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नोटबंदी के वक्त चिल्ड्रेन बैंक वाले नोटों का जो इस्तेमाल हुआ वो चौंकाने वाला है

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बचपन में व्यापार गेम खेला होगा आपने. उसमें सबसे सही चीज थी उसके नोट. 500 के, 1000 के…उन पर लिखा तो चिल्ड्रेन बैंक ऑफ इंडिया होता था. मगर उससे अपने को क्या. अपन को तो एकदम रहीसों वाली फीलिंग आने लग जाती थी. उन नोटों से हम शिप, हवाईजहाज क्या पूरे के पूरे शहर खरीद डालते थे. मगर किसी ने नहीं सोचा होगा कि इन नोटों का कोई ऐसा इस्तेमाल भी कर सकता है. कैसा? यही सोच रहे हैं ना आप. दरअसल मुंबई में एक रैकेट का खुलासा हुआ है. जो नकली नोट छापने का काम करता था. नकली नोटों के साथ ही ये रैकेट चिल्ड्रेन बैंक लिखे नोट भी छापता था. उनका भी रंग-रूप किसी एकदम करारे नए वाले 2000 के नोट जैसा. रैकेट के पास जब्त 50 लाख रुपये के नोटों में से 32 लाख तो यही मनोरंजन बैंक वाले थे. अब जानने वाली और मजेदार बात ये है कि ये रैकेट आखिर इन नोटों का क्या इस्तेमाल कर रहा था?

नोटबंदी के बाद पुरानी करेंसी तो खत्म हुई, मगर फिर से फेक करेंसी भी आने लगी.
नोटबंदी के बाद पुरानी करेंसी तो खत्म हुई, मगर फिर से फेक करेंसी भी आने लगी.

रैकेट का खुलासा इंडियन कस्टम की इंटेलिजेंस विंग डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने किया है. ओपन मैगजीन की रिपोर्ट के मुताबिक, रैकेट का सरगना है रेहान खान. कभी रुमाल बेचता था, फिर प्रॉपर्टी बेचता था, फिलहाल देश बेच रहा था(नकली नोटों के धंधे में लिप्तता इसका प्रमाण है). इनके पास नकली नोट की खेप बांग्लादेश से छप के वेस्ट बंगाल के इस्लामपुर और माल्दा के रास्ते आ रही थी. यहां से ये पैसा पूरे देश में पहुंच रहा था. नोटों की छपाई भी एकदम ऐसी कि एकबारगी में कोई पकड़ ही नहीं सकता. नई करेंसी में करीब 31 सिक्योरिटी फीचर्स बताए जाते हैं, जिनमें से 25 इन लोगों ने कॉपी कर लिए थे. टीम से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक इससे पहले पकड़ गए नकली नोटों में ज्यादा से ज्यादा 17 फीचर कॉपी मिले थे.

अब बात 32 लाख रुपये के चिल्ड्रेन बैंक के नोटों की. माने जितने के नकली नोट नहीं, उससे ज्यादा के ये नोट क्यों? दरअसल इसके लिए आपको 11 महीने पीछे जाना पड़ेगा. 8 नवंबर याद है ना. मित्रों…………..नोटबंदी की तारीख. पीएम नरेंद्र मोदी का अचानक से टीवी पर आना और कइयों की टीवी फ्यूज कर जाना. इसका कनेक्शन यहीं से है. चिल्ड्रेन बैंक के नोटों का इस्तेमाल उसी वक्त किया गया था. आप लोगों ने सुना ही होगा कि लोग लाखों-करोड़ों के पुरानी करेंसी वाले नोट बदलवाने के लिए भटक रहे थे. इन्हीं भटके हुए लोगों को सहारा दिया था इस रैकेट ने. नोट बदलवाने वालों में ये भी थे. पर इसमें इन लोगों ने लंबा खेल कर दिया. इसकी कहानी भी दिलचस्प है.

रैकेट के पास से 32 लाख के चिल्ड्रेन बैंक वाले नोट मिले हैं.
रैकेट के पास से 32 लाख के चिल्ड्रेन बैंक वाले नोट मिले हैं.

कैसे थमा दिए ये नोट
ये लोग नोट बदलने के लिए अपने अपार्टमेंट में एक से एक बड़े धन्ना सेठों को बुलाते थे. वही 11% वाला हिसाब-किताब था. मान ल्यो 1 करोड़ बदलने हों तो 89 लाख की नई करेंसी ले ल्यो. 11 लाख कमीशन. फिर बाकायदा नोट बदलते थे. बदले में जो नोट देते थे वो एकदम बढ़िया से प्लास्टिक के लिफाफों में पैक करके देते थे. जब तक लोग लिफाफे खोलके नोट गिनने को सोंचते. ऐसा माहौल बना दिया जाता कि रेड पड़ने वाली है. पुलिस आ गई. भागो. अफरातफरी में सब भाग निकलते. घर में जाकर जब नोट चेक करने की बारी आती तो निकलते ये चिल्ड्रेन बैंक वाले नोट. अब खेल ल्यो व्यापार. जिनका इस तरह चूना लगा उसमें कई राजनेता, बिजनेसमैन वगैरह थे. मगर वो जाएं तो जाएं कहां. मामला चोर के घर चोरी का था. फिर चोर चोर मौसेरे भाई. मामला छिप गया. अब जाकर खुला है.

8 नवंबर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी.
8 नवंबर 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी.

ये तो पुरानी बात हो गई. मगर नकली नोटों का धंधा एक बार से फलना-फूलना चिंताजनक है. मोदी जी की सारी मुहिम पर पानी फेरने वाला. सारा रायता ही इन्हीं नकली नोटों को खत्म करने के लिए फैलाया गया था. मगर ये तो फिर तेजी से फैल रहे हैं. ये रैकेट इसी बात का सुबूत है. फिर चिल्ड्रेन बैंक के नोटों का भी ऐसा इस्तेमाल पहली बार देखा गया होगा. ओपन की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले ये मनोरंजन बैंक वाले नोट असली बैंकों से भी निकल चुके हैं. 6 फरवरी को दिल्ली में ही संगम विहार के स्टेट बैंक से 4 दो हजार के नोट निकले थे. उन पर यही चिल्ड्रेन बैंक लिखा हुआ था. बाद में तहकीकात में पता चला था कि नोट डालने वाली कंपनी के एक सदस्य ने इसमें से कुछ नोट बदलकर ये नोट उसमें डाल दिए थे. ऐसे और भी कई मामले मिल चके हैं.

एटीएम की लाइनें तो कौन भूल सकता है.
एटीएम की लाइनें तो कौन भूल सकता है.

एटीएम क्यों नहीं पकड़ पा रहे नकली नोट?
अब आप सोच रहे होंगे कि एटीएम में ये नोट पहुंच भी गए तो मशीन को इन नकली नोटों को पकड़ लेना चाहिए था. मगर पकड़ेंगी तब ना जब मशीन नए जमाने वाली होगी. देखो अपने देश में ज्यादातर दो तरीके की एटीएम मशीनें हैं. एक डिस्पेंसर और दूसरी रिसाइक्लर. डिस्पेंसर मशीनें सिर्फ पैसा देती हैं. रिसाइक्लर पैसा देने के साथ ही जमा भी कर लेती है. इसके साथ ही रिसाइक्लर में एक आइडेंटिफिकेशन मशीन होती है जो नकली नोटों को पहचान लेती है. अब समस्या ये है कि ऐसी सिर्फ 5% मशीनें हैं देश में. 95% डिस्पेंसर मशीनें हैं. तो नकली नोट एटीएम पकड़े तो पकड़े कैसे. अब एक्कै बात अाखिर में कहेंगे भइया- रिजर्व बैंक वालों देश बाद में सुरक्षित होगा, पहले एटीएम मशीनें बदलो.


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