Submit your post

Follow Us

सोनिया गांधी ने ऐसा क्या किया जो सुषमा स्वराज बोलीं- मैं अपना सिर मुंडवा लूंगी?

96
शेयर्स

1999. अटल बिहारी की 13 महीने की सरकार गिर चुकी थी. 13वें लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई थी. तब तक कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी संभाल चुकी थीं. मगर ये बात कुछ लोगों को हजम नहीं हो रही थी. सो शुरू हुआ विद्रोह. महाराष्ट्र के नेता शरद पवार, उत्तर-पूर्व के नेता पीए संगमा और बिहार के तारिक अनवर ने बिगुल फूंका और मुद्दा बनाया सोनिया गांधी का विदेशी मूल. तीनों नेताओं ने यहां तक की पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. अपनी नई पार्टी बना ली. नाम रखा नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी. ये पहली बार था कि सोनिया के विदेशी मूल का मसला इस तरह उठा था. तब पवार ने कहा था कि-

प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें विदेशी मूल की सोनिया स्वीकार नहीं हैं.

यही मुद्दा फिर बीजेपी ने पकड़ा. जोरशोर से उठाया. 1999 के चुनाव में ही. 1998 का दिल्ली विधानसभा चुनाव हारकर सुषमा स्‍वराज ताजा-ताजा राष्ट्रीय राजनीति में वापस लौटी थीं. बताया गया कि सुषमा कर्नाटक की बेल्‍लारी सीट से चुनाव लड़ेंगी. सब दंग रह गए. क्योंकि यहीं से कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी चुनाव लड़ने जा रही थीं. इस चुनाव को देसी बेटी बनाम विदेशी बहू कहा जाने लगा. सुषमा ने भी सोनिया के विदेशी मूल का मुद्दा खूब उठाया. हालांकि सुषमा ये चुनाव 56 हजार वोटों से हार गईं. मगर उनका कद बढ़ गया. वो अटल सरकार में मंत्री बनीं.

सुषमा स्वराज के नेतृत्व में बीजेपी 1998 का दिल्ली विधानसभा चुनाव हार गई थी.
सुषमा स्वराज के नेतृत्व में बीजेपी 1998 का दिल्ली विधानसभा चुनाव हार गई थी.

समय बीता. 2004 के चुनाव में बीजेपी का इंडिया शाइनिंग का जहाज डूबा. कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की. लगा कि सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनेंगी. इस पर सुषमा ने फिर एक बार मोर्चा संभाला. उन्होंने घोषणा की कि –

अगर सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह अपने पद से त्‍याग पत्र दे देंगी और अपना सिर मुंडवाकर पूरा जीवन एक भिक्षुक की तरह बिताएंगी.

शायद ही किसी नेता ने इससे पहले ऐसी घोषणा की होगी. हालांकि, सुषमा स्‍वराज को ऐसा कुछ नहीं करना पड़ा, क्‍योंकि सोनिया गांधी की जगह डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया.

सितंबर 2013 में भी सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी के पीएम बनने के सवाल पर 2004 की तरह ही बात की थी. एक कार्यक्रम में सुषमा ने कहा-

मैंने हमेशा कहा है कि सोनिया गांधी हमारे देश में इंदिरा गांधी की पुत्रवधू और राजीव गांधी की पत्नी के रूप में आई थीं और इस प्रकार वह हमारे प्यार और स्नेह की हकदार हैं. कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वह हमारे सम्मान की हकदार हैं, लेकिन अगर वह प्रधानमंत्री बनना चाहती हैं, तो मैं नहीं कहूंगी.

ट्विटर पर सुषमा स्वराज के लिए एक अफवाह उड़ी. अफवाह उड़ाने वालों में उनके अपने ही सहयोगी डॉक्टर हर्ष वर्धन भी शामिल थे. उन्होंने सुषमा को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल बनाए जाने पर बधाई दी (फोटो: रॉयटर्स)
सुषमा स्वराज के निशाने पर रही हैं सोनिया गांधी.

सुषमा ने आगे कहा था –

देश लंबे समय तक विदेशी शासन के अधीन रहा और आजादी के लिए कई लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था. अगर 60 साल की आजादी के बाद, हम किसी विदेशी को शीर्ष पद पर बिठाते हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि 100 करोड़ लोग अक्षम हैं. इससे लोगों की संवेदनशीलता प्रभावित होगी. यही कारण था कि मैंने 1999 में बेल्लारी से चुनाव लड़ा और यह मेरे लिए एक मिशन था. बेल्लारी में मैं लड़ाई हार गई, लेकिन युद्ध जीत गई.


लल्लनटॉप वीडियो देखें-

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

क्रिकेट के किस्से

चेहरे पर गेंद लगी, छह टांके लगे, लौटकर उसी बॉलर को पहली बॉल पर छक्का मार दिया

इन्होंने 1983 वर्ल्ड कप फाइनल और सेमी-फाइनल दोनों ही मैचों में 'मैन ऑफ द मैच' का अवॉर्ड जीता था.

पाकिस्तान आराम से जीत रहा था, फिर गांगुली ने गेंद थामी और गदर मचा दिया

बल्ले से बिल्कुल फेल रहे दादा, फिर भी मैन ऑफ दी मैच.

जब वाजपेयी ने क्रिकेट टीम से हंसते हुए कहा- फिर तो हम पाकिस्तान में भी चुनाव जीत जाएंगे

2004 में इंडियन टीम 19 साल बाद पाकिस्तान के दौरे पर गई थी.

शिवनारायण चंद्रपॉल की आंखों के नीचे ये काली पट्टी क्यों होती थी?

आज जन्मदिन है इस खब्बू बल्लेबाज का.

ऐशेज़: क्रिकेट के इतिहास की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी दुश्मनी की कहानी

और 5 किस्से जो इस सीरीज़ को और मज़ेदार बनाते हैं

जब शराब के नशे में हर्शेल गिब्स ने ऑस्ट्रेलिया को धूल चटा दी

उस मैच में 8 घंटे के भीतर दुनिया के दो सबसे बड़े स्कोर बने. किस्सा 13 साल पुराना.

वो इंडियन क्रिकेटर जो इंग्लैंड में जीतने के बाद कप्तान की सारी शराब पी गया

देश के लिए खेलने वाला आख़िरी पारसी क्रिकेटर.

जब तेज बुखार के बावजूद गावस्कर ने पहला वनडे शतक जड़ा और वो आखिरी साबित हुआ

मानों 107 वनडे मैचों से सुनील गावस्कर इसी एक दिन का इंतजार कर रहे थे.

जब श्रीनाथ-कुंबले के बल्लों ने दशहरे की रात को ही दीपावली मनवा दी थी

इंडिया 164/8 थी, 52 रन जीत के लिए चाहिए थे और फिर दोनों ने कमाल कर दिया.

श्रीसंत ने बताया वो किस्सा जब पूरी दुनिया के साथ छोड़ देने के बाद सचिन ने उनकी मदद की थी

सचिन और वर्ल्ड कप से जुड़ा ये किस्सा सुनाने के बाद फूट-फूटकर रोए श्रीसंत.