आंबेडकर पर बने 5 गाने जो उनकी दीवानगी बताते हैं
समय के साथ क्यों बाबा साहेब अंबेडकर और भी रेलेवेंट होते गए हैं.
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डॉ. अंबेडकर पर बने एक गाने के लिरिक्स कुछ यूं हैं.
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ये डॉ. भीमराव आंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं में से एक थी. बहुत सारे लोगों ने हिंदू धर्म के देवताओं को मानना बंद कर दिया. पर बहुत सारों ने अपने भगवान को रिप्लेस कर लिया. वे कहते हैं कि आंबेडकर उनके नए भगवान हैं. आपने सावन के दिनों की दिल्ली देखी है? शिव के भक्त कांवड़िए भी देखे होंगे. उनके ओरिजिनल और बॉलीवुड गानों की तर्ज पर बने भजन भी सुने होंगे. जैसे, 'भोला न्यू मटके', 'भांग आली भांग पियादे', 'सॉलिड भोला', ' भोला बह गया गंगा में', 'भोला आई लव यू', ऐसे बहुत गाने आपको यूट्यूब पर मिल जाएंगे. ऐसा ही जश्न हर साल आंबेडकर के जन्मदिन 14 अप्रैल को महाराष्ट्र के विदर्भ में होता है. लेकिन वहां गानों में 'भोले बाबा' की जगह 'बाबासाहेब आंबेडकर’ का नाम होता है. लोग सुबह-सुबह टोलियों में गाजे-बाजे के साथ सड़कों पर निकलते हैं. इस दिन कुछ बच्चे भी आंबेडकर की ड्रेस में दिख जाएंगे. दलितों के हक के लिए सारी जिंदगी संघर्ष करने वाले डॉ. आंबेडकर का इस साल 125वां जन्मदिन मनाया जा रहा है. विदर्भ के दलित बहुल इलाकों के हर चौक पर आपको गौतम बुद्ध और डॉ. आम्बेडकर की मूर्तियां मिल जाएंगी. कई जगह पर मूर्तियों के साथ लाउडस्पीकर भी लगे होते हैं जिनमें आंबेडकर की प्रशंसा में मराठी और हिंदी गीत बजते रहते हैं. 14 अप्रैल 1891 को पैदा हुए अंबेडकर का इंतकाल 6 दिसंबर 1956 को हुआ. आपको कुछ ऐसे ही गाने सुनवाते हैं:मैं राम और कृष्ण, जो भगवान के अवतार माने जाते हैं, में कोई आस्था नहीं रखूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.
1. 'दीवानी भीम की दीवानी'
यह गाना मराठी में हैं. सिंगर का नाम ‘नागपुर की नागिन’ है. मराठी में, 'नागपुरची नागिन'. यह महिला कभी कार और कभी स्कूटी पर सवार है और कहती है कि ‘मुझे ना दादागिरी चाहिए, ना गांधीगिरी. मुझे तो आंबेडकरी चाहिए’. गाने के बीच में नागपुर की नागिन जी कुछ लोगों को कुत्ते (मराठी में 'कुतरे') शब्द से भी संबोधित करती हैं. बाकी आप खुद देखें. https://www.youtube.com/watch?v=RNYLcXzIOrw&nohtml5=False2. ‘गांधी का जीवनदाता मेरा भीमराव’
यह गाना भी मराठी में है. इस गाने में हरी साड़ी में बैठी महिला कहती है ‘1000 और 500 के नोटों पर तेरा गांधी है, पर गांधी का जीवनदाता मेरा भीमराव है’. इसके अलावा गाने में आंबेडकर को ब्राह्मणों का दामाद (जवाई) भी बताया गया है. देखिए. https://www.youtube.com/watch?v=jvwyIPc2qeU&nohtml5=False3. ‘भीम के लख्ते जिगर, आधे इधर, आधे उधर’
सिंगर कहते हैं, ‘भीम के लख्ते जिगर, आधे इधर, आधे उधर’ और चार मिनट तक सिर्फ यही कहते रहते हैं. https://www.youtube.com/watch?v=Avs7PjYddRA4. 'ऐ' फॉर आम्बेडकर, 'बी' फॉर भीमराव
ये आंबेडकर की एबीसीडी है. अंग्रेजी अल्फाबेट्स में बहुजन चेतना के शब्द हैं. यहां 'सी फॉर कास्ट बुद्धिस्ट', 'डी फॉर डॉक्टर बनकर' और 'ई फॉर इंग्लिश बोलें' है. https://www.youtube.com/watch?v=ZySa-lTf7Fo5. भीमकन्या
इसे भी 'नागपुर की नागिन' ने गाया है. वह बाइक पर सवार हैं. गुंडों को नदी किनारे मारती हैं और फिर दलित महिलाओं को भीमकन्या बनने को प्रेरित करती है. https://www.youtube.com/watch?v=-dgQT3fBuZg इसके साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर की पत्नी रमाबाई पर भी कुछ गाने और फिल्म मिल जाएगी. बाबासाहेब के लिए यह दीवानगी सिर्फ गानों तक ही सीमित नही हैं. यह इस दिन विदर्भ में लगने वाले पोस्टरो, कैलेंडर और दीवारों पर भी नुमायां होती है. वैसे इस तरह के ज्यादातर गाने डॉ. आंबेडकर के स्तुतिगान ज्यादा हैं. दलित डिस्कोर्स में इनकी भी उपयोगिता है. लेकिन बेहतर होता अगर इन गानों में आंबेडकर के विचारों की हिस्सेदारी ज्यादा होती. ऐसा न हो कि हम व्यक्ति को उनके विचारों से बड़ा बनाने की कोशिश में लगे रहें. जिसकी सख्त मुखालफत खुद आंबेडकर करते थे.यह स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे निखिल विजय ने लिखी.
वीडियो- आम्बेडकर के वारिस मोदी को लेकर क्या कहते हैं?

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