एक ट्वीट के कारण 'एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' कमाएगी 1000 करोड़!
ये ट्वीट अनुपम खेर के प्रमोशन का हिस्सा नहीं है.
Advertisement

मनमोहन सिंह के किरदार में अनुपम खेर
Quick AI Highlights
Click here to view more
अनुपम खेर काफ़ी एक्साइटेड थे इस प्रोजेक्ट के लिए. समय समय पर ट्विटर पर उसकी शूटिंग के प्रोमोनुमा वीडियो-फोटो पोस्ट करते थे. ट्रेलर देखकर लग रहा है कि उन्होंने शानदार काम किया है. चलने के स्टाइल से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जो मिमिक्री की है वो भी बढ़िया है. संजय बारू को किसी ने कभी नोटिस नहीं किया, उनके रोल में अक्षय खन्ना कैसे हैं ये बारू को जानने वाले बता पाएंगे.

नकली बारू vs असली बारू
बाकी सोनिया की मिमिक्री अच्छी की गई है. प्रियंका गांधी के गेटप का सही ध्यान रखा गया है. राहुल गांधी की मिमिक्री के पैसे शायद काट लिये गए थे. तो फिल्म धमाकेदार होगी. सबसे मजे की बात ये कि फिल्म की टाइमिंग बहुत सही है. एकदम लोकसभा इलेक्शन से पहले आ रही है. देखो दो ही तरीके होते हैं इलेक्शन लड़ने के. या तो विरोधी की छीछालेदर कर दो या अपनी भयंकर बड़ाई कर दो. उधर महाराष्ट्र में शिव सेना के पास बाल ठाकरे हैं, तो वो उनके सहारे है. इधर बीजेपी के पास नेहरू गांधी परिवार है. ये इनके सहारे हैं. लोग इनको प्रोपेगैंडा फिल्में भी कह रहे हैं लेकिन ये कतई अच्छी बात नहीं है. फिल्म तो फिल्म होती है, अगर उनसे फिल्मकारों के अलावा किसी का फायदा हो रहा है तो कोई गुनाह थोड़ी है यार. खैर, मुद्दे पर आते हैं.

शपथ लेते द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर
बीजेपी ने किया ट्वीट
भारतीय जनता पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से इसका ट्रेलर ट्वीट किया गया है. इसके पहले अरविंद केजरीवाल फिल्म रिव्यू देने के लिए बदनाम थे. अब भाजपा का नाम फिल्म प्रमोशन से हो रहा है. फिल्म देखने के बाद उसकी क्वालिटी बताना ज्यादा बुरा है या उसको प्रमोशन करना, ये तो ऑडिएंस जाने. हमको बस इतना पता है कि फिल्म हजार करोड़ कमाएगी. अगर फिल्म का टिकट 100 रुपए का रखा जाए तब भी. वो कइसे, हम बताते हैं. जुलाई 2015 में ही मिसकॉल द्वारा पार्टी ने 10 करोड़ से ज्यादा मेंबर्स जोड़ लिए थे. इस तरह वो देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी. अब 100 और दस करोड़ का गुणा कर लो. रकम निकल आएगी. बीजेपी के मेंबर्स हैं तो कम से कम वो तो फिल्म देखने जाएंगे ही. और साथ में अपने घर परिवार, यार दोस्तों को भी ले जाएंगे. तो फिल्म बहुत ही ज्यादा कमाई कर लेगी. कुछ कोर सपोर्टर्स तो ऐसे हैं जो फिल्म दो तीन बार भी देख सकते हैं. कुछ लोग कांग्रेस और सोनिया परिवार को करीब से जानने के लिए दो तीन बार फिल्म देख आएंगे. इस तरह ये फिल्म कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी.
इसीलिए अपन आपको यूट्यूब वाला ट्रेलर नहीं, बीजेपी वाला ट्रेलर दिखाएंगे.
डॉक्टर मनमोहन सिंह की बायोपिक नहीं
नाम भले इसका द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर हो, लेकिन ये MMS यानी मनमोहन सिंह की बायोपिक नहीं, संजय बारू की बायोपिक है. कम से कम ट्रेलर देखकर तो यही लगता है. उसमें संजय बारू ज्यादा ऑथेंटिक लगे हैं और उनको सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह से ज्यादा स्पेस मिला है. आम तौर पर हिस्टोरिक इंसीडेंट पर या किसी की बायोपिक बनाने वाले लोग कई जगहों से जानकारी उठाते हैं. हर तरफ के पक्ष मिलते हैं और उनको फिल्म में पर्याप्त जगह मिलती है तब एक ईमानदार बायोपिक रूप लेती है. देखो रामायण की कहानी सबको पता है लेकिन उस पर सीरियल बनाने के लिए रामानंद सागर ने बीसियों रामायणों का संदर्भ लिया है.

