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कोई कंपनी कैरीबैग के 3, 10, 13 रुपए मांगे तो ये खबर पढ़वा देना

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शॉपिंग के लिए जाते समय अक्सर लोग अपने साथ बैग नहीं ले जाते. चाहे मॉल हो या कोई शॉप. हालांकि ये भी है कि आप हर जगह बैग लेकर चल भी नहीं सकते. शॉपिंग के बाद आपको ख्याल आता है कि बैग तो लाया नहीं. इसके बाद दुकानदार पूछता है सर बैग चाहिए. आप सोचते हैं सामान तो ले ही जाना है, बैग तो लेना ही पड़ेगा. दुकानदार कहता है कि बैग के अलग से पैसे देने होंगे. आप पैसे देते हैं और समान भर कर चल देते हैं. आप कभी सोचते हैं कि बैग के अलग से पैसे क्यों देने पड़े. दिल्ली-एनसीआर में कैरी बैग के दुकानवाले 5 से 15 रुपए तक लेते हैं. कई बार कंपनी उन बैग के जरिए अपने ब्रांड का प्रचार कर रही होती हैं. आप सोचें या न सोचें कि आपसे कैरीबैग के पैसे क्यों लिए जाते हैं. चंडीगढ़ के एक बंदे ने सोचा. उसे बुरा लगा और वह कंज्यूमर कोर्ट पहुंच गया. कोर्ट ने उसकी सुनी और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया.

मामला क्या है
दिनेश प्रसाद रतूड़ी ने 5 फरवरी को चंडीगढ़ के सेक्टर 22D में बाटा स्टोर से जूता खरीदा. स्टोर ने उन्हें 402 रुपए का बिल थमा दिया. इस बिल में पेपर कैरी बैग के 3 रुपए का बिल भी शामिल था. पेपर बैग पर बाटा अपने ब्रांड का प्रचार कर रहा था. अब ये बात दिनेश प्रताप को अच्छी नहीं लगी. उन्होंने अपने तीन रुपए वापस मांगे. लेकिन स्टोर से 3 रुपए वापस देने से इनकार कर दिया. फिर क्या था. दिनेश कंज्यूमर फोरम चले गए.

कंज्यूमर फोरम में क्या हुआ
दिनेश ने 8 फरवरी को कंप्लेन फाइल की. उन्होंने कहा कि उनसे बाटा इंडिया ने कैरी बैग के तीन रुपए अलग से ले लिए. जबकि इस बैग के माध्यम से बाटा अपने ब्रांड का प्रचार कर रही है. यानी बैग पर ब्रांड का विज्ञापन है. बाटा इंडिया ने दलील दी कि पर्यावरण बचाने के लिए हम पेपर से बने बैग अपने ग्राहकों को देते हैं.

फोरम ने क्या कहा
चंडीगढ़ कंज्यूमर फोरम ने कहा कि बाटा इंडिया अगर खुद को पर्यावरण एक्टविस्ट समझ रहा है तो ये बैग उसे अपने ग्राहकों को फ्री में देना चाहिए. फोरम ने कहा कि अब से स्टोर से समान खरीदने वालों को फ्री में बैग मुहैया कराएं. फोरम ने ये भी कहा कि गलत तरीके से लिए गए तीन रुपए ग्राहक को लौटाए जाएं. मुआवजा के तौर पर ग्राहक को तीन हजार रुपए दिए जाएं. फोरम ने ये भी कहा कि कानूनी लड़ाई लड़ने में खर्च हुए एक हजार दिनेश को दिए जाएं. फोरम ने बाटा इंडिया को 5000 रुपए उपभोक्ता कानूनी सहायता खाता में जमा कराने को कहा है.

क्या कहना है दिनेश प्रसाद का
दिनेश प्रसाद का कहना है कि ग्राहकों को कैरी बैग मुहैया कराना स्टोर की जिम्मेदारी है. लेकिन मुझे बैग लेने के लिए मजबूर किया गया. मैंने 399 रुपए के जूते खरीदे थे, लेकिन कैशियर ने कैरी बैग के साथ मुझे 402 रुपए का बिल थमा दिया जबकि मैं कैरी बैग लेना नहीं चाहता था. ग्राहकों के पैसे पर बाटा अपने ब्रांड का प्राचर कह रहा था और ये बात मुझे अच्छी नहीं लगी.

कंज्यूमर फोरम के इस फैसले से उन लाखों लोगों को भी फायदा मिलेगा जिन्हें बैग के अलग से पैसे देने पड़ते हैं. साथ ही उन कंपनियों को भी सीख मिलेगी कि जो ग्राहकों के पैसे से बैग पर अपने ब्रांड का प्रचार करती हैं.


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