हमारे यहां बहुत कम फिल्में होती हैं जो पैसे बनाने के अलावा हफ्तों तक खबरों मेंरहती हैं. उस पर हर एंगल से आर्टिकल लिखे जाते हैं. उसकी हर बारीकी को नोटिस कियाजाता है. चैनलों पर पैनल डिस्कसन होता है. वैसी लेटेस्ट फिल्म थी 'दंगल'. उसमेंरियल लाइफ स्टोरी के अलावा आमिर खान का रियल लाइफ ट्रांस्फार्मेशन खास था. आमिर जिसकाम के लिए जाने जाते हैं. करेक्टर में ढलने के लिए वो अपनी बॉडी पर जमकर प्रयोगकरते हैं. रणदीप हुड्डा भी 'सरबजीत' के लिए ऐसा ही काम कर गए और दर्शकों ने खूबपसंद भी किया. अब अपने दिमाग के कैनवस को फैलाते हुए चलते हैं इंटरनेशनल लेवल पर.हॉलीवुड में ऐसा ही एक हीरो है. इसका काम के प्रति डेडिकेशन देखोगे तो सारी फिल्मोंकी लिस्ट निकालकर देख डालोगे. क्रिश्चियन बेल. 43 साल का नौजवान हर दिल अज़ीज़एक्टर. वीसीआर और सिंगल स्क्रीन थिएटर से अलग जब आम पब्लिक की पहुंच फिल्मों तक हुईतो टेस्ट बड़ी तेजी से बदला. बनावटी एक्शन से अलग ओरिजनल लगने वाली कहानी औरकरेक्टर्स पर लोगों का फोकस बढ़ा. भारत में जकड़ के चलने वाली 'गॉडजिला', 'जुरासिकपार्क', 'टाइटेनिक', 'मैट्रिक्स' के बाद सुपरमैन, स्पाइडरमैन, बैटमैन और आयरनमैन काजमाना आया. 'पाइरेट्स ऑफ द कैरिबियन' की सीरीज देखने के बाद जॉनी डेप का फैन हुआकरता था. बैटमैन देखने के बाद क्रिश्चियन बेल का हो गया. ये वो फिल्में थीं जो पूरीदुनिया में कमाई बढ़ाने के लिए रिलीज की जाती थीं. हॉलीवुड वालों को भी पता था किहम लोग मसालेदार खाने के कितने शौकीन हैं. वैसी ही फिल्मों के भी. अक्ल लगाने वालीफिल्में तो इंटरनेट की घर घर पहुंच होने के बाद देखी जाने लगीं. वैसे ही तकरीबन 5-6साल पहले यूट्यूब पर टहलते हुए एक ट्रेलर दिख गया. 'द मशीनिस्ट' फिल्म का. पूरा देखगया. थोड़ा रोचक लगा. फिर वापस रिवाइंड करके देखा और दिमाग पर जोर डाला. यार येहीरो तो देखा हुआ है. कौन है? उस वक्त हॉलीवुड एक्टर्स के नाम फिल्मी नामों से यादरहते थे. नीचे देखा क्रिश्चियन बेल लिखा था. उसे गूगल किया तो दिमाग सन्न रह गया.ये तो अपना बैटमैन है. इसने अपने साथ क्या कर लिया. फिर पूरी फिल्म देखी औरक्रिश्चियन बेल के डेडिकेशन का कायल हो गया. 2004 में आई इस फिल्म के लिएक्रिश्चियन बेल ने अपने शरीर की एक तरह से कुर्बानी दे डाली थी. हम सुनते पढ़ते औरगाते आए हैं शास्त्रों के उपदेश. कि मिट्टी का शरीर है, मिट्टी में मिल जाना है.इससे मोह मत करो..और भी बहुत कुछ हर धर्म और पंथ शरीर की नश्वरता को स्वीकारता औरइसके महत्व को नकारता है. लेकिन एक्टर्स के लिए उनकी बॉडी ही सब कुछ है. वो हाईलेवल का रिस्क लेकर उसके साथ प्रयोग करते हैं. अगर कहीं भी गड़बड़ हो जाए तो दोबाराफिटिंग हासिल करने में हालत खराब हो जाएगी. 