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मोदी के नए मंत्री राजकुमार सिंह, जिन्होंने आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था

बिहार काडर के 1975 बैच के आईएएस अफसर रहे हैं आरके सिंह.

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3 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 3 सितंबर 2017, 07:14 AM IST)
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राजकुमार सिंह.
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राजकुमार सिंह कैबिनेट में नए चेहरे हैं. बिहार काडर के 1975 बैच के आईएएस अफसर. यूपीए राज में होम सेक्रेट्री रहे हैं. 30 अक्टूबर 1990 को आडवाणी को बतौर समस्तीपुर डीएम गिरफ्तार किया. समस्तीपुर के अलावा वह ईस्ट चंपारण और पटना के भी डीएम रहे. नीतीश सरकार के समय रोड कंस्ट्रक्शन विभाग के प्रधान सचिव थे. अहम रोल निभाया ब्रैंड नीतीश को चमकाने में.
आडवाणी को गिरफ्तार किया.
आडवाणी को गिरफ्तार किया.

शिंदे से नहीं बनी

आडवाणी के गृहमंत्री रहते हुए 1999 से 2004 तक ज्वॉइंट सेक्रेट्री रहे होम मिनिस्ट्री में. 30 जून 2011 से 30 जून 2013 तक गृह सचिव रहे. इस दौरान दो गृहमंत्री रहे, पी चिंदबरम और सुशील कुमार शिंदे. चिदंबरम से बनी, मगर शिंदे से नहीं. दिल्ली गैंगरेप 16 दिसंबर 2012 इन्हीं के टाइम हुआ. इसकी हैंडलिंग से शिंदे नाराज थे. आरके सिंह ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में शिंदे की तरफ संकेत किया. कहा कि मंत्री ने दखल दिया जांच में. शाहिद बलवा से मुलाकात की बात कही. जो 2जी घोटाले का एक अभियुक्त था. बतौर डिफेंस प्रॉडक्शन सेक्रेट्री चेकोस्लोवाकिया की कंपनी टेट्रा की तरफ से की गई धांधली पर सवालिया निशान खड़े किए थे.
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सिंह ने कहा था कि जेडीयू सरकार भ्रष्ट हो चुकी है.

जेडीयू सरकार को बताया भ्रष्ट

नीतीश ने चैंबर तक तैयार करवा दिया था, मगर सिंह ने बीजेपी ज्वॉइन करने के बाद कहा कि जेडीयू सरकार भ्रष्ट हो चुकी है. राज्य में आतंकवादियों की स्लीपर सेल बन चुकी हैं, हम एलर्ट भेजते थे, मगर राज्य सरकार कुछ नहीं करती थी.

नीतीश दे रहे थे पोस्ट, कर दिया इनकार

सिंह ने आरा में जेडीयू की सिटिंग एमपी मीना सिंह को हराया. आरा के गाजीपुर की पत्नी हैं जबकि बेटी पावाना के मूल निवासी लड़के से ब्याही हैं. नीतीश ने रिटायरमेंट के बाद एडवाइजर इन्फ्रास्ट्रक्चर की पोस्ट ऑफर की. मगर सिंह ने इनकार कर दिया. अपनी क्लीन इमेज की वजह से होम सेक्रेट्री बनने से पहले एके एंटनी के मंत्रालय डिफेंस में डिफेंस प्रोडक्शन के मुखिया रहे. 13 दिसंबर 2013 को बीजेपी ज्वॉइन की. मोदी सुपौल या आरा से चुनाव लड़वाना चाहते थे. सुपौल आरके सिंह का गृह जनपद है. आरएसएस ने विरोध किया. आरा से लड़े और 1 लाख 35 हजार वोट से जीते. शाहनवाज हुसैन ने कन्विंस किया. जो खुद भी सुपौल के रहने वाले हैं. मोदी की रैली के बाद चुनावी संभावनाएं मजबूत हुई थीं.
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सुशील कुमार शिंदे से सिंह की नहीं बनी.

सलमान खुर्शीद के साथ हुई जूतमपैजार

आरा से इससे पहले बलिराम भगत सांसद रहे, जो लोकसभा के स्पीकर भी बने. इसके अलावा रामलखन सिंह यादव और चंद्रदेव प्रसाद वर्मा भी मंत्री रहे केंद्र में. शाहिद बलवा से शिंदे नॉर्थ ब्लॉक के ऑफिस में मिले. उसके पहले आरके सिंह जो रिटायर हो चुके थे, इल्ज़ाम लगा चुके थे. जिस पर सफाई में शिंदे ने इसे राजनीति प्रेरित बताया था. इटैलियन मरीन केस में सलमान खुर्शीद के साथ बातों की जूतमपैजार हुई. दोनों स्टीफंस में क्लासमेट थे. एक दूसरे की आईक्यू तक पर सवाल उठे. 2004 में हुए इशरतजहां एनकाउंटर में कहा कि कांग्रेस के इशारे पर डिपोजीशन दूसरी बार बदला गया.
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