विमान हादसे में मारे गए येवगेनी प्रिगोझिन की कहानी, जिन पर कभी आंख बंद कर भरोसा करते थे पुतिन
पुतिन के सबसे ख़ास आदमी ने रूसी सेना के ख़िलाफ़ बग़ावत क्यों की थी? यूक्रेन युद्ध के दौरान कैसे आई रिश्तों में खटास?

तारीख़ 10 जून 2023. रूस की डिफ़ेंस मिनिस्ट्री ने यूक्रेन में लड़ रहे ‘वॉलंटियर ग्रुप्स’ के लिए एक निर्देश जारी किया. इसके मुताबिक, वॉलंटियर फ़ोर्सेस में शामिल लड़ाकों को डिफ़ेंस मिनिस्ट्री के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन करना होगा. इससे उनके साथ तालमेल बिठाने में आसानी होगी. और लड़ाकों को उनका हक़ भी मिल सकेगा.
ये दावा डिफ़ेंस मिनिस्ट्री का था. मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 12 जून को रमज़ान कादिरोव की अखमत मिलिटरी यूनिट ने कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तख़त कर दिया. रमज़ान कादिरोव चेचेन्या के सुप्रीम लीडर हैं. खैर, कादिरोव ने भले ही कॉन्ट्रैक्ट कर लिया हो, लेकिन यूक्रेन में लड़ रहे येवगेनी प्रिगोझिन ने दावे पर ऐतबार करने से मना कर दिया. बोले, हम कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करेंगे. शोइगु को जंग के बारे में कुछ भी पता नहीं है.
सर्गेई शोइगु रूस के डिफ़ेंस मिनिस्टर हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध में वो अपनी सेना के सबसे अहम लीडर हैं. इसके बावजूद प्रिगोझिन ने सीधे-सीधे उनको ललकारा है. वैसे ये पहली बार नहीं है, जब प्रिगोझिन ने शोइगु की आलोचना की हो. पिछले कुछ समय में हथियारों की सप्लाई को लेकर दोनों के बीच कई बार झगड़ा हो चुका है. तब प्रिगोझिन ने चेतावनी भी जारी की थी. कहा था, अगर समय पर हथियार नहीं मिला तो हम पीछे हट जाएंगे.
हालांकि, बाद में उसके ग्रुप को पर्याप्त हथियार भेजे भी गए. जिसके दम पर उसकी प्राइवेट आर्मी ने यूक्रेन के बखमुत को जीतने का दावा किया. इस प्राइवेट आर्मी का नाम है, वेगनर ग्रुप. जो बरसों तक पुतिन की सीक्रेट आर्मी के तौर पर अफ़्रीका और साउथ अमेरिका के देशों में काम करती रही. उनके ऊपर मानवाधिकार उल्लंघन, जनरसंहार और संसाधनों की लूट के संगीन आरोप लगे. मगर यूक्रेन युद्ध से पहले तक रूस किसी भी तरह का कनेक्शन होने से इनकार करता रहा.

प्रिगोझिन की पैदाइश 1962 की है. सेंट पीटर्सबर्ग शहर में. तब सोवियत संघ का प्रभुत्व और कोल्ड वॉर, दोनों चरम पर थे. लेकिन जैसे-जैसे प्रिगोझिन बड़ा हुआ, सोवियत संघ की चमक फीकी पड़ती गई. ग़रीबी, महंगाई और बेरोज़गारी चरम पर थी. इसके चलते अपराध बढ़ा. प्रिगोझिन को भी उसी में अवसर नज़र आया. 1979 में वो पहली बार पकड़ा गया. ढाई बरस की सज़ा हुई. लेकिन वो पहले ही छूट गया. 1981 में उस पर चोरी और डकैती का इल्ज़ाम लगा. इस बार 13 बरस की सज़ा सुनाई गई. इसमें से 09 बरस जेल में गुजरे.
जब वो छूटकर बाहर आया, सोवियत संघ के पतन की पटकथा लिखी जा चुकी थी. 1990 के दशक के रूस में हर तरफ़ अराजकता थी. आगे क्या होगा, इसके बारे में कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता था. उस दौर में प्रिगोझिन ने हॉट डॉग का स्टॉल लगाया. बिजनेस चल निकला. जल्दी ही पूरे सेंट पीटर्सबर्ग में उसके स्टॉल्स दिखने लगे थे. फायदा हुआ तो उसने रेस्तरां की चेन शुरू की. इनमें से एक था, न्यू आईलैंड.
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एक बार पुतिन यहां आए. उन्हें रेस्तरां ख़ूब पसंद आया. इसके बाद वो लगातार यहां आने लगे. राष्ट्रपति बने तो विदेशी मेहमानों को साथ लाने लगे. अप्रैल 2000 में वो जापान के तत्कालीन पीएम योशिरो मोरी के साथ न्यू आईलैंड में आए. इसी दौरान पहली बार पुतिन और प्रिगोझिन की मुलाक़ात हुई थी. इसके बाद तो उनकी दोस्ती बढ़ती ही गई. कालांतर में प्रिगोझिन की कैटरिंग कंपनी कॉनकोर्ड को क्रेमलिन में खाना सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला. मिलिटरी से लेकर सरकारी स्कूलों तक के खाने पर कॉनकोर्ड का एकाधिकार हो चुका था. किसी भी विदेशी मेहमान के स्वागत में भोज होता, उसे भी प्रिगोझिन की कंपनी ही आयोजित करती थी. एक समय बाद प्रिगोझिन को पुतिन का पर्सनल शेफ़ यानी खानसामा कहा जाने लगा.

जहां तक वेगनर ग्रुप की बात है, उसका ज़िक्र सबसे पहले 2014 में आया था. क्रीमिया पर क़ब्ज़े में वेगनर ग्रुप ने रूसी सेना की मदद की थी. उसके बाद से ये नाम मोज़ाम्बिक़, लीबिया, सीरिया, सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक (CAR), माली, सूडान और मैडागास्कर जैसे देशों में भी उभरा है. इनमें से कई देश सिविल वॉर से जूझ रहे हैं, जबकि बाकी देशों में स्थिरता का संकट है. वेगनर ग्रुप इन देशों में लड़ाके और ट्रेनर भेजकर संबंधित पक्ष की मदद करता है. इसके बदले में उन्हें पैसा मिलता है. सीरिया में तेल के कुओं पर क़ब्ज़े के बदले वेगनर ग्रुप को कुल प्रोडक्शन का 25 प्रतिशत हिस्सा मिलता है. CAR की सरकार ने 2017 में रूस से मदद मांगी थी. तब रूसी सेना के साथ वेगनर के लड़ाकों को भी भेजा गया था. वहां उन्होंने सोने, हीरे और यूरेनियम के खदानों पर क़ब्ज़ा कर रखा है.
वो इतना ताक़तवर कैसे हुआ कि रशियन आर्मी को चुनौती दे दी?कई बरसों तक वेगनर ग्रुप का राज़ छिपा रहा. इस ग्रुप को लेकर अलग-अलग कहानियां चलतीं थी. वेगनर के पीछे दो नाम बताए जाते थे. एक था, रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी GRU में लेफ़्टिनेंट कर्नल के पद पर काम कर चुके दमित्री उत्किन. और, दूसरा था, येवगेनी प्रिगोझिन. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्किन हिटलर को अपना आदर्श मानता है. हिटलर के एक चहेते म्युज़िक कम्पोज़र थे - रिचर्ड वेगनर. कहा जाता है कि उन्हीं के नाम पर उत्किन ने नेटवर्क का नाम वेगनर ग्रुप रखा. उत्किन को लंबे समय से पब्लिक में नहीं देखा गया है. दूसरे मास्टरमाइंड प्रिगोझिन को वेगनर ग्रुप का फ़ाइनेंशियल बैकर कहा जाता था. प्रिगोझिन पर इंटरनेट रिसर्च एजेंसी ‘ट्रोल फ़ैक्ट्री’ को फ़ंड देने का आरोप भी है. इस एजेंसी ने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ऑनलाइन फ़ेक कैंपेन चलाया था. अमेरिका इसी आधार पर प्रिगोझिन और उनकी कंपनियों पर कई दफा प्रतिबंध भी लगाया था. प्रिगोझिन ने इन आरोपों को झूठा बताया था. बाद में उसने दम ठोककर आरोप स्वीकार किया था.