फिल्म में संजय बारू के रोल में अक्षय खन्ना
अब मनमोहन सिंह के बारे में बारू से ज्यादा कोई जानता नहीं, तभी तो उन्होंने किताब लिखी. और इत्तेफाक देखिए कि वो किताब भी अप्रैल 2014 में आई थी, ठीक लोकसभा चुनाव के टाइम. अब उस पर फिल्म आ रही है, ठीक लोकसभा चुनाव से पहले. ऐसे में कुछ लोग ये भी आरोप लगा सकते हैं कि संजय बारू बीजेपी की तरफ से फील्डिंग सेट किए हुए हैं लेकिन ये तो लोगों का मुंह है, बिना सोचे समझे कुछ भी बोलते हैं लोग. हां, बायोपिक ये संजय बारू की लग रही, इसमें कोई दो राय नहीं है.

रिमोट
अपने समय की बहुत जरूरी फिल्म
इस फिल्म को प्रोपेगैंडा कहने वालों के मुंह बंद करने के लिए इतना कहना जरूरी है कि ऐसी क्रांतिकारी फिल्में आज की जरूरत हैं. ये फिल्म दिखाती है कि एक ही परिवार द्वारा हैंडल होने वाली पार्टी जब पूरा देश हैंडल करने लगती है तो कितना बुरा होता है. इससे आपको लोकतंत्र में परिवारवाद की कड़वी सच्चाई का पता चलेगा. और आप इसको आज से भी कनेक्ट कर पाएंगे जब पता चलेगा कि बीजेपी ने रामविलास पासवान से गठबंधन बचाने के लिए उनकी हर ख्वाहिश मान ली है. जिनका पूरा परिवार सांसद है. आईमीन रामविलास पासवान सांसद, इनका बेटा चिराग पासवान सांसद, चिराग के चाचा रामचंद्र पासवान सांसद और एक चाचा पशुपति कुमार पारस बिहार सरकार में मंत्री हैं. ये पूरा परिवार, परिवारवाद के खिलाफ खड़ी बीजेपी के साथ गठबंधन में है.

परिवार के साथ परिवारवाद के विरुद्ध
ऐसी फिल्म की दूसरी जरूरत ये है कि सबको पता रहे कि लोकतंत्र में सबका वक्त आता है. जब यूपीए पावर में थी तो ऐसी फिल्म रिलीज नहीं हो सकती थी. इसलिए अभी इसे सुपरहिट करने में बीजेपी जोर लगा रही है. इसमें एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर रहे मनमोहन सिंह के समय हुए घोटालों और नीतियों वगैरह की बात होगी. हो सकता है कभी अभी वाली सरकार पर फिल्म बने तो उसमें नोटबंदी जैसे एक्सीडेंट की बात रहे जो एक्सीडेंट एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर भी नहीं कर पाए थे. अपना फ्यूचर ब्राइट है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी तो है ही अपने देश में तो फिल्में बनेंगी और सुपरहिट भी होंगी. हम नहीं रहेंगे, आप नहीं रहेंगे लेकिन ये कहानियां तो हमेशा रहेंगी.
वीडियो में देखिए ठाकरे के ट्रेलर की खास बातें:

