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बांग्लादेश चुनाव में शेख हसीना ने ऐसी जीत दर्ज की कि यकीन नहीं होता!

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बांग्लादेश में रविवार को हुए आम चुनावों में प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने जोरदार जीत दर्ज की है. 298 में से 288 सीटें जीत जीतकर आवामी लीग बांग्लादेश की पहली ऐसी पार्टी बन गई है, जो लगातार 3 बार चुनाव जीती है. शेख हसीना चौथी बार प्रधानमंत्री बनने को तैयार है. प्रमुख विपक्षी दल बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी सिर्फ 7 सीटें जीत सकी है. सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 151 सीटें चाहिए.

बांग्लादेश आम चुनाव के लिए पहली बार ईवीएम का इस्तेमाल किया गया. बांग्लादेश चुनाव आयोग के मुताबिक 300 संसदीय सीटों में से 299 सीटों पर चुनाव हुए हैं. एक उम्मीदवार के निधन के कारण एक सीट पर चुनाव नहीं हुआ. 299 सीटों में से केवल 6 सीटों पर ईवीएम का इस्तेमाल किया गया.

Presiding officers count votes at a voting center after the session has ended in Dhaka
ढाका, बांग्लादेश में मतदान केंद्र पर वोटों की गिनती करते हुए अधिकारी

गोपालगंज सीट से शेख हसीना को 2,29,539 वोट मिले, जबकि विपक्षी दल बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार को सिर्फ 123 वोट मिले. विपक्षी दलों ने चुनावी नतीजों का बहिष्कार किया है और फिर से चुनाव कराने की मांग की है. 2014 आम चुनावों में भी विपक्षी दलों ने चुनावों का बहिष्कार किया था. बांग्लादेश चुनाव आयोग के मुताबिक चुनाव में 1848 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया. चुनाव के दौरान हिंसा में 18 लोगों की मौत हो गई और करीब 200 लोग घायल हो गए.

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद हैं. जिया ने आम चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था लेकिन हाईकोर्ट ने जिया का नामांकन खारिज़ कर दिया और जिया चुनाव न लड़ सकीं. बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी शेख हसीना (71) और पूर्व सैन्य तानाशाह जिया उर्रहमान की पत्नी खालिदा जिया (73) 1980 के दशक से बांग्लादेश की राजनीति की दो केंद्र बनी हुई हैं.

बांग्लादेशी संसद को जानिए

बांग्लादेश की संसद को जातीय संसद (Jatiya Sangsad) कहते हैं. इसमें कुल 350 सीटें हैं. 300 सीटें के लिए जनता वोट करती है और 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, जिसे सरकार बनाने वाली पार्टी चुनती हैं. बांग्लादेश की जनता 5 सालों के लिए सरकार चुनती है.

शेख हसीना एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने को तैयार हैं.
शेख हसीना एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने को तैयार हैं.

भारत और बांग्लादेश

आम चुनाव 2018 में भारत विरोधी रुख नहीं देखा गया है. इससे पहले भारत पर बांग्लादेश की राजनीति में दखल देने के आरोप लगते रहे हैं. भारत और बांग्लादेश करीब 4,100 किलोमीटर का बॉर्डर शेयर करते हैं. भारत की ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी में बांग्लादेश प्रमुख देश है. पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश में भारत का निवेश भी बढ़ा है. तीस्ता नदी को लेकर भी दोनों देशों में बात आगे बढ़ी है.

भारत ने बांग्लादेश चुनावों के दौरान कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि यह चुनावी मुद्दा बन सकता था. शेख हसीना की आवामी लीग पार्टी को भारतीय समर्थक के तौर पर देखा जाता है जबकि विरोधी खालिदा जिया की पार्टी को इस्‍लामिक चरमपंथियों को बढ़ावा देने वाला माना जाता है, जिससे भारतीय हितों को नुकसान पहुंचता है. हालांकि पिछले कुछ साल से बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी ने पुराना रुख छोड़कर भारत को सहयोगी के तौर पर देखना शुरू कर दिया है.


वीडियो: बांग्लादेश की पूरी पॉलिटिक्स दो औरतों के झगड़े की कहानी है

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Bangladesh Elections 2018: Landslide victory for sheikh hasina for third term as prime minister

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