भारत के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाई जाती है नवरात्रि?
गुजरात में पूजे जाते हैं मिट्टी के बर्तन. उत्तर भारत में होती है रामलीला.
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नवरात्रि में दुर्गा माता को पूजा जाता है.
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नवरात्रि इकलौता जश्न है जो साल में दो बार मनाया जाता है. एक गर्मी की शुरुआत में और दूसरा सर्दी की शुरुआत में. नवरात्रि में शक्ति के नौ रूपों को पूजा जाता है. भारत के कई राज्यों में नवरात्रि को अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है. जहां बंगाल और असम जैसे पूर्वी प्रदेशों में दुर्गा माता की मूर्तियों की पूजा होती है, वहीं गुजरात में मिट्टी से बने बर्तन को पूजा जाता है. इस मिट्टी के बर्तन को गरबो कहते हैं.
उत्तर भारत में नवरात्रि को राम लीला से जोड़ा जाता है. दक्षिण भारत में नवरात्रि पर देवी-देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां जुटाई जाती हैं. यहां हमने संक्षेप में बताया है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में कितने तरीकों से नवरात्रि मनाई जाती है.
बंगाल में दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव भी बुलाया जाता है.
ये त्योहार महिषासुर पर दुर्गा की जीत के साथ-साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. बंगाल और असम में दुर्गा पूजा बहुत बड़ा त्योहार है. यहां नवरात्र के छह दिनों तक दुर्गा को पूजा जाता है. ये दिन हैं महालय, षष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी.
इन छह दिनों में यहां के शहरों का रंग-रूप बिलकुल बदल जाता है. शहर के हर गली-नुक्कड़ पर पंडाल लगाए जाते हैं. मूर्तिकार मिट्टी से दुर्गा मां की इंसान जितने साइज़ की मूर्तियां बनाते हैं. पंडालों में दुर्गा माता की इन मूर्तियों के साथ-साथ और देवी-देवताओं की भी मूर्तियां रखी जाती हैं. हर साल अलग-अलग थीम के पंडाल तैयार किए जाते हैं. थीम अंतरिक्ष, गुफ़ा कैसी भी हो सकती है, जैसी भक्तों की रखने का मन करे.
विजयादशमी के दिन दुर्गा माता की मूर्ति को पास की नदी में बहा दिया जाता है.
नवरात्रि के समय छोटी-छोटी खिलौने जैसी मूर्तियां बनाई जाती हैं.
इन राज्यों में नवरात्रि के समय छोटी-छोटी खिलौने जैसी मूर्तियां बनाई जाती हैं. ज़रूरी नहीं है कि ये मूर्तियां सिर्फ़ भगवान की हों. भगवान के साथ-साथ रथ, दूल्हा-दुल्हन, ऋषि-मुनि, पुरुष, महिलाओं, बर्तन जैसी चीज़ों की भी मूर्तियां खरीदी जाती हैं. इन्हें रखने के लिए भी लोग खास तरह का स्टेज तैयार करते हैं. लकड़ी की सीढ़ियों का स्टेज. सीढ़ियों की संख्या अपने मन से चुन सकते हैं. लेकिन ज़रूरी है कि ये ऑड संख्या में हों जैसे 3,5,7,9 या 11. इन राज्यों में इस त्योहार को गोलू, बोम्मा गोलू, बोम्बे हब्बा कहा जाता है, जिसका मतलब है गुड़िया का त्योहार.
नवरात्रि के पहले दिन गणपति, सरस्वती, पार्वती और लक्ष्मी की पूजा होती है. शाम के वक्त हर कोई एक दूसरे के घर आता-जाता है, तैयारियां देखता है. रोज़ पूजा होती और प्रसाद बांटा जाता है.
नवमी को सरस्वती मां की खास पूजा होती है. विजयादशमी की शाम किसी एक खिलौने को प्रतीकात्मक तरीके से सुला दिया जाता है. इस पूजा के दौरान एक कलश स्थापित किया जाता है, जिसे उठाकर विजयादशमी की शाम ज़रा उत्तर की दिशा की तरफ़ बढ़ा देते हैं. ऐसे त्योहार की समाप्ति हो जाती है.
गुजरात का फ़ेमस डांस फॉर्म गरबा.
नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी का एक मटका स्थापित किया जाता है, जिसके अंदर सुपारी, नारियल और चांदी का सिक्का रखा जाता है. मटके के अंदर एक दिया जलाया जाता है. हर रात आस-पास के लोग दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने के लिए इकट्ठे होते हैं. लक्ष्मी और सरस्वती को भी पूजा जाता है. गुजरात में कई लोग नौ दिन अन्न का त्याग करके व्रत भी रखते हैं.
यहां का डांस फ़ॉर्म गरबा बहुत फ़ेमस है. नवरात्रि में शाम के समय लोग घेरा बनाकर गरबा करते हैं.
घटस्थापना
यहां नवरात्रि के पहले दिन एक कलश स्थापित किया जाता है. इस कलश में नारियल और बाकी पूजा का सामान होता है. साथ ही जिस जगह ये रखा जाता है, उसके आस-पास मिट्टी में कई तरह के अनाज रखे जाते हैं. नवरात्रि के नौ दिन इनमें पानी दिया जाता है और दुर्गा माता के साथ-साथ इस कलश की भी पूजा होती है. नवमी को छोटी बच्चियों को खाना खिलाया जाता है. ज़्यादातर राज्यों में इस दिन कन्या की पूजा करके उन्हें खिलाया जाता है.
उत्तर भारत में नवरात्रि में राम लीला होती है. यहां राम और रावण की कहानी बताई जाती है. टीम आती है आर्टिस्ट लोगों की, उनके लिए स्टेज सजते हैं और राम लीला होती है.
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उत्तर भारत में नवरात्रि को राम लीला से जोड़ा जाता है. दक्षिण भारत में नवरात्रि पर देवी-देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियां जुटाई जाती हैं. यहां हमने संक्षेप में बताया है कि भारत के अलग-अलग राज्यों में कितने तरीकों से नवरात्रि मनाई जाती है.
असम और बंगाल की नवरात्रि