नकली बारू vs असली बारू
बाकी सोनिया की मिमिक्री अच्छी की गई है. प्रियंका गांधी के गेटप का सही ध्यान रखा गया है. राहुल गांधी की मिमिक्री के पैसे शायद काट लिये गए थे. तो फिल्म धमाकेदार होगी. सबसे मजे की बात ये कि फिल्म की टाइमिंग बहुत सही है. एकदम लोकसभा इलेक्शन से पहले आ रही है. देखो दो ही तरीके होते हैं इलेक्शन लड़ने के. या तो विरोधी की छीछालेदर कर दो या अपनी भयंकर बड़ाई कर दो. उधर महाराष्ट्र में शिव सेना के पास बाल ठाकरे हैं, तो वो उनके सहारे है. इधर बीजेपी के पास नेहरू गांधी परिवार है. ये इनके सहारे हैं. लोग इनको प्रोपेगैंडा फिल्में भी कह रहे हैं लेकिन ये कतई अच्छी बात नहीं है. फिल्म तो फिल्म होती है, अगर उनसे फिल्मकारों के अलावा किसी का फायदा हो रहा है तो कोई गुनाह थोड़ी है यार. खैर, मुद्दे पर आते हैं.

शपथ लेते द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर
बीजेपी ने किया ट्वीट
भारतीय जनता पार्टी के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से इसका ट्रेलर ट्वीट किया गया है. इसके पहले अरविंद केजरीवाल फिल्म रिव्यू देने के लिए बदनाम थे. अब भाजपा का नाम फिल्म प्रमोशन से हो रहा है. फिल्म देखने के बाद उसकी क्वालिटी बताना ज्यादा बुरा है या उसको प्रमोशन करना, ये तो ऑडिएंस जाने. हमको बस इतना पता है कि फिल्म हजार करोड़ कमाएगी. अगर फिल्म का टिकट 100 रुपए का रखा जाए तब भी. वो कइसे, हम बताते हैं. जुलाई 2015 में ही मिसकॉल द्वारा पार्टी ने 10 करोड़ से ज्यादा मेंबर्स जोड़ लिए थे. इस तरह वो देश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई थी. अब 100 और दस करोड़ का गुणा कर लो. रकम निकल आएगी. बीजेपी के मेंबर्स हैं तो कम से कम वो तो फिल्म देखने जाएंगे ही. और साथ में अपने घर परिवार, यार दोस्तों को भी ले जाएंगे. तो फिल्म बहुत ही ज्यादा कमाई कर लेगी. कुछ कोर सपोर्टर्स तो ऐसे हैं जो फिल्म दो तीन बार भी देख सकते हैं. कुछ लोग कांग्रेस और सोनिया परिवार को करीब से जानने के लिए दो तीन बार फिल्म देख आएंगे. इस तरह ये फिल्म कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी.
इसीलिए अपन आपको यूट्यूब वाला ट्रेलर नहीं, बीजेपी वाला ट्रेलर दिखाएंगे.
Riveting tale of how a family held the country to ransom for 10 long years. Was Dr Singh just a regent who was holding on to the PM’s chair till the time heir was ready? Watch the official trailer of #TheAccidentalPrimeMinister
— BJP (@BJP4India) December 27, 2018
, based on an insider’s account, releasing on 11 Jan! pic.twitter.com/ToliKa8xaH
डॉक्टर मनमोहन सिंह की बायोपिक नहीं
नाम भले इसका द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर हो, लेकिन ये MMS यानी मनमोहन सिंह की बायोपिक नहीं, संजय बारू की बायोपिक है. कम से कम ट्रेलर देखकर तो यही लगता है. उसमें संजय बारू ज्यादा ऑथेंटिक लगे हैं और उनको सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह से ज्यादा स्पेस मिला है. आम तौर पर हिस्टोरिक इंसीडेंट पर या किसी की बायोपिक बनाने वाले लोग कई जगहों से जानकारी उठाते हैं. हर तरफ के पक्ष मिलते हैं और उनको फिल्म में पर्याप्त जगह मिलती है तब एक ईमानदार बायोपिक रूप लेती है. देखो रामायण की कहानी सबको पता है लेकिन उस पर सीरियल बनाने के लिए रामानंद सागर ने बीसियों रामायणों का संदर्भ लिया है.

