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आमने-सामने थे मुफ्ती-अब्दुल्ला, BJP को कश्मीर में लाने पर लड़ पड़े!

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उमर अब्दुल्ला. महबूबा मुफ़्ती. दोनों जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री. आर्टिकल 370 पर फैसला लेने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांट देने के बाद दोनों को फिलहाल प्रिवेंटिव कस्टडी में रखा गया है. हिरासत में दोनों को एक ही जगह रखा गया. लोकेशन- श्रीनगर का हरि निवास महल. 12 अगस्त को दोनों के बीच बाता-बाती की खबर आई. इन ख़बरों के मुताबिक, दोनों के बीच बहस इतनी तीखी हो गई कि उन्हें एक-दूसरे से अलग करना पड़ा. फिर उन्हें अलग-अलग जगहों पर शिफ्ट करना पड़ा.

दोनों के बीच बहस की वजह थी बीजेपी?
इकॉनमिक टाइम्स में एम सलीम पंडित की बायलाइन से छपी खबर में ये जानकारी दी गई है. इसके मुताबिक, उमर और महबूबा दोनों एक-दूसरे पर बीजेपी को जम्मू-कश्मीर में लाने का आरोप लगा रहे थे. ToI ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि उमर और महबूबा में इतनी तीखी बहस हुई कि उन्हें एक ही जगह रखना मुमकिन नहीं था. ToI की रिपोर्ट के मुताबिक, हॉस्पिटेलिटी और प्रोटोकॉल डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया-

दोनों एक-दूसरे पर बीजेपी को जम्मू-कश्मीर में लाने का आरोप लगा रहे थे. उमर चिल्लाए महबूबा पर. उन्हें ताना दिया. फिर उन्होंने मुफ़्ती मुहम्मद सईद के लिए भी बोला.

अधिकारियों का कहना है कि महबूबा ने भी उन्हें जबाव दिया. दोनों के झगड़े की आवाज़ें वहां ड्यूटी कर रहे स्टाफ ने भी सुनी. इसके बाद ही दोनों को अलग-अलग कर दिया गया. उमर अभी भी हरि निवास महल में हैं. जबकि महबूबा को चश्मेशाही में शिफ्ट कर दिया गया है. यहां वन विभाग का एक कॉटेज है. वहीं ठहराई गई हैं वो. उमर के पिता फार्रुख अब्दुल्ला भी हिरासत में हैं. मगर उन्हें श्रीनगर के उनके ही घर में नज़रबंद रखा गया है.

दोनों ही पार्टियां बीजेपी की सहयोगी रह चुकी हैं
उमर की नैशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और महबूबा की पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) दोनों ही बीजेपी की सहयोगी रह चुकी हैं. अलग-अलग समय पर. NC तो NDA का भी हिस्सा रही है. 2015 में जब जम्मू-कश्मीर में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, तो खबरें आईं कि BJP और NC दोबारा हाथ मिला सकते हैं. मगर फिर NC ने कहा कि वो किसी हाल में NDA के साथ नहीं जाएगी. इसके बाद PDP के साथ मिलकर BJP ने गठबंधन सरकार बनाई. जून 2018 में ये गठबंधन टूट गया. इसके बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाया गया.

प्रशासन ने उमर और महबूबा की जानकारी देने से इनकार कर दिया था
इससे पहले 12 अगस्त को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इसमें सरकार के प्रवक्ता रोहित कंसल, सूचना सचिव एम के द्विवेदी और श्रीनगर के डेप्युटी कमिश्नर सैयद आबिद राशिद मीडिया से बात कर रहे थे. उमर और महबूबा दोनों को कहां रखा गया है, ये सवाल भी किया गया. मगर अधिकारियों ने ये बताने से इनकार कर दिया था. इनसे ये भी पूछा गया कि किस कानून के अंतर्गत दोनों नेताओं को हिरासत में रखा गया है. इस सवाल का भी जवाब नहीं दिया गया था.

NC की पॉलिटिक्स क्या रही?
PDP और NC, दोनों की पॉलिटिक्स अलग रही है. NC भारत के साथ बने रहने का समर्थन करती है. भारत समर्थक पार्टी मानी जाती है. मगर भारत के साथ बने रहने के अलावा उनकी पॉलिटिक्स जम्मू-कश्मीर के लिए ज्यादा अटॉनमी की भी बात करती है.

PDP की पॉलिटिक्स क्या रही?
दूसरी तरफ PDP बनाने से पहले इसके मुखिया मुफ़्ती मुहम्मद सईद ने नैशनल पार्टियों के साथ काम किया. केंद्र में गृहमंत्री भी रहे. फिर जुलाई 1999 में उन्होंने अपनी पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) बनाई. उनके बारे में कहा गया कि उन्हें अलगाववादियों और मिलिटेंट्स का सपोर्ट है. PDP के बनने के बाद 1999 में चुनाव के टाइम उमर ने एक बयान दिया था. कि मुफ़्ती और उनकी बेटी महबूबा, दोनों मिलिटेंट्स को हीरो बनाते आए हैं. उनके घरों पर जाते हैं मिलने. उनके परिवारों में पैसे बांटते हैं. तब उमर ने मुफ़्ती पर आरोप भी लगाया था. कि उन्होंने हुर्रियत और जमात के साथ लिंक बना लिए हैं और उनकी ही मदद से वो अनंतनाग की लोकसभा सीट निकाल पाए. महबूबा की पॉलिटिक्स स्टाइल में मिलिटेंट्स के परिवारों से मिलना, उनसे सहानुभूति जताना शामिल रहा है. खासतौर पर मिलिटेंट्स परिवार की महिलाओं से. इसीलिए जब बीजेपी ने PDP के साथ गठबंधन सरकार बनाई, तो कई हलकों में इसे दोनों पार्टियों की मौकापरस्ती कहा गया.


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