2019 में पुतिन से वेगनर ग्रुप को लेकर सवाल पूछा गया था. तब पुतिन ने कहा था, कुछ प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियां वहां काम कर रही हैं, लेकिन इनका रूसी सरकार से कोई लेना देना नहीं है. फिर फ़रवरी 2022 आया. पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का आदेश दिया. शुरुआती दौर की बढ़त के बाद रूसी सेना को पीछे हटना पड़ा. कई मोर्चों पर रूसी आर्मी कमज़ोर पड़ती दिखाई दी. तब वेगनर ग्रुप ने मोर्चा संभाला. रूस में प्राइवेट मिलिटरी ग्रुप बनाने और चलाने पर पाबंदी है. फिर भी प्रिगोझिन ने वेगनर बनाया और इसे अभी तक बिना किसी रुकावट के चलाया है. उन्होंने रूसी सेना के साथ मिलकर युद्ध भी लड़ा है.

मीडिया रपटों के अनुसार, वेगनर ग्रुप में कम से कम 50 हज़ार लड़ाके हैं. इनमें से अधिकतर सज़ायाफ़्ता क़ैदी हैं. उन्हें रूस की जेलों से रिक्रूट किया गया. सितंबर 2022 में प्रिगोझिन का एक वीडियो भी सामने आया था. इसमें वो ऑफ़र दे रहा था, अगर आप इस जंग में रूस का साथ देते हैं तो आपके सभी अपराध माफ़ कर दिए जाएंगे. प्रिगोझिन ने कई जेलों का हेलिकॉप्टर से दौरा किया और हजारों अपराधियों को अपनी प्राइवेट आर्मी में भर्ती किया. ये सब पुतिन की सहमति के बिना संभव नहीं था. धीरे-धीरे वेगनर ग्रुप खुलकर सामने आने लगा. 2022 के आख़िर में प्रिगोझिन ने वेगनर का अस्तित्व स्वीकार कर लिया.
प्रिगोझिन ने जब सितंबर में वेगनर ग्रुप की स्थापना की बात कबूली थी. तब उसने अपनी कंपनी को 'रूस का एक स्तंभ' बताया था. अक्टूबर की शुरुआत में सरकार ने उसको एक सच्चा नागिरक और एक ऐसा व्यक्ति बताया, जिसका दिल रूस के लिए धड़कता है.
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वेगनर ग्रुप और पुतिन का कनेक्शन लंबे समय तक छिपाकर रखा गया. पहले ये सीक्रेट मिलिटरी ग्रुप के तौर पर अफ़्रीका और साउथ अमेरिका में काम कर रहा था. फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सब बदल गया. येवेग्नी प्रिगोझिन ने खुले तौर पर वेगनर ग्रुप बनाने और चलाने की बात स्वीकारी. अब ये ग्रुप रूसी सेना से भी अधिक मुखर होकर लड़ रहा है.
कैसे पुतिन और प्रिगोझिन के रिश्तों में खटास आई?यूक्रेन युद्ध के दौरान वेगनर ने रूसी आर्मी से इतर जाकर भी काम करना शुरू कर दिया. उन्हें गोला-बारूद की सप्लाई डिफ़ेंस मिनिस्ट्री से मिल रही थी. लेकिन वे उनका आदेश मानने के लिए तैयार नहीं थे. इसके चलते डिफ़ेंस मिनिस्ट्री और वेगनर ग्रुप के बीच तालमेल कमज़ोर पड़ा.
मई 2023 में वेगनर ने रूसी सेना पर पर्याप्त हथियार न देने का इल्ज़ाम लगा दिया. कहा कि हमारे पास केवल 10 से 15% गोला-बारूद बचा है. प्रिगोझिन ने इस हालात के लिए रूसी सेना को ज़िम्मेदार ठहराया. कहा कि हम रोजाना हजारों लड़ाकों के शव घर भेजने को मजबूर हैं.
गोला-बारूदों की कमी पर उन्होंने रक्षा मंत्री सर्गेई शोईगू को भी लेटर लिखा. कहा, हम डरपोक चूहों की तरह भागना नहीं चाहते. ऐसे में हमारे पास मरने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है. अमेरिका के इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के मुताबिक, प्रिगोझिन को ज़रूरत की तुलना में 20 प्रतिशत हथियार ही मिल पा रहे थे. तब प्रिगोझिन ने कहा कि अगर हमें पर्याप्त मात्रा में हथियार नहीं मिले तो हम पीछे हट जाएंगे. लेकिन फिर हथियारों की सप्लाई पूरी कर दी गई.