फिल्म में संजय बारू के रोल में अक्षय खन्ना
अब मनमोहन सिंह के बारे में बारू से ज्यादा कोई जानता नहीं, तभी तो उन्होंने किताब लिखी. और इत्तेफाक देखिए कि वो किताब भी अप्रैल 2014 में आई थी, ठीक लोकसभा चुनाव के टाइम. अब उस पर फिल्म आ रही है, ठीक लोकसभा चुनाव से पहले. ऐसे में कुछ लोग ये भी आरोप लगा सकते हैं कि संजय बारू बीजेपी की तरफ से फील्डिंग सेट किए हुए हैं लेकिन ये तो लोगों का मुंह है, बिना सोचे समझे कुछ भी बोलते हैं लोग. हां, बायोपिक ये संजय बारू की लग रही, इसमें कोई दो राय नहीं है.

रिमोट
अपने समय की बहुत जरूरी फिल्म
इस फिल्म को प्रोपेगैंडा कहने वालों के मुंह बंद करने के लिए इतना कहना जरूरी है कि ऐसी क्रांतिकारी फिल्में आज की जरूरत हैं. ये फिल्म दिखाती है कि एक ही परिवार द्वारा हैंडल होने वाली पार्टी जब पूरा देश हैंडल करने लगती है तो कितना बुरा होता है. इससे आपको लोकतंत्र में परिवारवाद की कड़वी सच्चाई का पता चलेगा. और आप इसको आज से भी कनेक्ट कर पाएंगे जब पता चलेगा कि बीजेपी ने रामविलास पासवान से गठबंधन बचाने के लिए उनकी हर ख्वाहिश मान ली है. जिनका पूरा परिवार सांसद है. आईमीन रामविलास पासवान सांसद, इनका बेटा चिराग पासवान सांसद, चिराग के चाचा रामचंद्र पासवान सांसद और एक चाचा पशुपति कुमार पारस बिहार सरकार में मंत्री हैं. ये पूरा परिवार, परिवारवाद के खिलाफ खड़ी बीजेपी के साथ गठबंधन में है.

परिवार के साथ परिवारवाद के विरुद्ध
ऐसी फिल्म की दूसरी जरूरत ये है कि सबको पता रहे कि लोकतंत्र में सबका वक्त आता है. जब यूपीए पावर में थी तो ऐसी फिल्म रिलीज नहीं हो सकती थी. इसलिए अभी इसे सुपरहिट करने में बीजेपी जोर लगा रही है. इसमें एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर रहे मनमोहन सिंह के समय हुए घोटालों और नीतियों वगैरह की बात होगी. हो सकता है कभी अभी वाली सरकार पर फिल्म बने तो उसमें नोटबंदी जैसे एक्सीडेंट की बात रहे जो एक्सीडेंट एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर भी नहीं कर पाए थे. अपना फ्यूचर ब्राइट है क्योंकि अभिव्यक्ति की आजादी तो है ही अपने देश में तो फिल्में बनेंगी और सुपरहिट भी होंगी. हम नहीं रहेंगे, आप नहीं रहेंगे लेकिन ये कहानियां तो हमेशा रहेंगी.
वीडियो में देखिए ठाकरे के ट्रेलर की खास बातें:

