिसाब से बिट-कॉइन एक आर्थिक क्रांति का झंडा, मशाल या मैस्कॉट कहा जा सकता है.

बिट-कॉइन के प्राइस बढ़ते ही जा रहे हैं. (साभार: बिट-कॉइन चार्ट्स)
बिट-कॉइन के प्राइस बढ़ते ही जा रहे हैं. (साभार: बिट-कॉइन चार्ट्स)

और ज़्यादा जानकारी चाहिए तो हमारी लगभग एक साल पुरानी इस पोस्ट को भी पढ़ सकते हो. और अगर तब इसको पढ़ कर इन्वेस्ट कर दिया होता तो भी आपके दस हज़ार रुपए आज 155,500 (रुपए एक लाख पचपन हजार पांच सौ मात्र) तो हो ही चुकते.

होने को निजी तौर पर मैं इन्वेस्टमेंट के मामले में ज़रा कम एडवेंचरस हूं और आपको भी यही राय दूंगा कि पैसे सोच समझकर ही इन्वेस्ट करें और अपना पोर्टफोलियो डाईवर्सीफाई रखें. डाईवर्सीफाई बोले तो दस रुपए निफ्टी में दस वायदा कारोबार में और दस किचन में पड़े हुए चावल के डिब्बे में.


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