बंगाल में दुर्गा पूजा को दुर्गोत्सव भी बुलाया जाता है.
ये त्योहार महिषासुर पर दुर्गा की जीत के साथ-साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. बंगाल और असम में दुर्गा पूजा बहुत बड़ा त्योहार है. यहां नवरात्र के छह दिनों तक दुर्गा को पूजा जाता है. ये दिन हैं महालय, षष्ठी, महासप्तमी, महाअष्टमी, महानवमी और विजयादशमी.
इन छह दिनों में यहां के शहरों का रंग-रूप बिलकुल बदल जाता है. शहर के हर गली-नुक्कड़ पर पंडाल लगाए जाते हैं. मूर्तिकार मिट्टी से दुर्गा मां की इंसान जितने साइज़ की मूर्तियां बनाते हैं. पंडालों में दुर्गा माता की इन मूर्तियों के साथ-साथ और देवी-देवताओं की भी मूर्तियां रखी जाती हैं. हर साल अलग-अलग थीम के पंडाल तैयार किए जाते हैं. थीम अंतरिक्ष, गुफ़ा कैसी भी हो सकती है, जैसी भक्तों की रखने का मन करे.
विजयादशमी के दिन दुर्गा माता की मूर्ति को पास की नदी में बहा दिया जाता है.
तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की नवरात्रि

नवरात्रि के समय छोटी-छोटी खिलौने जैसी मूर्तियां बनाई जाती हैं.
इन राज्यों में नवरात्रि के समय छोटी-छोटी खिलौने जैसी मूर्तियां बनाई जाती हैं. ज़रूरी नहीं है कि ये मूर्तियां सिर्फ़ भगवान की हों. भगवान के साथ-साथ रथ, दूल्हा-दुल्हन, ऋषि-मुनि, पुरुष, महिलाओं, बर्तन जैसी चीज़ों की भी मूर्तियां खरीदी जाती हैं. इन्हें रखने के लिए भी लोग खास तरह का स्टेज तैयार करते हैं. लकड़ी की सीढ़ियों का स्टेज. सीढ़ियों की संख्या अपने मन से चुन सकते हैं. लेकिन ज़रूरी है कि ये ऑड संख्या में हों जैसे 3,5,7,9 या 11. इन राज्यों में इस त्योहार को गोलू, बोम्मा गोलू, बोम्बे हब्बा कहा जाता है, जिसका मतलब है गुड़िया का त्योहार.
नवरात्रि के पहले दिन गणपति, सरस्वती, पार्वती और लक्ष्मी की पूजा होती है. शाम के वक्त हर कोई एक दूसरे के घर आता-जाता है, तैयारियां देखता है. रोज़ पूजा होती और प्रसाद बांटा जाता है.
नवमी को सरस्वती मां की खास पूजा होती है. विजयादशमी की शाम किसी एक खिलौने को प्रतीकात्मक तरीके से सुला दिया जाता है. इस पूजा के दौरान एक कलश स्थापित किया जाता है, जिसे उठाकर विजयादशमी की शाम ज़रा उत्तर की दिशा की तरफ़ बढ़ा देते हैं. ऐसे त्योहार की समाप्ति हो जाती है.
गुजरात की नवरात्रि

गुजरात का फ़ेमस डांस फॉर्म गरबा.
नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी का एक मटका स्थापित किया जाता है, जिसके अंदर सुपारी, नारियल और चांदी का सिक्का रखा जाता है. मटके के अंदर एक दिया जलाया जाता है. हर रात आस-पास के लोग दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने के लिए इकट्ठे होते हैं. लक्ष्मी और सरस्वती को भी पूजा जाता है. गुजरात में कई लोग नौ दिन अन्न का त्याग करके व्रत भी रखते हैं.
यहां का डांस फ़ॉर्म गरबा बहुत फ़ेमस है. नवरात्रि में शाम के समय लोग घेरा बनाकर गरबा करते हैं.
बिहार की नवरात्रि

घटस्थापना
यहां नवरात्रि के पहले दिन एक कलश स्थापित किया जाता है. इस कलश में नारियल और बाकी पूजा का सामान होता है. साथ ही जिस जगह ये रखा जाता है, उसके आस-पास मिट्टी में कई तरह के अनाज रखे जाते हैं. नवरात्रि के नौ दिन इनमें पानी दिया जाता है और दुर्गा माता के साथ-साथ इस कलश की भी पूजा होती है. नवमी को छोटी बच्चियों को खाना खिलाया जाता है. ज़्यादातर राज्यों में इस दिन कन्या की पूजा करके उन्हें खिलाया जाता है.
महाराष्ट्र की नवरात्रि
यहां भी बिहार की तरह ही नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना होती है. महाराष्ट्र में बहुत से लोग अपने घरों में दिया जलाकर रखते हैं. ये दिया लगातार नौ दिन जलता रहता है. दशहरा के दिन घर के पुरुष घर के वाहन, चाकू, दूसरे ज़रूरी टूल्स की पूजा करते हैं. उनका धन्यवाद करते हैं. इसे अयुद्ध पूजा कहा जाता है.उत्तर भारत में नवरात्रि में राम लीला होती है. यहां राम और रावण की कहानी बताई जाती है. टीम आती है आर्टिस्ट लोगों की, उनके लिए स्टेज सजते हैं और राम लीला होती है.
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