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जब अकेले माइकल होल्डिंग ने इंग्लैंड से बेइज्जती का बदला ले लिया था

इंग्लैंड की टीम वेस्टइंडीज की मेजबानी करने वाली थी. वेस्टइंडीज की टीम मई 1976 में यहां ऑस्ट्रेलिया से 5-1 की हार के बाद पहुंची थी. इसके बावजूद क्रिकेट एक्सपर्ट और मीडिया ये मान रहा था कि क्लाइव लॉयड की कप्तानी वाली ये वेस्ट इंडियन टीम काफी मजबूत है. इसी बीच सीरीज से पहले टोनी ग्रेग ने बीबीसी को एक इंटरव्यू दिया. इसमें इस कप्तान ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि ये टीम इतनी मजबूत है जितनी बताई जा रही है. उनकी फितरत हमेंश खुश करने की है. मैं चाहूंगा कि हम उनसे यही काम करवाएं.” टोनी के इस बयान का मतलब था कि वेस्टइंडीज के लोग ब्रिटेन के गुलाम रहे हैं और उनकी आदत में अभी भी यही है कि वो ब्रिटिशर्स के सामने सेवाभाव से रहें. टोनी की ये बयान अपने अाप में काफी बेइज्जती भरा था.

हालांकि ये एक माइंडगेम था, मगर इस बयान को सुनकर न सिर्फ वेस्टइंडीज की टीम ने इसे अपनी प्रतिष्ठा और स्वाभिमान का सवाल बना लिया. वहीं दूसरी ओर हजारों क्रिकेट फैन्स ने भी टोनी ग्रेग का विरोध करने के लिए मैदान पर आकर वेस्टइंडीज की टीम को सपोर्ट करना शुरू कर दिया. टोनी की इस सोच का मीडिया में भी खूब विरोध हुआ. सीरीज शुरू हुई और पहले दोनों टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुए. मगर तीसरा टेस्ट हुआ मैनचेस्टर में जिसे वेस्टइंडीज ने 425 रनों से जीत लिया. अगला टेस्ट था लीड्स में जहां इस कैरीबियन टीम ने इंग्लैंड को 55 रन से पटखनी दी.

मगर सबसे खुंखार हमला दिखा आखिरी टेस्ट में. यानी टेस्ट सीरीज का पांचवां और आखिरी टेस्ट हुआ ओवल के मैदान पर. पिच सपाट थी. मतलब ये कि गेंदबाजों को पिच से कोई मदद नहीं थी. मगर एक वेस्टइंडीज बॉलर के जबरदस्त स्पीड थी.यहां 17 अगस्त का दिन था मगर असल में दिन वेस्टइंडीज के फास्ट बॉलर माइकल होल्डिंग का था. सीरीज में 2-0 से आगे होने के बाद विव रिचर्ड्स ने पहले टीम के स्कोर को 687 पहुंचा दिया. जवाब में इंग्लैंड की टीम 435 के स्कोर पर आउट हो गई. अपनी स्पीड के बूते ही माइकल होल्डिंग ने अकेले 8 विकेट लिए. 33 ओवरों में 9 मेडन और 92 रन देकर 8 विकेट. दूसरी पारी में माइकल होल्डिंग ने 6 विकेट लिए. यानी एक टेस्ट में कुल 14 विकेट. ये किसी भी वेस्टइंडीज के खिलाड़ी का टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड है. वेस्टइंडीज इस मैच को 231 रनों से जीती और सीरीज 3-0 से.

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