बखमुत जीत पर दावे के बाद जलन-कुढ़न शुरू हुईमई 2023 में ही वेगनर ने बखमुत में जीत का दावा किया. इस दावे पर कई सवाल उठे, लेकिन एक बात तय थी कि वेगनर बखमुत में यूक्रेन की सेना पर हावी हो गया था. और इस जीत का एकतरफा क्रेडिट वेगनर ले जा रहा था. शायद ये बात डिफ़ेंस मिनिस्ट्री में कुछ लोगों को पसंद नहीं आई. इसके बाद जून महीने में एक और ऐसी घटना हुई जिसने वेगनर और रूसी सरकार के रिश्तों में और खटास घोल दी. यूक्रेन में एक रूसी सैनिक ने शराब के नशे में वेगनर ग्रुप के वाहन पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. बाद में वेगनर के लोगों ने उस सैनिक को गिरफ्तार कर लिया. किसी ने चुपके से इस घटना का वीडियो भी बना लिया. बाद में इस वीडियो का इस्तेमाल प्रिगोझिन ने रूस के अफसरों के ख़िलाफ़ किया.
प्रिगोझिन इसके पहले भी रक्षा मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगा चुके थे. गोली वाले कांड से चंद दिन पहले प्रिगोझिन ने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी. दावा किया था कि बखमुत में जिस रास्ते का इस्तेमाल वैग्नर के सैनिक कर रहे हैं उस सड़क पर रूस के रक्षा मंत्रालय से जुड़े कुछ ग्रुप्स ने बम लगाने का काम किया था. प्रिगोझिन के इस आरोप से रूसी सरकार और वेगनर के तल्ख़ रिश्तों का अंदाज़ा लगा जा सकता है. दोनों के बीच रिश्ते ख़राब ही चल रहे थे कि रूसी रक्षा मंत्रालय का बयान आया कि रूस के सभी प्राइवेट मिलिटरी ग्रुप उसके अंडर में काम करेंगे. इसके लिए 1 जुलाई 2023 से पहले सभी प्राइवेट ग्रुप्स को एक कांट्रैक्ट साइन करना होगा. डिफ़ेंस मिनिस्ट्री ने वेगनर का नाम तो नहीं लिया है. लेकिन कहा गया कि इस आदेश का मकसद वेगनर ग्रुप को कंट्रोल में रखना है. प्रिगोझिन ने कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से साफ़ मना कर दिया.
जब विद्रोह का बिगुल बजा दिया23 जून तक कलह इतनी बढ़ गई कि प्रिगोझिन ने रूसी सेना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उसके लड़ाके रूसी शहर रोस्तोव में रूसी सेना के मुख्यालय में घुस गए और उसपर कब्जा कर लिया. फिर दावा किया वेगनर के लड़ाके अब राजधानी मास्को पर धावा बोलेंगे. 24 घंटे के विद्रोह के दौरान प्रिगोझिन के लड़ाके मॉस्को के पास तक पहुंच गए थे. फिर बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेन्को ने येवगेनी प्रिगोझिन से बात की. और उनकी रूसी सरकार से डील कराई. तब जाकर वैग्नर ग्रुप मास्को से वापस वापस लौटा.

उस समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने विद्रोह के मास्टरमाइंड्स को सज़ा देने की बात कही थी. हालांकि, कुछ वक़्त बाद पता चला कि पुतिन ने प्रिगोझिन से क्रेमलिन में सीक्रेट मीटिंग की. बाद में प्रिगोझिन कई मौकों पर पुतिन की पब्लिक मीटिंग्स में भी दिखे थे. माना गया कि पुतिन ने उन्हें माफ़ कर दिया है.
लेकिन 23 अगस्त को आई एक ख़बर ने सनसनी फैला दी, क्योंकि ये खबर थी वेगनर ग्रुप के चीफ की मौत की. येवगेनी प्रिगोझिन एक विमान से मॉस्को से सेंट पीटर्सबर्ग जा रहे थे. राजधानी से करीब 300 किलोमीटर उत्तर में तेवेर इलाके में विमान हादसे का शिकार हो गया और उनकी मौत हो गई. हालांकि अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि विमान को मार गिराया गया या फिर इसमें हवा में ही विस्फोट हो गया.
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