'द मशीनिस्ट' 2004 में आई. ये फिल्मनहीं चैलेंज थी बेल के लिए. इस चैलेंज को पूरा करने के लिए उनको अपनी डायट पर कामकरना था. धीरे धीरे करके उन्होंने अपनी खुराक आखिरी सीमा तक कम कर दी. दिन भर कामऔर खाने के नाम पर सिर्फ एक सेब और कॉफी. मुंह को खाने की तलब न लगे इसलिए दिन भरचेविंग गम चबाते और सिगरेट पीते थे. ऐसे काम नहीं होता साहब. पूजा होती है. एक पैरपर डेढ़ सौ साल तक खड़े होकर तपस्या करने वाले ऋषि मुनि विशेष उद्देश्य लिए होतेथे. भगवान के प्रसन्न होने पर उनको अमरत्व, अमृत, आजीवन यौवन जैसी चीजों की दरकारहोती थी. क्रिश्चियन बेल ने कई महीनों तक ऐसी तपस्या की सिर्फ अपने करेक्टर कोओरिजनल बनाने के लिए. ऐसी योग साधना होती है. कोई संगीतज्ञ सुरों पर अपनी पकड़बनाने के लिए रोज घंटों रियाज़ करता है. जिससे उसे जीवन में कभी बहकने का मौका नआए. लेकिन सिर्फ एक फिल्म के लिए कोई चौबीस घंटे रियाज़ करता है क्या? ऐसा काम अनाजउगाने वाले किसान करते हैं. सर्दी गर्मी बरसात कभी उनका वीक ऑफ नहीं होता. वो हमेशाऑन रहते हैं. उनकी मेहनत के पीछे भी परफेक्शन की चाह होती है. एक एक दाना बढ़ियाहो. फसल अच्छी हो. क्रिश्चियन बेल वैसे ही किसान हैं. ऐसी साधना से उन्होंने आधावजन घटा दिया. तकरीबन तीस किलो. 55 किलो की बॉडी बना ली. ट्रेलर देखो 'द मशीनिस्ट'का. https://www.youtube.com/watch?v=bAhBZXw1Kak ये तपस्या तब और बड़ी हो जाती हैजब उनको अगले साल यानी 2005 में 'बैटमैन बिगिन्स' को हिट कराने का वरदान पाना होताहै. इस फिल्म में धाकड़ बैटमैन भयानक बॉडी के साथ नजर आता है. इस बीच में फिर सेभारी मेहनत और डायट पर काम करके बेल ने अपना वजन फिर से 86 किलो कर लिया. फिल्मक्या थी और करेक्टर क्या था, ये बताने की जरूरत नहीं है.https://www.youtube.com/watch?v=vJKDXq8gRok उसके अगले साल आई 'रेस्क्यू डॉन'. फिरतपस्या शूरू. इसमें बेल ने जर्मन अमेरिकन पायलट डीटर डेंगलर का रोल किया था. जोवियतनाम युद्ध के दौरान पकड़ लिया जाता है. कहानी असली थी. इसके लिए फिर से वजन कमकरना शुरू किया. क्योंकि युद्ध कैदी की शक्ल जैसी होती है कि दूर से देखकर ही डरलगने लगे. वापस 61 किलो पर आ गए. https://www.youtube.com/watch?v=BRMG2GhQRRQ दोसाल बाद आई 'बैटमैन: द डार्क नाइट'. उसके लिए वापस 85 किलो. फिर दो साल बाद 2010में आई 'द फाइटर'. इसके लिए वापस वजन कम करके लाए 66 किलो पर. ये सब लिखने में मुझेजितना नॉर्मल लग रहा है हो सकता है आपको पढ़ने में भी लग रहा हो. लेकिन ये पागलपनहै. जुनून है. जब कोई आदमी हवस की हद तक अपने काम से प्यार करने लगता है तोक्रिश्चियन बेल बन जाता है. 2013 में 'अमेरिकन हसल' आई. ठग आर्टिस्ट का रोल था.जिसकी वाइफ का मूड ऐसा था कि ऊंट, जाने किस करवट बैठेगा. जिसे एक FBI एजेंट खास कामकरने के लिए फंसा लेता है. इसके लिए बेल ने बड़ा सा तोंद रखकर वजन कर लिया 90 किलो.इस नश्वर शरीर से जितना काम क्रिश्चियन बेल ने ले लिया उतना योगी और ज्ञानी ध्यानीनहीं ले पाते. https://www.youtube.com/watch?v=znbOM3Sud98--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़े: जिसने भक्तों को भगवान के करीब पहुंचाया, अब जाकर मिला उनको पद्म श्रीऑस्कर-2017 की फिल्मेंः 'ला ला लैंड' - सबसे ज्यादा 14 नॉमिनेशन पाने वाली मूवी