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जम्मू-कश्मीर के मामले में आत्माओं का भी प्रवेश हो गया है

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जम्मू-कश्मीर के मुद्दे में अब नए एंगल सामने आ गए हैं. आर्टिकल 370 में प्रावधान संशोधित किया गया है. अब भारत का कानून पूरी तरह से जम्मू-कश्मीर में लागू होगा. और अब राज्य का विभाजन हो चुका है. जम्मू-कश्मीर अलग राज्य है और लद्दाख एक अलग राज्य है.

लेकिन जब ये बिल राज्यसभा में पेश किया गया तो बिल पर अच्छी-ख़ासी बहस हुई. पार्टियों ने अपने हिसाब से अपने वोट तय किये और ये साफ़ किया कि वे बिल के विरोध में हैं या समर्थन में. इसमें जद(यू) का नाम आता है. जद(यू) ने सदन में बिल का विरोध किया और कहा कि वे सरकार के इस फैसले के विरोध में बिल पर वोटिंग नहीं करेंगे.

अब विरोध कर दिया. इसके बाद जद (यू) के संगठन महासचिव आरसीपी सिंह पार्टी का बचाव करने उतरे. कैसा बचाव? बिहार में एनडीए में जद(यू) शामिल है. और राज्य के बंटवारे के बिल पर जद(यू) के विरोध पर सवाल उठने लगे हैं.

आरसीपी सिंह ने कहा,

“स्वर्गीय जॉर्ज फर्नांडिस की आत्मा को ठेस न पहुंचे, इसलिए जेडीयू ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का विरोध किया था.”

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जॉर्ज फर्नांडिस

आरसीपी सिंह ने आगे कहा,

“हमारी पार्टी के नेता जॉर्ज फर्नांडिस ने ये निर्णय लिया था कि वे विवादित मसलों पर भाजपा का समर्थन नहीं करेंगे. आर्टिकल 370 से हमारा भावनात्मक जुड़ाव है, और हमने विरोध इसलिए किया क्योंकि इससे जॉर्ज फर्नांडिस की आत्मा को चोट पहुंचती.”

हालांकि आरसीपी सिंह ने यह भी कहा कि बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन में कोई दिक्कत नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वे उसका विरोध कर रहे थे. लेकिन अब ये कानून बन चुका है और लागू हो चुका है. तो अब सभी को इसे स्वीकार करना चाहिए. वे अब इस पर केंद्र सरकार के साथ हैं.

लेकिन यहीं बात आती है जॉर्ज फर्नांडिस की. वो जॉर्ज फर्नांडिस जिनकी आत्मा की बातें हो रही हैं, उनकी आत्मा को ठेस लगने की बातें हो रही हैं.

जॉर्ज की वो तस्वीर जो प्रतिरोध का प्रतीक बन गई
जॉर्ज की वो तस्वीर जो प्रतिरोध का प्रतीक बन गई

वही जॉर्ज फर्नांडिस जो नास्तिक थे. वही जॉर्ज फर्नांडिस जिनका आत्मा-परमात्मा की अवधारणाओं में कोई भरोसा नहीं था. जिसने जैसी भी राजनीति की, उसमें आत्मा को ठेस लगने देने जैसा न कोई स्वर था, न टेक.

और जॉर्ज फर्नांडिस के बारे में ये बात कौन करता है? जेडीयू? जेडीयू को याद होना चाहिए 2009 का लोकसभा चुनाव. जब जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर से चुनाव लड़ना चाह रहे थे. वही लोकसभा सीट, जहां से पांच बार वे लोकसभा का चुनाव जीत चुके थे.

लेकिन उनकी मंशा पर शरद यादव पानी फेर रहे थे. बहाना बताया जा रहा था कि जॉर्ज फर्नांडिस की उम्र हो गयी है और अब उन्हें कुछ याद नहीं रहता है. उन्हें कहा गया कि वे चुनाव न लड़ें. लेकिन कहा जाता है कि इसके पीछे जॉर्ज फर्नांडिस और नीतिश कुमार के बीच का तनाव था, जिस वजह से जेडीयू उन्हें चुनाव लड़ने नहीं देना चाह रही थी. जॉर्ज फर्नांडिस से ये वादा कहा गया कि उन्हें राज्यसभा में भेजा जाएगा.

नीतिश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस
नीतिश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस

शायद जॉर्ज फर्नांडिस को ये पसंद नहीं आया. उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर अपना पर्चा भर दिया. और नीतिश कुमार ये पर्चा भरना ही नहीं पसंद आया. और आखिर में नीतिश कुमार ने जॉर्ज फर्नांडिस को पार्टी से ही निकाल दिया था. नीतिश कुमार ने कहा था,

“जेडीयू का जॉर्ज फर्नांडिस के साथ अब कोई संबंध नहीं है.”

और ये वही जेडीयू है जो कह रही है कि वह जॉर्ज फर्नांडिस की आत्मा को ठेस नहीं पहुंचने देना चाहती है.


लल्लनटॉप वीडियो : आर्टिकल 370: जब संविधान में इसे लागू किया गया, तब कहां थे पंडित नेहरू?

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