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मुंबई आतंकी हमले के शहीद हेमंत करकरे की बेटी ने उन पर क़िताब लिखी है

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मुंबई पुलिस अधिकारी रहे हेमंत करकरे. अब शहीद हेमंत करकरे. 26 नवंबर, 2011 को मुंबई आतंकी हमले में शहीद हो गए थे. 11 साल तक करकरे के नाम पर तमाम तरह की बातें होती रहीं. अब 11 साल बाद हेमंत करकरे फिर से चर्चा में हैं.

# क्यों ?

उनकी बेटी जुई करकरे वापस मुंबई आ रही हैं. वापस क्यों? क्योंकि जुई कई सालों से अमेरिका में अपने पति और बच्चों के साथ रहती थीं. अब 11 साल बाद जुई ने अपने शहीद पिता हेमंत करकरे पर एक क़िताब लिखी है. क़िताब का नाम है Hemant Karkare — A Daughter’s Memoir.

2019 लोकसभा चुनाव में भोपाल से भाजपा प्रत्याशी और अब सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने करकरे पर विवादास्पद बयान दिया था. तब करकरे की बेटी जुई करकरे ने कहा था कि उनके शहीद पिता पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.

अब जुई ने ये क़िताब लिखकर अपने पिता हेमंत करकरे के बारे में लोगों को सबकुछ बताने का फ़ैसला किया है. जुई ने भारत आने से पहले मीडिया से बातचीत में कहा कि जिस आदमी ने देश और अपनी वर्दी के लिए अपना जीवन दे दिया, उसके बारे में कोई झूठ लोगों के बीच नहीं होना चाहिए. और ये तभी होगा जब ये क़िताब लोगों के बीच जाएगी.

# 11 साल बाद क्यों?

क़िताब तो तब भी लिखी जा सकती थी लेकिन तब जुई करकरे के पास क़िताब लिखने के लिए मैटेरियल नहीं था ज़्यादा. जुई ने बोस्टन में अपने पिता की डायरियां और चिट्ठियां इकट्ठी की और पढ़ीं. जुई के लिए ये सब इकठ्ठा करना और उसे पढ़ना फिर उस पर क़िताब लिखना कोई आसान काम नहीं था. जुई ने शहीद हेमंत करकरे की जिंदगी के उन पहलुओं को भी क़िताब में उकेरा है जिसपर अभी तक बात नहीं हुई है.

जैसे कम ही लोगों को पता है कि हेमंत करकरे को कविताएं लिखना बहुत पसंद था. यहां तक कि वो जुई की मां को भी ‘कविता’ कहकर बुलाते थे.

अब देखना ये है कि जुई इस क़िताब में हेमंत करकरे को कितना समझ और समझा पाती हैं. क़िताब इसी महीने के आखिर में लॉन्च होगी.


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